खरसिया। सेवा और विकास के मूल मंत्र को चरितार्थ करते हुए खरसिया के सिविल अस्पताल की सूरत बदल गई है। कभी ‘रिफर सेंटर’ की छवि और जीर्ण-शीर्ण व्यवस्थाओं से जूझ रहे इस 100 बिस्तर अस्पताल को अब एक आधुनिक, सर्वसुविधायुक्त चिकित्सा केंद्र के रूप में नया जीवन मिला है। इसी कड़ी में आज अस्पताल में बॉडी प्रिजर्वर (शव संरक्षण यंत्र) से लैस उच्च स्तरीय आधुनिक पोस्टमार्टम रूम का लोकार्पण नगर पालिका अध्यक्ष कमल गर्ग, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) प्रवीण तिवारी, सीएमओ श्रीमती नीतू अग्रवाल और बीएमओ डॉ. वी. के. राठिया, डॉ सुरेश राठिया, द्वारा आम नागरिकों व चिकित्सा कर्मियों की उपस्थिति में किया गया।
इच्छाशक्ति से बदला अस्पताल का स्वरूप
एक वर्ष पूर्व कार्यभार संभालने के बाद पालिकाध्यक्ष कमल गर्ग ने अस्पताल के कायाकल्प का बीड़ा उठाया। जिसमें उन्हें सजग एसडीएम प्रवीण तिवारी का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। लगातार 4 महीनों तक साप्ताहिक बैठकें कर कमियों को चिह्नित किया गया। प्रशासन और जनसहयोग के अनूठे समन्वय से अस्पताल में निम्नलिखित बदलाव आए हैं कबाड़ और अनुपयोगी कमरों की मरम्मत कर उन्हें सर्वसुविधायुक्त एयर कंडीशंड प्राइवेट पेइंग वार्ड और जनरल वार्ड में बदला गया। अस्पताल में ब्लड बैंक, शुद्ध पेयजल और स्वच्छता सुनिश्चित की गई है। साथ ही शासन के सहयोग से विशेषज्ञ डॉक्टरों और नए स्टाफ की नियुक्ति कराई गई है। अब मरीजों को बाहर रिफर करने की नौबत नहीं आ रही है। अस्पताल में हर महीने 70 से 80 सुरक्षित प्रसव और 30 से 35 सफल ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
जो दायित्व मिला उसे ईमानदारी से निभाना चाहिए -कमल गर्ग
इस अवसर पर नगरपालिका अध्यक्ष कमल गर्ग ने कहा कि पोस्टमार्टम के लिए डेड बॉडी बाहर खुले में रखी रहती थी। पोस्टमार्टम का एक छोटा सा रूम था और परिजन धूप बारिश में बाहर खड़े होकर परेशान होते थे। इसे देखते हुए सर्व सुविधायुक्त पोस्टमार्टम रूम का निर्माण करवाया गया और साथ ही छत पर शेड का निर्माण भी करवाया गया और आए हुए परिजनों के बैठने के लिए कुर्सी की व्यवस्था भी की गई है शेड लगवाने से जो नीचे वार्डों में सीलन आ रही थी उससे भी निजात मिल सकेगी। ?सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है, हमें आम जनता, गरीबों और बीमारों की सेवा का जो अवसर मिला है, उसे हमें पूरी ईमानदारी से निभाना चाहिए। हमारे लिए सत्ता सिर्फ सेवा का साधन है। हमारा एक ही मूल मंत्र है सेवा और विकास, और इस पर मैं खरा उतरने की पूरी कोशिश कर रहा हूं। ?खरसिया अस्पताल का यह बदलाव इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनप्रतिनिधियों का सेवा भाव एक साथ मिल जाए, तो सीमित संसाधनों में भी समाज के अंतिम व्यक्ति तक बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकती हैं।
परिजनों को मिलेगी दिक्कतों से मुक्ति- प्रवीण तिवारी
पोस्टमार्टम अस्पताल की छत पर एक छोटे और जर्जर कमरे में होता था, वह आदिम काल जैसा छोटा सा रूम जिसमें पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी पसीने से तरबतर हो जाते थे और परिजन बाहर धूप बारिश में दुख की घड़ी में और तकलीफ सहते थे इसे देखते हुए डीएमएफ फंड से पोस्टमार्टम रूम बनवाया गया। संवेदनशीलता दिखाते हुए पालिकाध्यक्ष और प्रशासन ने रायगढ़ कलेक्टर के माध्यम से डीएमएफ फंड से राशि स्वीकृत कराई और इस सर्वसुविधायुक्त पोस्टमार्टम रूम का निर्माण करवाया। ?हमारे द्वारा अस्पताल का पूर्ण जीर्णोद्धार किया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं में जो भी कमियां बची हैं, उन्हें दूर करने के लिए कलेक्टर महोदय से अतिरिक्त फंड का निवेदन किया जाएगा। इस अवसर पर हॉस्पिटल के डॉक्टर, नर्स, नगरपालिका पार्षदों अधिकारीयों कर्मचारियों, पत्रकारों, जनभागीदारी समिति के सदस्यों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही।



