रायगढ। शिक्षा केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार, आत्मविश्वास और जिम्मेदार नागरिक तैयार करने का सबसे सशक्त माध्यम है। इसी मूल सोच के साथ अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट, बनोरा पिछले चार दशकों से ग्रामीण और वंचित वर्ग के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। अब इसी शिक्षा सेवा को आधुनिक स्वरूप देते हुए संस्था ने एक बड़ा कदम उठाया है।ट्रस्ट द्वारा अंग्रेजी माध्यम, सीबीएसई संबद्ध विद्यालय अघोरेश्वर भगवान राम विद्या मंदिर को नए कलेवर में विकसित किया गया है। यह विद्यालय आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक सुविधाएं और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इसका भव्य उद्घाटन आगामी 18 सितंबर को प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी के हाथों होने जा रहा है।
इस पूरे शैक्षणिक आंदोलन की प्रेरणा हैं परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के 19 सूत्रीय कार्यक्रम। उन्हीं से प्रेरित होकर साल 1996 में मां सर्वेश्वरी उच्च माध्यमिक विद्यालय की स्थापना की गई थी। शिक्षा और संस्कारों के प्रसार के उद्देश्य से शुरू हुआ यह प्रयास आज 915 विद्यार्थियों वाले प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान का रूप ले चुका है। यहां आज भी समाज के सभी वर्गों के बच्चों को न्यूनतम शुल्क और जरूरतमंदों को निशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का प्रयास किया जाता है। पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों में अनुशासन, संस्कार, सेवा भावना और सामाजिक चेतना विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाता है। अब यह संस्थान अघोरेश्वर भगवान राम शिक्षण समिति, बनोरा रायगढ़ के तत्वावधान में संचालित हो रही है। पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी के मार्गदर्शन और दूरदर्शी सोच के साथ इसे बहुआयामी शैक्षणिक और सामाजिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
अघोरेश्वर भगवान राम विद्या मंदिर में एल केजी से लेकर कक्षा बारहवीं तक की पढ़ाई होगी। इसके लिए 41 भव्य क्लास रूम बनाये गये हैं। सभी कक्षायें हाईटेक यानी स्मार्ट होंगी, जिसके लिए सभी कक्षाओं में विशाल टच स्क्रीन वाले एलईडी लगाये गये हैं। पढ़ाई को प्रैक्टिकल से जोडऩे के लिए पूरे स्कूल परिसर में 9 अलग-अलग लैब भी हैं, जहां बच्चे अपने सब्जेक्ट से संबंधित तैयारी के लिए प्रैक्टिकल कर सकेंगे। स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष प्रबंध किये गये हैं। ऊपरी मंजिल से लेकर नीचे तक सुरक्षा कवच लगाया गया है। इसके अलावा स्कूल परिसर में 12 वाश रूम, हाईटेक लाइब्रेरी, मल्टीपरपज रूम, स्टाफ रूम, एडमिन रूम, डायरेक्टर रूम और प्रिंसिपल रूम भी बनाये गये हैं। आने वाले दिनों में यहां स्टाफ के लिए 2 बीएचके के 24 स्टाफ क्वार्टर बनाये जाने की प्लानिंग पर भी काम किया जा रहा है।
हरित वातावरण से घिरे इस विद्यालय के अधोसंरचना विन्यास में पर्यावरण अनुकूल सिद्धांतों को ध्यान में रखा गया है। प्राकृतिक प्रकाश और वायु का पर्याप्त उपयोग, हरित खुले क्षेत्र, वर्षा जल संचयन और विशाल शिक्षण परिसर विद्यार्थियों को स्वस्थ और प्रेरणादायी वातावरण प्रदान करते हैं। विद्यालय भवन की संरचना में आधुनिक शैक्षणिक स्थापत्य और पारंपरिक वास्तु तत्वों का संतुलित समन्वय दिखाई देता है। चौड़े गलियारे, विशाल कक्षाएं और ऊंची छतें पर्याप्त प्रकाश और वायु की व्यवस्था सुनिश्चित करती हैं। भव्य प्रवेश द्वार, ढलानदार छतें और सुव्यवस्थित हरित परिसर विद्यालय को आकर्षक स्वरूप प्रदान करते हैं।
नई पीढ़ी को तैयार करने की दिशा में कदम
शिक्षा के इस लंबे अनुभव के बाद संस्था ने महसूस किया कि बदलते समय और विद्यार्थियों की नई आवश्यकताओं को ध्यान में रखना जरूरी है। आज ग्रामीण प्रतिभाओं को भी महानगरों जैसी सुविधाएं चाहिए। इसी सोच से अंग्रेजी माध्यम और सीबीएसई पाठ्यक्रम पर आधारित नए विद्यालय की स्थापना की गई है। इसका प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा उपलब्ध कराना है, जिससे उन्हें महानगरों अथवा बड़े निजी विद्यालयों की ओर जाने की आवश्यकता कम हो और उन्हें अपने ही क्षेत्र में आधुनिक शैक्षणिक वातावरण मिल सके। विद्यालय में आधुनिक शिक्षण पद्धति के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। यहां शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना होगा। विद्यालय की सबसे बड़ी विशेषता आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का संतुलित समावेश होगी। विद्यार्थियों को सत्य, सेवा, करुणा, अनुशासन और जिम्मेदारी जैसे जीवन मूल्यों से परिचित कराने पर जोर रहेगा। संस्था का मानना है कि आधुनिक शिक्षा तभी सार्थक है, जब वह विद्यार्थियों को ज्ञानवान होने के साथ-साथ संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक भी बनाए।
महानगरीय स्कूलों की तरह सभी सुविधाएं उपलब्ध
नए विद्यालय में विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से जोडऩे के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जायेंगी। इनमें डिजिटल कक्षाएं, विज्ञान प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, चिकित्सा कक्ष, बस परिवहन सुविधा, खेल मैदान और खेल संबंधी सुविधाएं प्रमुख हैं।बालक और बालिकाओं के लिए पृथक शौचालय के साथ दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अनुकूल सुविधाओं का भी प्रावधान किया गया है। सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए आवश्यक व्यवस्था और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएं भी शैक्षणिक व्यवस्था का हिस्सा होंगी।सुरक्षा के लिए परिसर में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, सुव्यवस्थित पैदल मार्ग और सुरक्षित परिसर व्यवस्था जैसे पुख्ता प्रबंध किए जा रहे हैं। विद्यालय में केवल कक्षा शिक्षण पर निर्भर रहने के बजाय खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और अन्य सह-शैक्षणिक गतिविधियों को भी शिक्षा का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि बच्चों में टीम भावना, अनुशासन, रचनात्मकता और आपसी सहयोग की भावना विकसित हो और उन्हें अपनी प्रतिभा पहचानने और निखारने का अवसर मिले। अंग्रेजी माध्यम सीबीएसई विद्यालय के आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ की जा चुकी है। पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी के मार्गदर्शन में अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में बरसों से किए जा रहे प्रयासों का विस्तार अब आधुनिक अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के रूप में सामने आ रहा है। एक ओर जहां पुराना संस्थान ग्रामीण और सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा और संस्कार प्रदान करने की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, वहीं नया अघोरेश्वर भगवान राम विद्या मंदिर आधुनिक शिक्षा की जरूरतों के अनुरूप नई पीढ़ी को तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।



