रायगढ़। ना केवल इस अंचल बल्कि देशभर में अपनी रचनाओं खासकर गीतों के जरिये मशहूर जनकवि आनंदी सहाय शुक्ल की 11 वीं पुण्यतिथि पर एक गरिमामय साहित्यिक आयोजन रविवार की शाम होटल जानकी वाटिका के सभागार में संपन्न हुआ, जनकवि आनंदी सहाय शुक्ल स्मृति मंच के बैनर तले संयोजक राजेश शुक्ला (जनकवि के पुत्र) ने साहित्य, पत्रकारिता, काव्य लेखन, सामाजिक सरोकारों के लिये सक्रिय लोगों को इस औपचारिक कार्यक्रम में आमंत्रित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ संपादक सुभाष त्रिपाठी ने की और वरिष्ठ साहित्यकार हेमचंद पाण्डेय, रविन्द्र चौबे, गीतकार रामगोपाल शुक्ल, चिंतक भारत त्रिपाठी, कला साधक जगदीश मेहर, समाजसेवी पुरुषोत्तम अग्रवाल, वरिष्ठ चिकित्सक रचनाकार द्वय डॉ. मनमोहन श्रीवास्तव और डॉ. शरद अवस्थी बतौर विशिष्ठ अतिथि मंच पर मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत जनकवि आनंदी सहाय शुक्ल के चित्र के सामने धूप-दीप और पुष्पांजलि के साथ हुई, मंच और सभागार में मौजूद सभी आमंत्रित अतिथियों का औपचारिक स्वागत जनकवि आनंदी सहाय शुक्ल स्मृति मंच के संयोजक राजेश शुक्ला ने किया। अगले चरण में वरिष्ठ रंगकर्मी साहित्यकार रविन्द्र चौबे ने आनंदी सहाय के व्यक्तित्व और कृतित्व पर डॉ बलदेव साव की लिखी संपादकीय का पाठ किया साथ ही अपने संस्मरण भी साझा किये। वक्ताओं के अगले क्रम में सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी और कबड्डी के इंटरनेशनल अंपायर राजेश पटनायक ने बप्पा जी से उनके सान्निध्य से जुड़ी यादों को सामने रखा। सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी और ट्रेड यूनियन नेता रहे सिद्धार्थ सिंह ने अपनी बात बड़े रोचक अंदाज में रखते हुए बताया कि ष्उनके पिता ओपी सिंह सर बप्पा जी को बड़े भाई का दर्जा देते हुए हमेशा पैर छूते थे जबकि मैं बप्पा जी का सबसे कम उम्र का ऐसा दोस्त बन गया था जो उनसे हर तरह की बातें करता था, बप्पा जी के सान्निध्य से जुड़ी यादें ना केवल मेरे लिये बल्कि उनको जानने समझने वाले के लिये अनमोल धरोहर हैं।ष्
जनकवि आनंदी सहाय शुक्ल के साथ बिताये पलों को साझा करने के क्रम में मंचासीन कलासाधक, चक्रधर समारोह के संस्थापक सदस्य जगदीश मेहर ने ख़ुद के द्वारा संगीतबद्ध मशहूर शायर की वो रचना सुनाई जो बप्पा जी को बेहद पसंद थी। जनकवि आनंदी सहाय शुक्ल के बाद छंदात्मक गीतों की परंपरा को आगे बढ़ा रहे गीतकार रामगोपाल शुक्ल ने बप्पा जी के साथ के अपने स्मरणों को साझा करते हुए ष्आत्महंता वैज्ञानिकष् जैसी बेहद संवेदनशील कविता का पाठ किया, इस लंबी कविता को जनकवि आनंदी सहाय शुक्ल ने तब रचा था, जब देश के किसी हिस्से में एक वैज्ञानिक ने आत्महत्या कर ली थी।
