सारंगढ़। जिले में सेवा और समर्पण की मिसाल पेश कर रहे प्रशासनिक अधिकारियों की छवि को सोशल मीडिया के जरिए दागदार करने की एक घटिया व सुनियोजित साजिश बेनकाब हुई है। अखिल भारतीय हिंदू महासभा (युवा मोर्चा) के स्वयंभू नेता आकाश भारद्वाज द्वारा फेसबुक पर फैलाए गए सफेद झूठ ने अब कानूनी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। बिना किसी सिर-पैर के लगाए गए इन आरोपों ने न केवल प्रशासन की मर्यादा को चुनौती दी है, बल्कि एक अपराधी प्रवृत्ति की मांनसिकता को भी उजागर किया है।
षड्यंत्र का पर्दाफाश मोबाइल और रिश्वत के दावों की खुली पोल
आकाश भारद्वाज ने अपनी फेसबुक पोस्ट में कलेक्टर और खनिज विभाग के अधिकारियों पर 1.35 लाख के मोबाइल गिफ्ट और अवैध उत्खनन में संलिप्तता के जो आरोप लगाए हैं, वे पूरी तरह से तथ्यहीन, बेबुनियाद और मानसिक दिवालियापन का प्रतीक हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि – गुप्ता मोबाइल का नाम लेकर गढ़ी गई यह कहानी केवल सनसनी फैलाने और अधिकारियों को ब्लैकमेल करने की एक नाकाम कोशिश है।
ईमानदारी पर प्रहार, बर्दाश्त नहीं करेगा प्रशासन
जिले में जब से खनिज माफियाओं और अवैध कारोबारियों पर नकेल कसी गई है, तब से कुछ असामाजिक तत्व बौखलाए हुए हैं। खनिज अधिकारी बजरंग पैकरा, अनुराग और कोसीर थाना प्रभारी जैसे कर्मठ अधिकारियों के नाम को घसीटना यह दर्शाता है कि – यह हमला व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को अस्थिर करने का एक कुशित प्रयास है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि जो अधिकारी दिन-रात जिले के विकास और कानून व्यवस्था के लिए पसीना बहा रहे हैं, उनके चरित्र पर कीचड़ उछालने वालों को अब सलाखों के पीछे भेजने का समय आ गया है।
मानहानि और आईटी एक्ट के तहत होगी नकेल
इस गंभीर मामले को लेकर प्रशासन ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपना ली है। सूत्र बताते हैं कि आकाश भारद्वाज के खिलाफ मानहानि और आईटी एक्ट की संगीन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। सोशल मीडिया पर फैलाए गए इस डिजिटल कचरे को साफ करने के लिए पुलिस और साइबर सेल सक्रिय हैं। शासन के प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए अब उन तत्वों को सबक सिखाया जाएगा जो अभिव्यक्ति की आजादी को गाली और झूठ का लाइसेंस समझ बैठे हैं।
जनता का भरोसा बनाम सोशल मीडिया का प्रोपेगेंडा
आम जनता के बीच प्रशासन की छवि एक रक्षक और विकासकर्ता की है। ऐसे में किसी एक व्यक्ति द्वारा अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए पूरी व्यवस्था को सरगना बताना उसकी अपनी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। जिले के प्रबुद्ध नागरिकों ने भी इस कृत्य की निंदा की है और मांग की है कि ऐसे फेसबुकिया वीरों पें तत्काल सख्त वैधानिक कार्यवाही हो ताकि भविष्य में कोई भी वर्दी और पद की गरिमा से खेलने का दुस्साहस न करे।
सच बनाम झुठ की लड़ाई
यह मामला अब केवल एक पोस्ट तक सीमित नहीं है, यह सच बनाम झूठ की लड़ाई बन चुका है। प्रशासन की इस आक्रामक तैयारी से साफ है कि – अब झूठ का महल ढहने वाला है और आरोपों की राजनीति करने वालों को न्यायालय के चक्कर काटने होंगे।
फेसबुकिया आरोपों की उतरी हवा, ईमानदार छवि पर वार करने वाले आकाश पर गिरेगी कानूनी गाज



