बिलासपुर। जिले में पति ने तलाक के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई। पति का आरोप है कि उसकी पत्नी अपने बॉयफ्रेंड को न्यूड वीडियो कॉल करती थी। हाईकोर्ट को फुटेज भी सौंपे हैं। वहीं पत्नी ने कहा कि पति बेडरूम में कैमरे लगवाकर नजर रखता था।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद महासमुंद फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया है। केस की दोबारा सुनवाई करने के आदेश दिए हैं। सीसीटीवी फुटेज वाली सीडी को रिकॉर्ड पर लेने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि मामला 4 साल से अधिक समय से लंबित है, इसलिए फैमिली कोर्ट इसे प्राथमिकता के आधार पर निपटाए। जस्टिस संजय के. अग्रवाल और अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज, सीडी या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को फैमिली कोर्ट की कार्यवाही में सिर्फ इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि उनके साथ इंडियन एविडेंस एक्ट की धारा 65-बी के तहत सर्टिफिकेट नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 की धारा 14 और 20 के तहत, फैमिली कोर्ट के पास किसी भी विवाद को प्रभावी ढंग से सुलझाने के लिए किसी भी दस्तावेज या सबूत को स्वीकार करने की शक्ति है। भले ही वह तकनीकी रूप से एविडेंस एक्ट की सभी जरूरतों को पूरा न करता हो।
दरअसल, तमनार थाने में दर्ज शिकायत के मुताबिक, महासमुंद की रहने वाली एक महिला की शादी रायगढ़ निवासी युवक के साथ साल 2012 में हुई थी। पति जिंदल पावर तमनार में कर्मचारी था, इसलिए वह शादी के कुछ दिनों बाद ही ससुराल से पति के साथ लौटकर तमनार में रहने लगी। महिला का आरोप है कि तमनार आने के बाद पति ने अतिरिक्त रुपयों की डिमांड शुरू कर दी।
उत्पीडऩ शुरू किया। इतना ही नहीं पति ने पत्नी पर नजर रखने के लिए कमरे में चुपचाप सीसीटीवी कैमरा लगवा दिए। कैमरा लगाने और बेवजह परेशान करने की बात पर पत्नी ने विरोध किया तो पति मारपीट करने लगा। घर से भी निकाल देने की धमकी दी। नवंबर 2019 को ससुराल और मायके वालों के बीच दोनों को समझाने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद पति पत्नी को साथ रखने के लिए राजी नहीं हुआ। कुछ महीने तक इंतजार करने के बाद पत्नी ने तमनार थाने जाकर उत्पीडऩ और कमरे में सीसीटीवी लगवाने की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके साथ ही फैमिली कोर्ट में दांपत्य अधिकारों की बहाली की मांग की थी।
फैमिली कोर्ट ने खारिज की याचिका
वहीं, पति ने भी पत्नी पर क्रुरता और आपत्तिजनक आचरण के आरोप लगाते हुए फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका लगाई थी। पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी अन्य पुरुषों के साथ अश्लील चैटिंग और वीडियो कॉल करती है। इन आरोपों को साबित करने के लिए पति ने बेडरूम में सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे। उनकी फुटेज को एक कॉम्पैक्ट डिस्क के रूप में कोर्ट में पेश किया था, लेकिन महासमुंद के फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक की अर्जी खारिज कर दी थी। कोर्ट ने सीडी को सबूत मानने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था, क्योंकि उसके साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी का अनिवार्य प्रमाणपत्र नहीं दिया गया था। वहीं, पत्नी की दांपत्य अधिकारों की बहाली की याचिका स्वीकार कर ली थी। पति ने फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।



