सारंगढ़। कटंगपाली क्षेत्र में अवैध डोलोमाइट खदानों तक न तो जिला प्रशासन पहुंच पा रही है न ही खनिज विभाग के अधिकारी पहुंच पा रहे हैं। जिसके कारण इस कारोबार में लिप्त लोग हर माह शासन को रॉयल्टी के रूप में लाखों रुपए का चपत लगा रहे हैं और खनिज संपदा के भंडार को खोखला करने में लगे हुए हैं। यह बात सामने आई कि कटंगपाली के अंदर प्रवेश करते हुए मुख्य मार्ग के एक छोर में आबादी क्षेत्र है ंतो वहीं दूसरे में अवैध डोलोमाइट खदान संचालित है। मुख्य मार्ग से महज कुछ कदम की दूरी में संचालित इस अवैध डोलोमाइट खदान की जानकारी नवगठित जिले के जिला खनिज अधिकारी को भी हो गया होगा। उक्त अवैध खदान की खबर प्रकाशित होने के बाद क्षेत्र के और भी इस तरह के अवैध खदान सामने आएं जिसमें अवैध खदान संचालित करना बताया गया। इसके बाद भी अभी तक न तो नवगठित जिले के राजस्व अमला इन खदानों तक जांच करने के लिए पहुंच पाई न तो खनिज विभाग के अधिकारी पहुंच पाए।
क्या कहते हैं खनिज अधिकारी बजरंग पैकरा
वही जब हमने इस संबंध में खनिज अधिकारी बजरंग पैंकरा से संपर्क साधा तो उन्होंने बताया कि हमारे जिले में जो भी अवैध उत्खनन या परिवहन करेगा उस पर सख्त से सख्त कार्यवाही की जाएगी। अभी मामला संज्ञान में आया है कि कटंगपाली में अवैध उत्खनन और परिवहन हो रहा है इसकी जांच का आदेश दे दिया गया है और जो भी अवैध रूप से काम करता होगा उस पर सख्त से सख्त कार्यवाही की जाएगी। जिले में अवैध उत्खनन या परिवहन पर किसी को बक्सा नहीं जाएगा।
चल रहा बहानेबाजी का दौर
खनिज विभाग के अधिकारी शुरूआत में नवगठित जिले में आने वाले बरमकेला के कटंगपाली क्षेत्र के में खनन जोरों पर है। एक पूरा समूह कर रहा है काम बताया जाता है कि कटंगपाली क्षेत्र में चार-पांच क्रेशर मालिक ही लोगों को काम करवा रहे हैं जो कि डोलोमाइट के अवैध खदान संचालित करने का काम करते हैं, इन सभी को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है जिसके कारण आज पर्यंत तक इस क्षेत्र के किसी भी जनप्रतिनिधियों ने अवैध डोलोमाइट खदानों पर कार्रवाई करने का मुद्दा नहीं उठाया। सिर्फ अवैध डोलोमाइट के परिवहन का मुद्दा उठता रहा है
कटंगपाली की दर्जनों क्रशरों में अवैध रूप से डोलोमाइट डंप लेकिन माइनिंग विभाग बेखबर
वही कटंगपाली की दर्जनों क्रशरों में अवैध रूप से डोलोमाइट का भंडार पड़ा हुआ है, लेकिन यहां तो सारंगढ़ की माइनिंग विभाग को झांकने तक की फुर्सत नहीं है और ना ही कभी कार्यवाही करने जा रही है इसीलिए तो अवैध रूप से क्रेशर मालिक ही अवैध खदानों का संचालित करवा कर मालामाल हो रहे हैं और शासन प्रशासन को चूना लगा रहे हैं। वही लोगों के बताए अनुसार कई क्रेशर मालिक ऐसे हैं जो अवैध रूप से खदान लेकर नौघटा, छैलफोरा और मौहापाली में अवैध खनन कर अपनी क्रशरों में डोलोमाइट लाकर डंप किया जा रहा है। अगर माइनिंग विभाग को क्रशरों में जांच ही करनी है तो पहले क्रेशर में जाकर देखा जाए की कितनी टन की क्षमता है उसके बाद वहां पर वन- टू और डस्ट कितना भरा पड़ा है, इससे अनुमान लगाया जा सकता है की कितनी डोलोमाइट की खनन हुआ है और कितना डोलोमाइट बिका है। क्या सभी का रायल्टी पर्ची इनके पास है, अगर नहीं है तो आया कहां से ? इन सब बातों को अगर गहराई से जांच किया जाए तो कई खामियां मिलेगी और शासन को करोड़ों का चूना लगाने वाले को सारंगढ़ माइनिंग विभाग कार्यवाही कर सकती है, लेकिन यहां तो खनिज अधिकारी को अपनी चैंबर से ही निकलने की फुर्सत नहीं है तो कार्यवाही कहां हो पाएगी। देखते हैं आने वाले समय में कार्यवाही हो पाती है या फिर साहब अपनी कुर्सी छोडक़र कुछ कार्यवाही करने के लिए निकलते हैं या फिर ऑफिस में ही बैठे रहते हैं।
