पखांजुर। बांदे क्षेत्र में वार्षिक मतुआ महोत्सव का शुभारंभ शनिवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। महोत्सव की शुरुआत भगवान श्री श्री हरिचांद ठाकुर की भव्य कलश यात्रा के साथ हुई। यह कलश यात्रा पी.व्ही.-82 से प्रारंभ होकर बांदे मार्ग होते हुए हरिचांद आश्रम, पी.व्ही.-82 में संपन्न हुई। इस धार्मिक आयोजन में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और मतुआ अनुयायियों ने भाग लेकर क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में परिवर्तित कर दिया। यह वार्षिक उत्सव पिछले लगभग 30 वर्षों से निरंतर आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव में देश के लगभग 13 राज्यों से 30 से 40 हजार तक श्रद्धालु एवं रवि गोसाई के शिष्य शामिल होते हैं।
आयोजन के दौरान लगातार भजन-कीर्तन, धार्मिक प्रवचन और पूजा-अर्चना का क्रम चलता रहता है। साथ ही श्रद्धालुओं के लिए चार दिनों तक निरंतर भंडारा (सामूहिक प्रसाद वितरण) की व्यवस्था की जाती है। बताया जाता है कि श्री श्री हरिचांद ठाकुर और उनके पुत्र गुरुचंद ठाकुर का मुख्य उद्देश्य समाज के दलित, शोषित समुदाय का सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान करना था। उन्होंने मतुआ धर्म की स्थापना कर समाज में समानता, शिक्षा और मानवता का संदेश दिया। उन्होंने अपने उपदेशों के माध्यम से प्रेम, करुणा, ईमानदारी और पारिवारिक जीवन के सम्मान जैसे मूल्यों को बढ़ावा दिया। साथ ही दलित समाज को संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने, आत्मनिर्भर बनने तथा सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इन्हीं आदर्शों और शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर आज मतुआ समुदाय के अनुयायी सामाजिक उत्थान और एकता के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं।
भव्य कलश यात्रा के साथ वार्षिक मतुआ महोत्सव का शुभारंभ, हजारों श्रद्धालु शामिल
30 वर्षों की परंपरा — श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हुआ मतुआ महोत्सव, देशभर से पहुंचे हजारों अनुयायी, मतुआ महोत्सव में गूंजे भजन-कीर्तन



