रायगढ़। शहर में फूल व्यापारियों को व्यवस्थित और निर्धारित स्थान उपलब्ध कराने तथा यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा पुलिस अधीक्षक कार्यालय के समीप फूल बाजार का निर्माण कराया गया था। बाजार के निर्माण के बाद उम्मीद थी कि फूल विक्रेताओं को एक निश्चित स्थान मिल सकेगा और सडक़ किनारे लगने वाली दुकानों से होने वाली अव्यवस्था में कमी आएगी। हालांकि, मौजूदा स्थिति में गांधी प्रतिमा के आसपास सडक़ किनारे फूलों की दुकानें लगने से बाजार के उद्देश्य और उसके उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
फूल बाजार के निर्माण के बावजूद क्षेत्र में कई व्यापारी सडक़ किनारे दुकानें लगाते नजर आते हैं। सुबह के समय इसी इलाके में सब्जी विक्रेताओं की दुकानें भी लगने से सडक़ और आसपास का क्षेत्र अधिक व्यस्त हो जाता है। फूल खरीदने के लिए आने वाले लोगों और सडक़ किनारे कारोबार के कारण आवागमन प्रभावित होने की स्थिति बनती है। ऐसे में नगर निगम द्वारा बनाए गए निर्धारित बाजार के उपयोग और उसके संचालन की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
नगर निगम ने फूल व्यापारियों के लिए अलग बाजार तैयार किया था, लेकिन यदि व्यापारी निर्धारित स्थान के बजाय सडक़ किनारे कारोबार कर रहे हैं तो इसके पीछे उनकी सुविधाओं, बाजार की उपयोगिता या संचालन व्यवस्था से जुड़ी वजहों को स्पष्ट करने की जरूरत है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा का विषय है कि बाजार निर्माण से पहले क्या व्यापारियों की वास्तविक आवश्यकताओं और कारोबार से जुड़ी सुविधाओं को पर्याप्त रूप से ध्यान में रखा गया था।
फूल व्यापारियों के लिए बाजार तैयार होने के बाद निर्धारित स्थान पर कारोबार सुनिश्चित करना भी व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है। यदि व्यापारी वहां कारोबार नहीं कर रहे हैं तो संबंधित विभाग द्वारा उनकी समस्याओं की जानकारी लेना और निर्धारित बाजार के उपयोग में आ रही बाधाओं को दूर करना आवश्यक है। वहीं यदि सडक़ किनारे दुकानें लगाने से यातायात प्रभावित हो रहा है तो नियमों के अनुरूप कार्रवाई और वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता सामने आती है।
त्योहारों के दौरान इस क्षेत्र में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है। धार्मिक और अन्य त्योहारों के समय फूलों की मांग बढऩे के साथ सडक़ किनारे दुकानों और खरीदारी के लिए पहुंचने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ जाती है। इससे सडक़ पर भीड़ बढऩे और यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है। आम नागरिकों को जाम और आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और सार्वजनिक मार्गों को व्यवस्थित रखने के लिए समय-समय पर अतिक्रमण और सडक़ किनारे लगने वाली दुकानों को लेकर कार्रवाई की जाती है। ऐसे में फूल बाजार के लिए निर्धारित स्थान होने के बावजूद यदि उसी क्षेत्र में सडक़ किनारे कारोबार जारी रहता है तो व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल बाजार का निर्माण कर देने से व्यवस्था पूरी नहीं होती। बाजार का नियमित संचालन, व्यापारियों का निर्धारित स्थान पर पुनर्व्यवस्थापन और यातायात व्यवस्था का प्रबंधन भी आवश्यक है। यदि व्यापारियों को निर्धारित बाजार में किसी प्रकार की व्यावहारिक परेशानी है तो उसका समाधान किया जाना चाहिए, ताकि वे सडक़ किनारे दुकान लगाने के बजाय बाजार परिसर में ही अपना कारोबार कर सकें। वहीं, सडक़ किनारे फूलों की दुकानें लगाने से ग्राहकों के वाहन भी आसपास रुकते हैं। त्योहारों के दौरान फूल खरीदने वालों की संख्या बढऩे पर सडक़ पर वाहनों और पैदल लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। इससे यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसी स्थिति में बाजार संचालन और यातायात प्रबंधन के बीच समन्वय जरूरी हो जाता है। फूल बाजार के निर्माण पर नगर निगम द्वारा खर्च की गई राशि का उद्देश्य तभी पूरा माना जाएगा, जब उसका उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हो और फूल व्यापारियों को व्यवस्थित स्थान पर कारोबार करने की सुविधा मिले। यदि बाजार का पर्याप्त उपयोग नहीं हो रहा है और सडक़ किनारे ही दुकानें लग रही हैं, तो बाजार संचालन की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की जरूरत है। अब स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि नगर निगम फूल व्यापारियों से बातचीत कर यह स्पष्ट करे कि वे निर्धारित बाजार में कारोबार क्यों नहीं कर रहे हैं। बाजार परिसर में आवश्यक सुविधाओं की स्थिति, दुकानों के आवंटन और संचालन व्यवस्था की समीक्षा के साथ सडक़ किनारे कारोबार से उत्पन्न यातायात संबंधी समस्या का भी समाधान किया जाए।
फूल बाजार बना शो-पीस, गांधी प्रतिमा के पास फिर सडक़ पर सजी दुकानें, त्योहारों में चरमराता है यातायात



