नारायणपुर। जशपुर जिले में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को गणित विषय में दक्ष बनाने के लिए जिला प्रशासन ने एक अभिनव पहल शुरू की है। कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में संचालित ‘जश-लर्न’ मिशन के तहत अब स्कूल समय समाप्त होने के बाद शिक्षक मोबाइल फोन के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यक्तिगत गणितीय कोचिंग देंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य कक्षा तीसरी से पांचवीं तक के बच्चों की गणितीय क्षमता को मजबूत करना और उनके मन से गणित का भय दूर करना है।
इसी उद्देश्य से गुरुवार को मनोरा विकासखंड के सभी 30 संकुलों में संकुल समन्वयकों द्वारा प्राथमिक शालाओं में कार्यरत शिक्षकों का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में शिक्षकों को कार्यक्रम की कार्यप्रणाली, विद्यार्थियों के चयन, फोन आधारित शिक्षण प्रक्रिया तथा सीखने के स्तर के मूल्यांकन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। जिला प्रशासन की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
जानकारी के अनुसार ‘जश-लर्न’ कार्यक्रम कर्नाटक में सफल रहे कनेक्टेड मॉडल पर आधारित है। इसके तहत प्रत्येक शिक्षक केवल तीन विद्यार्थियों को चयनित कर छह सप्ताह तक विशेष रूप से मार्गदर्शन देगा। इस अवधि को ‘सर्कल टाइम’ नाम दिया गया है। शिक्षक नियमित रूप से विद्यार्थियों अथवा उनके अभिभावकों को फोन कॉल कर बच्चों को गणित की बुनियादी अवधारणाएं समझाएंगे। प्रत्येक कॉल लगभग 30 मिनट से एक घंटे तक की होगी, जिसमें बच्चों की सीखने की गति और आवश्यकता के अनुसार व्यक्तिगत सहायता प्रदान की जाएगी।
कार्यक्रम का मुख्य फोकस गणित की मूलभूत संक्रियाओं जैसे जोड़, घटाव, गुणा और भाग को सरल एवं प्रभावी तरीके से सिखाना है। शिक्षा विभाग का मानना है कि कई विद्यार्थी उच्च कक्षाओं तक पहुंचने के बाद भी इन मूलभूत अवधारणाओं में कमजोर रह जाते हैं, जिससे आगे की पढ़ाई प्रभावित होती है। ‘जश-लर्न’ मिशन इसी चुनौती का समाधान निकालने का प्रयास है, ताकि बच्चे गणित को समझें, उससे जुड़ें और दैनिक जीवन में उसका उपयोग आत्मविश्वास के साथ कर सकें। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मनोरा विकासखंड शिक्षा अधिकारी तरुण कुमार पटेल भी शामिल हुए। उन्होंने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘जश-लर्न’ कार्यक्रम बच्चों में गणित विषय के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ उनके सीखने के स्तर में सकारात्मक बदलाव लाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी तथा डिजिटल माध्यमों के जरिए दूरस्थ अंचलों के बच्चों तक भी गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहा तो जिले के हजारों विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा और गणित जैसे चुनौतीपूर्ण विषय को लेकर बच्चों में आत्मविश्वास का नया वातावरण तैयार होगा। जिला प्रशासन की इस पहल को ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में नवाचार और गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मोबाइल बनेगा गणित का गुरु, फोन कॉल पर होगी पढ़ाई
‘जश-लर्न’ मिशन से अब गांव-गांव के बच्चों का दूर होगा मैथ्स का डर



