रायपुर। राजधानी के श्री दूधाधारी मठ और जैतू साव मठ में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। महामंडलेश्वर महंत रामसुंदर दास ने मठ के पुजारियों के साथ ब्रह्मलीन स्वामी बलभद्र दास की समाधि और अपने गुरु महंत वैष्णव दास की पूजा की। इसके बाद वे श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देने के लिए आसन पर बैठे।
पूजा के बाद रायपुर और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मठ पहुंचे। सभी ने पूजा कर महंत रामसुंदर दास का आशीर्वाद लिया। इस दौरान कई लोगों ने गुरु दीक्षा भी ली। मुख्य कार्यक्रम दोपहर तक चला, लेकिन श्रद्धालुओं के आने-जाने का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। महंत रामसुंदर दास ने कहा कि श्री दूधाधारी मठ की स्थापना स्वामी बलभद्र दास ने की थी। उन्होंने जीवनभर केवल दूध का सेवन किया, इसलिए लोग उन्हें दूधाधारी महाराज के नाम से जानते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा के दिन शिष्य परिवार के लोग हर साल मठ पहुंचते हैं और गुरु का आशीर्वाद लेकर अपने जीवन में आगे बढऩे की प्रेरणा लेते हैं। उन्होंने सभी के सुख, शांति और अच्छे जीवन की कामना की। मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का बहुत बड़ा महत्व है। उन्होंने बताया कि धर्मग्रंथों में भी गुरु को जीवन का मार्गदर्शक माना गया है। गुरु पूर्णिमा का आयोजन जैतू साव मठ में भी हुआ, जहां पूर्वाचार्यों को याद किया गया। इस अवसर पर शहर के कई सामाजिक, धार्मिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
महामाईपारा स्थित दूधाधारी मठ का इतिहास लगभग 500 साल पुराना है। यह मठ शहर के ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है। 1554 में राजा रघुराव भोसले ने महंत बलभद्र दासजी के लिए मठ का निर्माण कराया था। यहां कई देवी-देवताओं की मूर्ति और मंदिर हैं। यहां बालाजी मंदिर, वीर हनुमान मंदिर और राम पंचायतन मंदिर प्रमुख हैं। इन मंदिरों में मराठाकालीन पेंटिंग आज भी देखी जा सकती है। दूधाधारी मठ के महंत रामसुंदर दास ने बताया कि मठ के संस्थापक महंत बलभद्र दास बहुत बड़े हनुमान भक्त थे। श्रद्धाभाव से उनकी पूजा-अर्चना करते थे। वह अपनी गाय सुरही के दूध से हनुमानजी की प्रतिमा को नहलाते थे, फिर उसी दूध का सेवन करते थे। कुछ समय बाद उन्होंने अन्न का त्याग कर दिया और सिर्फ दूध को ही आहार के रूप में लेने लगे। इसी वजह से मठ का नाम दूधाधारी मठ रख दिया गया।
दूधाधारी मठ में मनाया गया गुरु पूर्णिमा, महंत से आशीर्वाद लेने पहुंचे श्रद्धाल



