धरमजयगढ़। भारतमाला परियोजना के तहत रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत आने वाले सिसरिंगा घाट में सडक़ निर्माण की आड़ में एक बड़ा घोटाला और मनमानी का मामला सामने आया है। जिसमें राइट ऑफ वे के कई मीटर बाहर स्थित मंदिर की संपत्तियों और बहुमूल्य वन संपदाओं को ब्लास्टिंग से नुकसान का बहाना बनाकर पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। मीडिया में खबरें आने के बाद वन विभाग द्वारा गठित जांच टीम की पड़ताल में सिलसिलेवार और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस मामले में मीडिया के एक्सक्लूसिव खुलासे के बाद धरमजयगढ़ डी एफ ओ ने तत्काल संज्ञान लिया और जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले की जांच के लिए टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान जांच टीम के समक्ष दर्ज हुए प्रभावित पक्षों के बयानों से इस बात की पुष्टि हो गई है कि निर्माण एजेंसी द्वारा तय सीमा का खुला उल्लंघन किया गया है। अधिकारियों को गुमराह कर और ब्लास्टिंग का हवाला देकर निर्धारित राइट ऑफ वे के बाहर अनधिकृत रूप से हस्तक्षेप किया गया। इसके तहत न सिर्फ सैकड़ों कीमती पेड़ों को जड़ से हटा दिया गया, बल्कि वहां स्थित मंदिर की संपत्तियों को भी समूल नष्ट कर दिया गया। इतना ही नहीं, मंदिर के पुजारी नरसिंह को मिले वन अधिकार पट्टा की भूमि पर स्थित मकान को बुलडोजर से ‘बलपूर्वक’ तोड़ दिया गया। -ऋषभ तिवारी
अवैध तरीके से ध्वस्त संपत्तियों को दोबारा बनाने की मांग
इस पूरी सुनियोजित मनमानी के खिलाफ अब ग्राम पंचायत सिसरिंगा के सरपंच सहित अन्य लोग लामबंद हो गए हैं। ग्राम पंचायत के सरपंच सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने जांच टीम के समक्ष अपना आधिकारिक बयान दर्ज कराया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि सडक़ निर्माण की आड़ में अवैध रूप से उजाड़े सार्वजनिक शौचालय, प्रतीक्षालय और कुआं का तत्काल पुनर्निर्माण कराया जाए।
जांच-रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
इस सडक़ निर्माण की आड़ में खुलकर किए गए इस मनमानी के उजागर होने के बाद विभागीय स्तर पर हडक़ंप मचा हुआ है। जानकारी के अनुसार वन विभाग की टीम इस मामले के हर पहलू की बारिकी से जांच कर रही है। अब क्षेत्र के लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पर्यावरण, धार्मिक आस्था और वन अधिकार अधिनियम से खिलवाड़ करने वाली रसूखदार कंपनी दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड और इसके दोषी अधिकारियों पर कब और किस तरह की प्रशासनिक कार्रवाई होती है।
बलपूर्वक तोड़ दिया गया मकान-नरसिंह
पुष्ट जानकारी के मुताबिक, सिसरिंगा घाट में स्थित बंजारी मंदिर के पुजारी नरसिंह ने जांच अधिकारियों को बताया है कि भारतमाला सडक़ निर्माण कार्य में लगे कर्मचारियों द्वारा बलपूर्वक उनके वन अधिकार पट्टा की भूमि पर स्थित मकान (होटल) को जेसीबी मशीन से ढहा दिया। नरसिंह ने आधिकारिक रूप से बताया है कि इस जमीन के एवज में उन्हें कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। जांच अधिकारियों ने प्रभावित किसान नरसिंह के वन पट्टा भूमि और उस पर हुए नुकसान के संबंध में विस्तृत जानकारी और आवश्यक दस्तावेज एकत्र किए हैं।
टॉवर शिफ्टिंग के खर्च से बचने के लिए बिगाड़ा एलाइनमेंट!
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरी मनमानी के पीछे उरगा से पत्थलगांव तक भारतमाला सडक़ निर्माण एजेंसी मेसर्स दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड की एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जिस जगह पर आर ओ डब्ल्यू के बाहर सडक़ निर्माण से जुड़ी अनियमित गतिविधियों को अंजाम दिया गया है उसी स्थान पर सडक़ के दूसरी तरफ राइट ऑफ वे के किनारे एक हाई-टेंशन विद्युत टॉवर स्थित है। आरोप है कि इस टॉवर को शिफ्ट करने में आने वाले भारी-भरकम खर्च और समय से बचने के लिए कंपनी ने जानबूझकर सडक़ का एलाइनमेंट बदलते हुए दूसरी तरफ आर.ओ. डब्ल्यू. के बाहर कई मीटर दूर तक अनधिकृत हस्तक्षेप किया। जानकारी के मुताबिक़ टॉवर को बचाने के फेर में कंपनी ने वन संपदा, मंदिर और वन अधिकार पट्टा की भूमि को बलि का बकरा बना दिया।



