NavinKadamNavinKadamNavinKadam
  • HOME
  • छत्तीसगढ़
    • रायगढ़
      • खरसिया
      • पुसौर
      • धरमजयगढ़
    • सारंगढ़
      • बरमकेला
      • बिलाईगढ़
      • भटगांव
    • शक्ति
    • जांजगीर चांपा
    • बिलासपुर
  • क्राइम
  • आम मुद्दे
  • टेक्नोलॉजी
  • देश-विदेश
  • राजनीति
  • व्यवसाय
  • Uncategorized
Reading: हरी खाद से खेत होंगे उपजाऊ, बढ़ेगी पैदावार और घटेगी खेती की लागत
Share
Font ResizerAa
NavinKadamNavinKadam
Font ResizerAa
  • HOME
  • छत्तीसगढ़
  • क्राइम
  • आम मुद्दे
  • टेक्नोलॉजी
  • देश-विदेश
  • राजनीति
  • व्यवसाय
  • Uncategorized
  • HOME
  • छत्तीसगढ़
    • रायगढ़
    • सारंगढ़
    • शक्ति
    • जांजगीर चांपा
    • बिलासपुर
  • क्राइम
  • आम मुद्दे
  • टेक्नोलॉजी
  • देश-विदेश
  • राजनीति
  • व्यवसाय
  • Uncategorized
Follow US
  • Advertise
© 2022 Navin Kadam News Network. . All Rights Reserved.
NavinKadam > रायगढ़ > हरी खाद से खेत होंगे उपजाऊ, बढ़ेगी पैदावार और घटेगी खेती की लागत
रायगढ़

हरी खाद से खेत होंगे उपजाऊ, बढ़ेगी पैदावार और घटेगी खेती की लागत

कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, रायगढ़ के वैज्ञानिकों ने किसानों को दी प्राकृतिक पोषण प्रबंधन अपनाने की सलाह

lochan Gupta
Last updated: July 8, 2026 11:57 pm
By lochan Gupta July 8, 2026
Share
5 Min Read

रायगढ़। कृषि की बढ़ती लागत और मृदा की घटती उर्वरता के बीच हरी खाद किसानों के लिए एक प्रभावी, प्राकृतिक और किफायती विकल्प बनकर उभर रही है। कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, रायगढ़ के प्राध्यापकों एवं वैज्ञानिकों ने किसानों से हरी खाद एवं हरी पत्तियों की खाद का अधिकाधिक उपयोग करने की अपील करते हुए बताया कि इससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है तथा फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि हरी खाद के लिए ढैंचा, सनई, मूंग, उड़द, लोबिया एवं ग्वार जैसी दलहनी फसलें बोई जाती हैं। इन फसलों को बुवाई के लगभग 35 से 45 दिन बाद, फूल आने से पहले रोटावेटर अथवा कल्टीवेटर की सहायता से खेत में ही मिट्टी में मिला दिया जाता है। कुछ दिनों में यह सडक़र जैविक खाद का रूप ले लेती हैं, जिससे मिट्टी में नाइट्रोजन, कार्बनिक पदार्थ तथा अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है।
इसी प्रकार हरी पत्तियों की खाद के लिए नीम, करंज, ग्लिरिसिडिया एवं सहजन जैसे वृक्षों की कोमल पत्तियों और टहनियों को खेत में मिलाया जाता है। इससे मिट्टी की जैविक गुणवत्ता में सुधार होने के साथ लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता भी बढ़ती है। वैज्ञानिकों के अनुसार हरी खाद से प्रति हेक्टेयर लगभग 50 से 60 किलोग्राम नाइट्रोजन की पूर्ति होती है। इससे मिट्टी की संरचना मजबूत होती है, जल धारण क्षमता बढ़ती है, भूमि का कटाव कम होता है तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होने से खेती की लागत घटती है। साथ ही फसलों की उपज में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि तथा गुणवत्ता में भी सुधार देखा गया है। धान में विटामिन एवं प्रोटीन की मात्रा बढऩे जैसे सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं।
वैज्ञानिकों ने बताया कि ढैंचा क्षारीय एवं लवणीय भूमि के लिए अत्यंत उपयुक्त हरी खाद फसल है, जबकि सनई शीघ्र गलने वाली कोमल फसल है। मूंग, उड़द, लोबिया तथा ग्वार जैसी दलहनी फसलें भी मृदा में नाइट्रोजन बढ़ाने के लिए उपयोगी हैं। इन फसलों की फलियां तोडऩे के बाद शेष हरे पौधों को भी खाद के रूप में मिट्टी में दबाया जा सकता है।उन्होंने किसानों को बीज की अनुशंसित मात्रा का पालन करने की सलाह दी। इसके अनुसार ढैंचा के लिए 20 से 25 किलोग्राम, मूंग 12 से 15 किलोग्राम, सनई 25 से 30 किलोग्राम, लोबिया 30 से 35 किलोग्राम तथा ग्वार 15 से 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज पर्याप्त होता है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि हरी खाद वाली फसलों में सामान्यत: अतिरिक्त खाद की आवश्यकता नहीं होती, हालांकि शुरुआती वृद्धि के लिए आवश्यकता अनुसार पोषक तत्व दिए जा सकते हैं। बुवाई प्रसारण (ब्रॉडकास्टिंग) अथवा कतार विधि से की जा सकती है। आवश्यक सिंचाई के बाद 45 दिन की कोमल अवस्था में फसल को रोटावेटर से मिट्टी में मिलाकर 7 से 10 दिन तक सडऩे दिया जाए। इसके बाद धान की रोपाई, लेही विधि से बुवाई अथवा ड्रम सीडर के माध्यम से कतार बुवाई की जा सकती है। धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) अपनाने वाले किसानों के लिए वैज्ञानिकों ने ब्राउन मैन्योरिंग तकनीक को भी उपयोगी बताया। इस पद्धति में धान के साथ 2:1 अनुपात में ढैंचा बोया जाता है। बाद में ढैंचा को नष्ट कर खेत में ही मल्च के रूप में छोड़ दिया जाता है, जिससे खरपतवार नियंत्रण, नमी संरक्षण और मृदा की उर्वरता बढऩे के साथ धान की उपज में भी सुधार होता है। कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, रायगढ़ के वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि वे हरी खाद एवं ब्राउन मैन्योरिंग जैसी पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाकर मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाएं, खेती की लागत कम करें तथा दीर्घकालीन टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि की दिशा में आगे बढ़ें।

