जल संकट और सिंचाई की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों की अनूठी पहल, सामाजिक कार्यकर्ता अर्जुन भगत के मार्गदर्शन तथा सरपंच-उपसरपंच के सहयोग से सैकड़ों ग्रामीण हुए एकजुट, ट्रैक्टरों से मुरुम डालकर बहाल किया नहर का प्रवाह
नारायणपुर। लगातार कम बारिश और खेतों तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंचने से चिंतित किसानों ने इस बार प्रशासन का इंतजार करने के बजाय स्वयं मोर्चा संभाल लिया। जल संकट और सिंचाई की गंभीर समस्या से जूझ रहे ग्राम बथनीडाँड़ के किसानों एवं ग्रामीणों ने रविवार को वर्षों से जर्जर और क्षतिग्रस्त तुम्बाजोर नहर की मरम्मत एवं सफाई कर ग्रामीण एकता, आत्मनिर्भरता और जनसहभागिता का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। गांव के लोगों ने फावड़े, तसले और अन्य उपकरण लेकर श्रमदान किया तथा नहर में जमा मिट्टी, गाद और झाडिय़ों को हटाकर पानी का रास्ता साफ किया। वहीं जिन किसानों के पास ट्रैक्टर उपलब्ध थे, उन्होंने ट्रैक्टरों से मुरुम लाकर टूटे हुए हिस्सों की मरम्मत में सहयोग दिया। पूरे दिन चले इस सामूहिक श्रमदान में गांव के बड़ी संख्या में किसान, युवा और ग्रामीण उत्साह के साथ शामिल हुए।
ग्रामीणों ने बताया कि कई वर्षों से तुम्बाजोर नहर जगह-जगह से टूट-फूटकर क्षतिग्रस्त हो गई थी। नहर में भारी मात्रा में मिट्टी और झाडिय़ां उग आने के कारण पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा था। इसका सबसे अधिक नुकसान उन किसानों को हो रहा था जिनके खेत नहर के टेल क्षेत्र में स्थित हैं। पानी नहीं मिलने से धान की रोपाई प्रभावित हो रही थी और किसानों के सामने फसल बचाने का संकट खड़ा हो गया था। क्षेत्र में पिछले कई दिनों से अपेक्षाकृत कम बारिश होने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई थी। धान की खेती के लिए इस समय खेतों में पर्याप्त पानी होना बेहद आवश्यक है, लेकिन सिंचाई व्यवस्था बाधित होने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही थी। ऐसे में ग्रामीणों ने सामूहिक निर्णय लेकर नहर की सफाई और मरम्मत का कार्य स्वयं करने का संकल्प लिया। इस अभियान का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता अर्जुन भगत के मार्गदर्शन में किया गया। सरपंच एवं उपसरपंच ने भी इस जनहितकारी कार्य में सक्रिय सहयोग दिया और ग्रामीणों को एकजुट कर श्रमदान के लिए प्रेरित किया। गांव के किसानों ने अपने ट्रैक्टर उपलब्ध कराकर नहर के टूटे हिस्सों में मुरुम डालने का कार्य किया, जिससे पानी का प्रवाह पुन: सुचारु करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर नहर की सफाई और मरम्मत नहीं की जाती तो इस वर्ष धान की खेती पर गंभीर संकट आ सकता था। अब नहर के सुधरने से खेतों तक पानी पहुंचने की उम्मीद बढ़ गई है, जिससे किसानों को राहत मिलने की संभावना है। बथनीडाँड़ के ग्रामीणों की इस सामूहिक पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। लोगों ने सामाजिक कार्यकर्ता अर्जुन भगत सहित सभी ग्रामवासियों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यदि गांव इसी प्रकार एकजुट होकर अपने संसाधनों और समस्याओं के समाधान के लिए आगे आएं, तो अनेक विकास कार्य बिना किसी विवाद के सफलतापूर्वक पूरे किए जा सकते हैं। ग्रामीणों की यह पहल केवल नहर की मरम्मत तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह संदेश भी दिया कि सामूहिक श्रम, आपसी सहयोग और जनभागीदारी से बड़ी से बड़ी चुनौती का समाधान संभव है। बथनीडाँड़ ने यह साबित कर दिया कि जब पूरा गांव एक लक्ष्य के लिए एकजुट होता है तो विकास की राह स्वयं बन जाती है।



