रायपुर। भाजपा अक्सर अनुमान से परे फैसलों से चौंकाती रही है. संगठन के नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक और राजनीतिक गलियारों से लेकर मीडिया तक के अनुमान कई मौकों पर गलत साबित हुए हैं. चाहे वह पार्टी अध्यक्ष या नई टीम को लेकर हो या फिर सरकार के मुखिया के नाम तक. लेकिन राजनीति में हर अनुमान गलत नहीं होता है. कई बार अफवाह सच भी होते हैं. और ऐसे में प्रदेश में इस समय पर भाजपा संगठन में बदलाव को लेकर जो चर्चा जोरों पर अगर वह सच हो जाए तो चौंकने की जरूरत नहीं है. क्योंकि यह बदलाव वर्तमान के लिए नहीं बल्कि भविष्य के नए समीकरण के लिए अधिक है। ऐसा इसलिए है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरणदेव ङ्क्षसंह सडक़ हादसे में घायल है और उन्हें पूर्ण रूप से स्वस्थ होने में समय लग सकता है। जिससे संगठनात्मक गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए अध्यक्ष की कमी महसूस हो रही है। यही कारण है कि प्रदेश भाजपा को जल्द ही नए अध्यक्ष मिल सकता है।
इस रेस में केंद्रीय मंत्री और बिलासपुर सांसद तोखन साहू का नाम सबसे आगे चल रहा है। बताया जा रहा है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने तोखन साहू को दिल्ली बुलाया है। अगर तोखन साहू को प्रदेश भाजपा का नया अध्यक्ष बनाया जाता है तो उन्हें आने वाले समय में केंद्रीय राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। ऐसे में राष्ट्रीय नेतृत्व छत्तीसगढ़ से केंद्र सरकार में एक मंत्री होने की आवश्यकता महसूस किए जाने पर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल या राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय को केंद्र में मंत्री बनाए जाने की अटकलों से इंकार नहीं जा सकता।
छत्तीसगढ़ में साहू समाज का वर्चस्व होने के कारण तोखन साहू को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की कमान सौंपे जाने की अटकले हैं। यह भी कहा जाता है कि पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण साव के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ मे विधानसभा चुनाव हुआ और छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद भाजपा ने सबसे अधिक सीट जीत कर सरकार बनाई है। अरुण साव को प्रदेश सरकार में डिप्टी सीएम बनाया गया था। इसलिए साहू समाज को राष्ट्रीय नेतृत्व छत्तीसगढ़ के राजनीति में आधार स्तंभ के रूप में मानती है। इसके अलावा प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष के लिए पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा, कुरुद विधायक अजय चंद्राकर के नाम की भी चर्चा है। वहीं बीजेपी ने प्रदेश के विभिन्न मोर्चों के नए प्रभारियों की घोषणा कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव की सहमति के बाद 7 मोर्चों के लिए नए प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। जारी सूची में युवा मोर्चे से लेकर महिला, किसान, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक मोर्चे तक जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
सीएम के साथ लगातार कार्यक्रमों में शामिल हो रहे तोखन
तोखन साहू पिछले करीब एक सप्ताह से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ संगठन और सरकार से जुड़ी महत्वपूर्ण बैठकों में लगातार नजर आ रहे हैं। उनकी बढ़ती सक्रियता को प्रदेश संगठन में नई जिम्मेदारी मिलने की संभावनाओं से जोडक़र देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर इसे लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
ओबीसी समीकरण भी अहम
तोखन साहू वर्तमान में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री हैं और बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके नाम पर चर्चा के पीछे ओबीसी समीकरण को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साहू समाज का प्रदेश की राजनीति में प्रभाव है। ऐसे में भाजपा संगठन की जिम्मेदारी उन्हें देकर सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश कर सकती है। भाजपा बस्तर और सरगुजा में मजबूत मानी जाती है, जबकि बिलासपुर संभाग में संगठन को और मजबूत करने की गुंजाइश है। तोखन साहू के अध्यक्ष बनने से पार्टी को इस क्षेत्र में अपना जनाधार बढ़ाने का लाभ मिल सकता है। फिलहाल, पांचों नामों को लेकर चर्चाएं हैं, लेकिन अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व के हाथ में है। पार्टी की ओर से औपचारिक घोषणा होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।
वैभव बैस को युवा मोर्चे की जिम्मेदारी
छत्तीसगढ़ भाजपा की ओर से जारी सूची के मुताबिक युवा मोर्चे की जिम्मेदारी वैभव बैस को सौंपी गई है। वहीं महिला मोर्चे का प्रभारी सुभाष तिवारी को बनाया गया है। किसान मोर्चे की जिम्मेदारी पूनम चंद्राकर को दी गई है। इसके अलावा पिछड़ा वर्ग मोर्चे का प्रभारी लखनलाल साहू, अनुसूचित जनजाति मोर्चे का प्रभारी शिरिष अग्रवाल और अनुसूचित जाति मोर्चे की जिम्मेदारी डॉ. गुलाब टिकरिहा को सौंपी गई है। वहीं अल्पसंख्यक मोर्चे का प्रभारी मनोज जैन को नियुक्त किया गया है।



