खरसिया

श्रीकृष्ण को प्रसन्न रखना चाहते हैं तो गंगा जमुना को पावन रखिए : आचार्य देशमुख

खरसिया। वृंदावन रसिक आचार्य देशमुख वशिष्ठ के द्वारा कन्या भवन में श्रीमद् भागवत कथा सुनाई जा रही है। यह ज्ञान-यज्ञ हजारीलाल मंगलचंद ताराचंद एचएमटी बिंदल परिवार के द्वारा किया जा रहा है। आचार्य ने व्यास पीठ से पूरे समाज को बताया कि स्वच्छता का कितना महत्व होता है।
आचार्य देशमुख वशिष्ठ ने श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि जब श्रीकृष्ण जमुना के तट पर कालिया नाग को मारने पहुंचे, तब कालिया नाग की पत्नियों ने श्रीकृष्ण का भक्ति-भावपूर्ण अभिनंदन किया। कहा कि प्रभु संत-महात्मा हजारों वर्षों की तपस्या के बाद भी आपका दर्शन नहीं पाते, वहीं आप स्वयं हमें दर्शन देने पहुंचे हैं। श्रीकृष्ण ने उनके भक्ति-पूर्ण अभिनंदन से प्रसन्न होकर कहा कि बताओ तुम्हें क्या चाहिए? तब उन नाग-स्त्रियों ने कहा कि प्रभु आप तो स्वयं हमारे स्वामी के नाश के लिए आए हैं और पत्नियों की इच्छा तो यही रहती है कि हमारा सुहाग अजर-अमर रहे! तब श्रीकृष्ण ने कालिया नाग के प्राणों की रक्षा के लिये उन्हें जमुना छोडक़र अन्यत्र कहीं जाने का आदेश दिया। इस दृष्टांत के माध्यम से आचार्य देशमुख वशिष्ठ ने कहा कि वस्तुत: श्रीकृष्ण यमुना की पवित्रता ही तो चाहते थे। वहीं आज के दौर में गंगा जमुना सरस्वती नर्मदा तथा अन्य पावन नदियों को हम अपवित्र करते हैं, साबुन शैंपू से पावन तीर्थ स्थान में स्नान करते हैं, यह पूर्णत: अनुचित है। यदि श्रीकृष्ण को प्रसन्न करना चाहते हैं तो आपको तीर्थ स्थानों और पावन नदियों की पवित्रता का ध्यान रखना ही होगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button