मुख दर्शक बन देख रहे हैं अधिकारी
वही प्राप्त जानकारी के अनुसार अगर खनिज विभाग को अवैध रूप से संचालित हो रही डोलोमाइट क्रशरों का पता है तो कहीं राजनीतिक दबाव तो नहीं या फिर लक्ष्मी जी की असीम कृपा भी हो सकती है इसीलिए तो माइनिंग विभाग आज तक कोई भी कार्यवाही नहीं की है और ना ही जिला का मुखिया कलेक्टर भी इस ओर ध्यान दे रहे हैं तभी तो अवैध रूप से जितनी क्षमता नहीं है उससे कई ज्यादा अवैध भरमार लाखों टंन क्रशरों में डोलोमाइट डंप पड़ा हुआ है। वहीं लोगों का कहना है कि कोई मंत्री या विधायक का हाथ इन क्रशरों पर है तो आखिर माइनिंग विभाग तो क्या कलेक्टर भी कार्यवाही नहीं कर पाएगी और अगर कार्यवाही नहीं हो पा रही है तो शासन प्रशासन की किरकिरी होती नजर आ रही है। आखिर में कौन सा विधायक और कौन मंत्री का हाथ इन क्रेशर माफियाओं पर है तो खनिज अधिकारी कार्यवाही नहीं कर पा रहे हैं । अब कार्यवाही होगी या नहीं होगी यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। एक तरफ भाजपा की साय सरकार कहती है अगर जिले में कहीं भी अवैध उत्खनन या परिवहन हो तो तुरंत कार्यवाही हो, लेकिन यहां तो इसका उल्टा ही नजर आ रहा है, जितना चाहे अवैध उत्खनन या परिवहन कर लो क्योंकि कटंगपाली में तो कहीं किसी मंत्री या फिर विधायक का हाथ है, लेकिन उनकी ही राज में कहां से क्रेशर मालिकों को इतना संरक्षण मिल जा रहा है कि अवैध रूप से चाहे डोलोमाइट की अवैध परिवहन करें या फिर खनन इनको रोकने वाला कोई नहीं है। क्या भाजपा शासन में ऐसा हो रहा है या फिर कोई मंत्री ही ऐसा करवा रहे हैं, अगर भाजपा शासन काल में ऐसा नहीं हो रहा है तो फिर कार्यवाही भी तो जिला बनने के बाद इन पर कभी नहीं हो पाया है। क्या क्रेशर माफियाओं के हाथ इतने लंबे हैं कि शासन प्रशासन से भी इनकी पहुंच ऊंची है, तभी तो सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले में बैठे खनिज अधिकारी मुख दर्शन बन देख रहे हैं और कार्यवाही एक भी नजर नहीं आ रही है। इससे पहले तो रायगढ़ जिला थी तो रायगढ़ में भीम सिंह कलेक्टर थे तब इन क्रशर मालिकों के ऊपर खनिज विभाग के अधिकारी कहर बनकर बरसते थे। उस समय हर एक क्रेशर में जाकर जांच किया गया था और हर क्रेशर में खामी पाई गई थी और क्रेशर को सील की कार्यवाही की गई थी, लेकिन वह कार्यवाही तो कई वर्षों बीत गए उसके बाद क्या क्रेशर मालिक अवैध खनन करने छोड़ दिए या फिर एक नंबर में अपना क्रेशर चला रहे हैं, इसकी जांच अभी तक सारंगढ़ बिलाईगढ़ के खनिज विभाग के कोई अधिकारी किए हैं क्या, या फिर जांच के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति कर छोड़ दिया गया है। ऐसी कई सवाल लोगों के जुबान पर हैं लेकिन सारंगढ़ माइनिंग विभाग इस ओर ध्यान दें दे तो क्रशर पर कई लाखों रुपए का शासन को फायदा हो सकती है।
कटंगपाली की क्रशरों में लाखों टन डोलोमाइट डंप लेकिन जिला खनिज विभाग बेखबर
लक्ष्मी जी की कृपा से नहीं हो पा रही है कार्यवाही या फिर कहीं खनिज विभाग पर राजनीतिक दबाव तो नहीं, आखिर कब होगी कार्यवाही



