पखांजूर। ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठनों के बैनर तले बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने धरना-रैली निकालकर अपनी लंबित मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। संगठन ने नेलडोड्डा नदी पर पुलिया निर्माण, घोड़ागांव से अंजड़ी होते हुए मरकाचुआ (मुड्डोडा) तक पक्की सडक़ निर्माण तथा पहुंचविहीन गांवों के मजदूरों को मजदूरी का नगद भुगतान करने की मांग को लेकर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पखांजूर को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री, मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, राज्य कृषि मंत्री, वन मंत्री, मुख्य सचिव और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि घोड़ागांव से व्हाया 44 से अंजड़ी तक 4.60 किलोमीटर सडक़ एवं नेलडोड्डा नदी पर पुलिया निर्माण के लिए 1 अगस्त 2024 को लगभग 6 करोड़ 92 लाख 17 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। डेढ़ वर्ष बीत जाने और वर्ष 2026 शुरू हो जाने के बाद भी निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पूर्व में भी पुलिया निर्माण के लिए सामग्री डाली गई थी, लेकिन कुछ दिनों बाद वह सामग्री हटा दी गई और कहीं अन्यत्र उपयोग कर ली गई।
अंजड़ी ग्राम के पटेल मैनुराम किरंगा, ग्राम सचिव सोमजी उईके सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि नेलडोड्डा नदी में पुलिया नहीं होने से लोगों को जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार करनी पड़ती है। बरसात के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। कई बार राहगीर तेज धारा में बह चुके हैं। बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भारी परेशानी होती है और समय पर उपचार न मिलने से जान तक चली जाती है। गर्भवती महिलाओं को असुरक्षित परिस्थितियों में प्रसव करना पड़ता है, जिससे मातृ और शिशु मृत्यु का खतरा बना रहता है।
संगठन ने यह भी मांग की कि पहुंचविहीन गांवों के मजदूरों—जैसे तेंदूपत्ता तोड़ाई, बांस कटाई और अन्य कार्यों में लगे श्रमिकों—की मजदूरी नगद दी जाए। उनका कहना है कि ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था के कारण ग्रामीणों को बैंक तक जाने में अतिरिक्त खर्च और समय की बर्बादी झेलनी पड़ती है। कई बार खाते में राशि आई या नहीं, इसकी जानकारी के लिए भी दूर-दराज जाना पड़ता है और खाली हाथ लौटना पड़ता है, जिससे कर्ज और आर्थिक संकट बढ़ता है। अजित मिस्त्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सडक़ योजना को शुरू हुए 25 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन घोड़ागांव, अंजड़ी, मरकाचुआ सहित 35 से अधिक गांव आज भी मुख्यालय तक पहुंचने के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 80-90 वर्षों से बसे इन गांवों में अब तक बुनियादी सडक़ और पुलिया जैसी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं, जो ‘विकसित भारत’ के दावों पर प्रश्नचिन्ह है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग खंडहर हो चुकी सडक़ों की मरम्मत की जिम्मेदारी भी नहीं निभा रहे हैं। मजबूरी में लोग बांस-बल्ली के सहारे अस्थायी पुल बनाते हैं। छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है, उच्च व तकनीकी शिक्षा से बच्चे वंचित हो रहे हैं और योजनाओं के तहत मिली साइकिलें उपयोग के अभाव में जंग खा रही हैं। अनुविभागीय अधिकारी ने प्रदर्शनकारियों की बातें सुनते हुए आश्वासन दिया कि नेलडोड्डा नदी पर पुलिया और घोड़ागांव से अंजड़ी तक सडक़ निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने का प्रयास किया जाएगा तथा अन्य समस्याओं के समाधान पर भी पहल की जाएगी। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन और चक्का जाम करने को बाध्य होंगे।
नेलडोड्डा नदी पर पुलिया और सडक़ निर्माण की मांग तेज, पखांजूर में किसानों,मजदूरों का धरना
35 गांवों की आवाज बुलंद: पुलिया, पक्की सडक़ और नगद मजदूरी भुगतान को लेकर सौंपा ज्ञापन



