खरसिया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे कम उम्र के क्रांतिकारियों में से एक, अमर शहीद हेमू कालानी की जयंती आज देशभर में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों और सिंधी समाज द्वारा देश के कई हिस्सों में विशेष श्रद्धांजलि सभाओं और प्रभात फेरियों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर खरसिया में हेमू कलाणी चौक पर स्थित अमर शहीद हेमू कलाणी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए पुज्य सिंधी पंचायत खरसिया द्वारा पुष्पांजलि अर्पित करते हुए अमर शहीद हेमू कालाणी को याद किया। इस अवसर पर भाजपा खरसिया के वरिष्ठ नेता गिरधर गुप्ता नगरपालिका अध्यक्ष कमल गर्ग और पार्षदों सहित खरसिया नगर के गणमान्य नागरिकों ने भी हमर शहीद को याद करते हुए उनकी प्रतिमा पर अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कौन थे हेमू कालानी
हेमू कालानी का जन्म 23 मार्च, 1923 को सिंध के सख्खर (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। छोटी उम्र से ही वे आजादी के आंदोलनों में सक्रिय हो गए थे। मात्र 19 वर्ष की आयु में उन्होंने वह साहस दिखाया जिसने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी। शहादत की वीरतापूर्ण गाथा रू. 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान, जब हेमू को सूचना मिली कि ब्रिटिश सेना हथियारों से भरी एक ट्रेन लेकर गुजरने वाली है, तो उन्होंने अपने साथियों के साथ रेल की पटरियां उखाडऩे का फैसला किया। दुर्भाग्यवश, वे पकड़े गए और ब्रिटिश अदालत ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई। मैं अपनी मातृभूमि के लिए हंसते-हंसते जान दे दूंगा, लेकिन फिर से इसी धरती पर जन्म लूंगा।