You Might Also Like

संदिग्ध डीजल चोर गिरोह की स्कॉर्पियो पलटी, गाड़ी अंदर खाली डिब्बे और फर्जी नंबर प्लेट मिले

भारी वाहन की चपेट में आकर बाइक सवार ग्रामीण की मौत

पत्रकार आलोक व अमित के पिता के निधन पर प्रेस क्लब ने जताया शोक

कलेक्टर ने एफएसटीपी प्लांट का किया निरीक्षण

के्रटा कार से 8 लाख कैश किया जप्त

Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Telegram Email
Previous Article घरघोड़ा थाना में विद्यार्थियों ने सीखा कानून
Next Article ’जिले में चल रहे सघन कुष्ठ खोज अभियान का केंद्रीय टीम ने किया मूल्यांकन’

खबरें और भी है....

साय कैबिनेट की बैठक में विधेयकों को मंजूरी
घरघोड़ा एसडीएम दुर्गा प्रसाद बने राजनांदगांव जिला पंचायत के सीईओ
सूने मकान से 90 हजार के जेवरात पार
स्टेशन के सामने से हटाया गया पुराना मस्जिद
मौत के मुहाने से लौटे पाँच मासूम, मेडिकल कॉलेज ने सर्पदंश से पीडि़त तीन बच्चों को वेंटिलेटर पर रखकर किया उपचार

Popular Posts

डेंगू से निपटने निगम और स्वास्थ्य की टीम फील्ड पर,पिछले 5 साल के मुकाबले इस साल केसेस कम, फिर भी सतर्कता जरूरी
जहां रकबे में हुई है वृद्धि पटवारियों से करवायें सत्यापन-कलेक्टर श्रीमती रानू साहू,मांग अनुसार बारदाना उपलब्ध कराने के निर्देश
साय कैबिनेट की बैठक में विधेयकों को मंजूरी
मेगा हेल्थ कैंप का मिला फायदा, गंभीर एनीमिया से पीड़ित निर्मला को तुरंत मिला इलाज
स्कूल व आंगनबाड़ी के बच्चों का शत-प्रतिशत जारी करें जाति प्रमाण पत्र,कलेक्टर श्रीमती रानू साहू ने बैठक लेकर राजस्व विभाग की कामकाज की समीक्षा

OWNER/PUBLISHER-NAVIN SHARMA

OFFICE ADDRESS
Navin Kadam Office Mini Stadium Complex Shop No.42 Chakradhar Nagar Raigarh Chhattisgarh
CALL INFORMATION
+91 8770613603
+919399276827
Navin_kadam@yahoo.com
©NavinKadam@2022 All Rights Reserved. WEBSITE DESIGN BY ASHWANI SAHU 9770597735
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?