खरसिया। त्यौहारी सीजन शुरू होते ही खरसिया के खाद्य बाजार में मिलावट और लापरवाही का खेल जोरों पर है। शहर के होटल और मिष्ठान भंडारों में खाद्य सुरक्षा मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वहीं, रोकथाम के लिए जिम्मेदार खाद्य एवं औषधि प्रशासन (फूड एंड सेफ्टी विभाग) की भूमिका केवल त्यौहारी खानापूर्ति और औपचारिकता तक सिमट कर रह गई है।
सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार खाद्य पदार्थों को अखबार (न्यूजपेपर) में लपेटकर देने या सिंगल-यूज प्लास्टिक पन्नी में पैक करने पर पूर्ण प्रतिबंध है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अखबार में इस्तेमाल होने वाली स्याही और केमिकल्स खाद्य पदार्थों में मिलकर कैंसर जैसी अनेकों जानलेवा बीमारियों का कारण बनते हैं। इसके बावजूद खरसिया के लगभग सभी होटलों में समोसा, बड़ा, भजिया और मिठाइयां बेझिझक अखबारों और प्लास्टिक पन्नियों में लपेटकर दी जा रही हैं।
विभाग द्वारा सालभर में महज 1-2 बार किसी दुकान से सैंपल एकत्र किए जाते हैं। प्रयोगशाला भेजी गई इन सैंपलों की रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं, जबकि तब तक संदिग्ध और मिलावटी मिठाइयां बाजार में बिक चुकी होती हैं। दो दिन पूर्व भी विभाग ने 1-2 प्रतिष्ठानों में दबिश देकर सैंपल लिए। एक दुकान में एक्सपायरी डेट का सामान मिलने के बावजूद उस पर क्या वैधानिक कार्रवाई की गई, इसका कोई विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया।
शहर के होटलों में जहां नाश्ता और मिठाइयां तैयार की जाती हैं, वहां गंदगी का आलम है ?हाइजीन का अभाव कारीगर और वेटर न तो ग्लव्स (दस्ताने) पहनते हैं और न ही सिर को ढंकते हैं।
एफएसएसएआई के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी परिसर की सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जनता के स्वास्थ्य से हो रहे इस सीधे खिलवाड़ पर खाद्य सुरक्षा विभाग की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि केवल त्यौहारों पर रस्म अदायगी करने के बजाय नियमित निरीक्षण कर दोषियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। बताया जाता है कि अखबारों में भोजन सामग्री, रोटी, चावल, नाश्ता, मिठाई इत्यादि ना लें और गर्म चाय प्लास्टिक की पन्नी में ना लें यह आपकी सेहत के लिए खतरनाक है, बताते चलें कि अखबारों में गर्म नाश्ता, मिठाई या भोजन रखने से छपाई की जहरीली स्याही भोजन में घुल जाती है, जो शरीर में धीरे-धीरे जहर फैलाकर पाचन तंत्र, किडनी, लीवर को नुकसान पहुंचाती है और कैंसर का खतरा बढ़ाती है। इस विषय पर सख्त निर्देश जारी करने वाले एफएसएसएआई के अनुसार यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
हैलेड (सीसा) और भारी धातुएं क्रोमियम, कैडमियम और लेड जैसे तत्व स्याही में होते हैं जो शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं। थैलेट्स रीसाइक्ल्ड पेपर और रंगों से मिलने वाले ये रसायन गर्म व तैलीय संपर्क से खाने में उतर जाते हैं। सिंथेटिक डाई और मिनरल ऑयल हानिकारक पिगमेंट, बाइंडर्स और विलायक भोजन को जहरीला बनाते हैं।
अंगों की क्षति लंबे समय तक सेवन से किडनी और लीवर खराब होने का खतरा। स्याही के रसायन कार्सिनोजेनिक (कैंसर पैदा करने वाले) होते हैं। अन्य संक्रमण अखबार कई हाथों से गुजरता है, जिससे उस पर मौजूद धूल और बैक्टीरिया खाने में पहुंच जाते हैं।
नियमों को ठेंगा दिखा रहे होटल संचालक, खानापूर्ति तक सीमित फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई
अखबारों और प्लास्टिक में बांधकर दिया जा रहा नाश्ता मिठाई, कैंसर का खतरा



