रायगढ़। लोकल ट्रेनों के परिचालन शुरू होने से छोटे स्टेशन के यात्रियों को राहत मिली है तो वहीं एक्सप्रेस ट्रेनों के घंटों विलंब से चलने के कारण ट्रेन में बैठे यात्री तो परेशान हो ही रहे हैं, साथ ही स्टेशन में इंतजार कर रहे यात्री भी लंबे समय से हलाकान हैं। लेकिन इसके बाद भी समय में सुधार नहीं हो रहा है। ऐसे में शुक्रवार को अप दिशा से आने वाली आजाद हिंद एक्सप्रेस सात घंटा तो संतरागांछी एक्सप्रेस 6 घंटा देरी से रायगढ़ पहुंची। इससे पूरे दिन सहयोग काउंटर पर यात्री ट्रेन के अपडेट लेने में लगे रहे।
उल्लेखनीय है कि अकलतरा स्टेशन में चौथी लाइन कनेक्टिीविटी कार्य के चलते रेलवे विभाग द्वारा रेलवे विभाग द्वारा 31 मार्च से 11 अप्रैल तक मेगा ब्लाक लेकर कार्य को पूर्ण करना था। जिसके चलते रायगढ़-बिलासपुर मेमू व जेडी पैसेंजर का परिचालन रद्द किया गया था। इससे छोटे स्टेशन के यात्रियों की समस्या बढ़ गई थी। वहीं इन ट्रेनों के रद्द होने के कारण लेट-लतीफी चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों में दबाव बढऩे के कारण जो यात्री रिजर्वेशन कराकर सफर कर रहे थे, उनको भी परेशान होना पड़ रहा था। ऐसे में छोटे स्टेशन के यात्री आटो व अन्य साधन से अपने गंतब्य के लिए रवाना हो रहे थे। लेकिन अपरिहार्य कारणों से उक्त कनेक्टिविटी का कार्य निरस्त होने से यात्रियों की परेशानी को देखते हुए रेलवे ने फिर से रायगढ़-बिलासपुर मेमू का परिचालन शुरू हो गया है। इससे शुक्रवार से यह दोनों ट्रेने अपने निर्धारित समय पर चलने लगी है। जिससे छोटे स्टेशन के यात्रियों को काफी राहत मिली है। इस संबंध में यात्रियों का कहना था कि इन दिनों शादी का समय चल रहा है, इसके चलते लोगों का लगातार आना-जाना लगा है। ऐसे में पैसेंजर ट्रेनों का परिचालन शुरू होने से काफी राहत मिली है। हालांकि यह ट्रेन 03 से 7 अप्रैल तक रिस्टोर की गई है। ऐसे में अगर फिर से कनेक्टिविटी कार्य शुरू होता है तो फिर से रद्द हो सकती है।
वहीं एक्सप्रेस ट्रेनों पर नजर डाले तो इसकी लेट-लतीफी का दौर खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है, वहीं ठंड के दिनों में यह कहा जा रहा था कि ट्रेने अपने गंतब्य स्थान से ही विलंब से चल रही है, इसके चलते लेट हो रही है, लेकिन अब न तो कोहरा है और न ही ज्यादा काम चल रहा है, इसके बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। ऐसे में शुक्रवार को अप व डाउन दिशा से आने वाली लगभग सभी ट्रेने लेट पहुंची थी। इस दौरान सहयोग काउंटर पर ट्रेनों की जानकारी लेने यात्रियों की भीड़ लगी रही, लेकिन लेट-लतीफी का कारण यहां मौजूद कर्मचारी भी नहीं बता पा रहे थे। इससे घंटों इंतजार के बाद यात्री अपने गंतब्य के लिए रवाना हो सके। वहीं शुक्रवार को अप दिशा से लेट में आने वाली ट्रेनों में हावड़ा-मेल ढाई घंटा देरी से सुबह करीब 7 बजे पहुंची थी। वहीं हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस का समय रायगढ़ में सुबह 8.30 बजे है, लेकिन यह ट्रेन तीन घंटा देरी से सुबह करीब 11.30 बजे पहुंची। संतरागांछी-जबलपुर एक्सप्रेस का समय सुबह 4.45 बजे है, लेकिन यह ट्रेन साढ़े 6 घंटा देरी से 11.35 बजे पहुंची थी।
इसी तरह आजाद हिंद एक्सप्रेस का समय सुबह 6.45 बजे है, जो दोपहर 2.30 बजे पहुंची। वहीं पुरी-ऋषिकेश उत्कल एक्सप्रेस अपने निर्धारित सयम से ढाई घंटा देरी से 2.30 बजे तो आरा-दुर्ग साउथ बिहार एक्सप्रेस ढाई घंटा देरी से रायगढ़ पहुंची थी। इसी तरह डाउन दिशा से आने वाली हीराकुंंड एक्सप्रेस का रायगढ़ में समय सुबह 6 बजे है, लेकिन यह ट्रेन करीब तीन घंटा देरी से सुबह 9 बजे पहुंची थी। इसी तरह टिटलागढ़ पैसेंजर एक घंटा तो दुर्ग आरा साउथ बिहार एक्सप्रेस आधा देरी से पहुंची। वहीं ऋषिकेश-पुरी उत्कल एक्सप्रेस का रायगढ़ में समय सुबह 11.30 बजे है लेकिन यह ट्रेन तीन घंटा देरी से दोपहर करीब 2.30 बजे पहुंची। इसी तरह जबलपुर-संतरागांछी एक्सप्रेस का समय सुबह 5.30 बजे हो करीब 9 घंटा देरी से दोपहर करीब 2.30 बजे पहुंची थी। इससे सुबह से लेकर दोपहर तक स्टेशन में यात्रियों की भीड़ लगी रही।
सहयोग काउंटर पर लगी रही भीड़
उल्लेखनीय है कि इन दिनों एक्सप्रेस ट्रेनों के लेट-लतीफी परिचालन होने के कारण सहयोग काउंटर पर हर समय भी यात्रियों की भीड़ देखी जा रही है। इस दौरान कोई लोकल ट्रेनों की जानकारी लेते नजर आता है तो कोई एक्सप्रेस की। लेकिन किसी भी ट्रेन की सही जानकारी नहीं मिल पाती है कि कितने घंटे देरी से पहुंचेगी, इसके चलते जब तक ट्रेन नहीं आ जाती, तब तक यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है।
रात में ही पहुंच जाते हैं यात्री
उल्लेखनीय है कि अप दिशा से आने वाली लगभग सभी ट्रेनों का समय सुबह का ही है। इसके चलते दूर-दराज के यात्रियों को रात में ही स्टेशन पहुंचना पड़ता है, ताकि उक्त ट्रेन में सफर कर सके, लेकिन यहां पहुंचने के बाद ट्रेनों के लेट-लतीफी को देख हलाकान हो जा रहे हैं। वहीं यात्रियों का कहना है कि एक तो स्टेशन में काम चलने के कारण न तो सही ढंग से बैठने की व्यवस्था है और न ही शौचालय की, इसके चलते काफी दिक्कत हो रही है। हालांकि पैड प्रतिक्षालय तो है, लेकिन उसमें सभी यात्री नहीं जा पा रहे हैैं, ऐसे में अब काफी मजबूरी होने पर शौचालय उपयोग के लिए ही जाते हैं, इससे हर बार 10 रुपए पैड करना पड़ रहा है। ऐसे में जब तक यात्री प्रतिक्षालय के साथ-साथ सामुदायिक शौचालय शुरू नहीं होगी तब तक यहां ट्रेन का इंतजार करना काफी मुश्किल हो रहा है।



