जशपुरनगर। वर्तमान परिपेक्ष्य में कम्युनिकेशन व आर्थिक लेन-देन जैसे गतिविधियों में मोबाइल जैसे माध्यमों की उपयोगिता बढ़ रही है, वहीं साइबर अपराध भी बढ़ रहे हैं, साइबर अपराधियों के द्वारा ऑन लाइन अपराध हेतु नए नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, जहां लोग जागरूकता के आभाव में साइबर ठगी जैसे अपराधों के आसानी से शिकार बन जाते हैं,। इसी के मद्देनजर नजर, जशपुर पुलिस के द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से आम नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने हेतु ‘क्लिक सेफ’ कार्यक्रम के तहत साइबर योद्धा तैयार किए गए हैं, जो कि लोगों के मध्य,, जैसे बाजार हाटों, स्कूल कालेजों इत्यादि में जाकर लोगों को साइबर अपराध के प्रति जागरूक करते हैं, साथ ही बाल विवाह, मानव तस्करी, नशा पान के दुष्प्रभाव, तथा यातायात नियमों के संबंध में भी आम नागरिकों को जागरूक किया जाता है। इसी क्रम में दिनांक 23.11.25 को जशपुर पुलिस की सायबर सेल व यूनिसेफ के संयुक्त टीम के द्वारा शासकीय बालिका पोस्ट मैट्रिक छात्रावास जशपुर में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान सायबर सेल जशपुर से डी एस पी ( अजाक) भावेश समरथ के द्वारा उपस्थित छात्राओं को ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया गया कि वर्तमान समय में ऑनलाइन अपराधों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, जागरूकता से ही ऐसे अपराधों से बचा जा सकता है, साथ ही छात्राओं को फेस बुक, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग हेतु जागरूक करते हुए बताया कि किसी भी व्यक्ति के फ्रेंड रिक्वेस्ट को अन्यास ही एक्सेप्ट न करें, उसके बारे में सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध होने पर ही, रिक्वेस्ट को एक्सेप्ट करें, सोशल मीडिया पर अपनी फोटो वीडियो को शेयर करते समय सावधानी बरतें। किसी भी प्रकार की ओ टी पी को बिना जानकारी के शेयर न करें, अंजान लिंक पर क्लिक न करें, ऐसा करने पर आप सायबर ठगी का शिकार हो सकते हैं। यूनिसेफ की जिला समन्वय शालिनी गुप्ता के द्वारा लिंग भेदभाव, उसके दुष्परिणाम, बॉडी शेमिंग व उससे प्रभावित मानसिक तथा सामाजिक पहलुओं से भी उपस्थित छात्राओं को जागरूक किया। साथ ही बाल विवाह, मानव तस्करी के बारे में जागरूक करते हुए, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के सम्बन्ध में भी बताया गया।
जशपुर पुलिस की अपील- निम्न सावधानियां बरतकर साइबर फ्रॉड से बचा जा सकता है- संदिग्ध लिंक, अनजान ईमेल या कॉल पर क्लिक न करें और कोई जानकारी साझा न करें। विश्वसनीय और सुरक्षित वेबसाइट्स का ही इस्तेमाल करें, जिनके यूआरएल में एचटीटीपीएस हो और ताले का निशान दिखे। अपने ऑनलाइन खातों में दो-कारक प्रमाणीकरण (2एफए) सक्षम करें। मजबूत और आसान से अनुमानित न हो पाने वाले पासवर्ड बनाएं और नियमित रूप से बदलें। सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क पर संवेदनशील लेन-देन न करें, यदि आवश्यक हो तो व्हीपीएन का उपयोग करें। व्यक्तिगत जानकारी जैसे मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, आधार नंबर, बैंक डिटेल्स सोशल मीडिया या संदिग्ध वेबसाइट पर शेयर न करें। समय-समय पर अपने डिवाइस और ऐप्स को अपडेट रखें ताकि सुरक्षा बनी रहे। ऑनलाइन लेन-देन और लॉगिन गतिविधियों की नोटिफिकेशन निगरानी करें।
किसी भी अनजान कॉल या मैसेज में ह्रञ्जक्क कभी साझा न करें क्योंकि असली बैंक ऐसी मांग नहीं करता। किसी भी प्रकार की सायबर अपराध का शिकार होने पर तत्काल हेल्प लाइन नंबर 1390 पर संपर्क करें, व निकटतम थाने व साइबर सेल को सूचित करें,। जागरूकता ही बचाव है। कार्यक्रम के दौरान उप पुलिस अधीक्षक (अजाक) भावेश समरथ, यूनिसेफ की जिला समन्वयक शालिनी गुप्ता, छात्रवास अधीक्षक मिना प्रधान, पुलिस व हॉस्टल के अधिकारी कर्मचारी सहित छात्रवास की छात्राएं उपस्थित रहीं।
‘क्लिक सेफ’ व सायबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
छात्र-छात्राओं को दी गई सायबर अपराध से बचने की जानकारी, बताए बचाव के उपाय