डॉ. शरद अवस्थी और डॉ. मनमोहन श्रीवास्तव ने जनकवि आनंदी सहाय से मिले अभिभावक तुल्य स्नेह और अपनेपन को याद करते हुए सदन के पटल पर यह इच्छा भी जाहिर की कि जनकवि आनंदी सहाय शुक्ल के नाम पर इस शहर और प्रदेश में कुछ बड़ा किये जाने की जरूरत है, जिसकी निरंतरता बनी रहे। साहित्यकार चिंतक भारत त्रिपाठी ने अपनी स्मृतियों के झरोखों से संस्मरणों साझा तो किये ही, साथ ही साथ उनके साथ वैचारिक सहमतियों असहमतियों पर भी गंभीर बात रखी। वरिष्ठ साहित्यकार हेमचंद पाण्डेय ने अपनी बात कहते हुए गोष्ठी के अंतिम दौर में चिंतन की धारा ही मोड़ दी, उन्होंने कहा कि जनकवि आनंदी सहाय शुक्ल के व्यक्तित्व पर जितनी ज्यादा बात अब तक हुई है उतनी ही कम बात उनके रचनाकर्म और साहित्य दर्शन को लेकर हुई है इसलिए अब जरूरी हो गया है कि उनके रचनाकर्म विचारप्रक्रिया को समझनेपर काम होना चाहिये।
जनकवि आनंदी सहाय शुक्ल के प्रति सभी विद्वान वक्ताओं की भावनाओं को समाहित करते हुए अध्यक्षीय आसंदी से वरिष्ठ संपादक सुभाष त्रिपाठी ने इस बात पर जोर दिया कि शुक्ल जी के व्यक्तित्व और कृतित्व की व्यापकता को महज कुछेक घंटों के आयोजन में समझना और समेटना संभव नहीं है, इसलिये ऐसे आयोजनों की निरंतरता बनी रहनी चाहिये, उन्होंने जनकवि आनंदी सहाय शुक्ल के पुत्र राजेश शुक्ला (गुल्ली) द्वारा जनकवि आनंदी सहाय शुक्ल स्मृति मंच के पहले गरिमामय आयोजन की परिकल्पना को सराहा।
कार्यक्रम के अंत में आयोजक परिवार की तरफ से पुत्रवधू रुचि राजेश शुक्ला ने सभी अतिथियों का आभार प्रदर्शन करते हुए कहा कि आज के इस गरिमामय कार्यक्रम में आप सभी ने तात्कालिक सूचना पाकर समय निकाला, हम आभारी हैं। बायोलॉजिकल तौर पर तो हम बप्पा जी के परिवार हैं लेकिन हम ख़ुद को बप्पा जी के उस विशाल परिवार का हिस्सा मानते हैं जिसे उन्होंने अपनी काव्य साधना से, साहित्य साधना से पूरे देश में रचा है।बप्पा जी पर हमसे ज्यादा अधिकार आप सबों का है, ये इस कार्यक्रम से परिलक्षित होता है। आज के कार्यक्रम में बप्पा जी की पुण्यतिथी पर जो भी चिंतन हुआ है उसे महसूस करते हुए विश्वास दिलाते हैं, भविष्य में ऐसे कार्यक्रम का आयोजन हम अनिवार्य तौर पर करते रहेंगे,बस आप सब अपना साथ, अपना आशीर्वाद बनाये रखियेगा। इस कार्यक्रम के दौरान साहित्य संस्कृति राजनीति समाजसेवा से जुड़े लोगों की व्यक्तिगत और संस्थागत भागीदारी रही, जिसमें रचनाकार नंदलाल त्रिपाठी, हर्ष सिंह, वरिष्ठ पत्रकार हरेराम तिवारी, दिनेश मिश्रा, चित्रकार मनोज श्रीवास्तव, सुशील पटेल, रंगकर्म श्याम देवकर, भाजपा नेता सुभाष पांडेय, कांग्रेस नेता जयंत ठेठवार, भारतीय जनता पार्टी सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक अनुपम पाल, जिला संयोजक विजय दास, खिलाड़ी रचनाकार अकरम ख़ान, समाजसेवी डॉ. दयानंद अवस्थी, रचनाकार आशा मेहर की मौजूदगी रही। सुरेश महाराज, मंजुल दीक्षित, जेठुराम मनहर , गुरविंदर घई, जेपी पांडेय , अजय लाल , अनिल आहूजा, शेख ताजीम, नरसिंह अग्रवाल, राजू जायसवाल, अनिल शुक्ला, भोजराम चौहान, आशीष बानी , गोपाल सारथी मौजूद रहे।
दिल पाया आशिक का बंदे, मिला मिजाज फकीर का साहित्य और संस्मरणों में याद किये गये जनकवि आनंदी सहाय शुक्ल
साहित्यकारों, कलाकर्मियों, पत्रकारों और चिंतकों की मौजूदगी में मनाई गई पुण्यतिथि



