NavinKadamNavinKadamNavinKadam
  • HOME
  • छत्तीसगढ़
    • रायगढ़
      • खरसिया
      • पुसौर
      • धरमजयगढ़
    • सारंगढ़
      • बरमकेला
      • बिलाईगढ़
      • भटगांव
    • शक्ति
    • जांजगीर चांपा
    • बिलासपुर
  • क्राइम
  • आम मुद्दे
  • टेक्नोलॉजी
  • देश-विदेश
  • राजनीति
  • व्यवसाय
  • Uncategorized
Reading: कैनेडा की कहानी ‘डियर जैनी…’ की समीक्षा
Share
Font ResizerAa
NavinKadamNavinKadam
Font ResizerAa
  • HOME
  • छत्तीसगढ़
  • क्राइम
  • आम मुद्दे
  • टेक्नोलॉजी
  • देश-विदेश
  • राजनीति
  • व्यवसाय
  • Uncategorized
  • HOME
  • छत्तीसगढ़
    • रायगढ़
    • सारंगढ़
    • शक्ति
    • जांजगीर चांपा
    • बिलासपुर
  • क्राइम
  • आम मुद्दे
  • टेक्नोलॉजी
  • देश-विदेश
  • राजनीति
  • व्यवसाय
  • Uncategorized
Follow US
  • Advertise
© 2022 Navin Kadam News Network. . All Rights Reserved.
NavinKadam > रायगढ़ > कैनेडा की कहानी ‘डियर जैनी…’ की समीक्षा
रायगढ़

कैनेडा की कहानी ‘डियर जैनी…’ की समीक्षा

lochan Gupta
Last updated: June 6, 2026 8:45 pm
By lochan Gupta June 6, 2026
Share
18 Min Read

चर्चित प्रवासी साहित्यकार
शैलजा सक्सेना

अमानवीकरण को उकेरती कहानी
————
समीक्षक – डॉ. मीनकेतन प्रधान
————–

कैनेडा की चर्चित प्रवासी कहानीकार डॉ. शैलजा सक्सेना की कहानी ‘डियर जैनीज्’ अमानवीकरण के भीषण त्रास और कारुणिक संवेदनाओं की की कहानी है ।इसमें एक पिता के रूप में डेविड नामक पात्र की मार्मिक अन्तर्व्यथा – कथा है। उसकी सौतेली पुत्री ‘जैनी’ द्वारा स्वैच्छाचारिता , ब्रिल और आजादी के मंसूबों से उस पर पेडोफाइल(बाल शोषक) अर्थात् दुराचारी होने का मिथ्या आरोप लगाया जाता है जिसके परिणामस्वरूप उसे 12 वर्ष की सजा हो जाती है । डेविड , जेल में रहते अपने बेगुनाह होने की बात को अत्यंत भावुक स्वर में अपनी सौतेली पुत्री के विचारों में परिवर्तन लाने के उद्देश्य से मर्माहत हो कर 8 बार पत्र में लिखता है , जिसमें तिथियों का भी अंकन है । सभी पत्रों में वह जैनी की सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना करता है। वह अपनी 15 वर्षीया सौतेली पुत्री जैनी को अपनी 10 वर्षीया पुत्री नैंसी की तरह मानता है। वह दोनों में कोई भेद नहीं करता । उसमें एक अनुशासन प्रिय और संतान के प्रति आदर्श पिता होने के सारे गुण विद्यमान हैं ।
जेल में सजा भोगते डेविड केवल इतना जानना चाहता है कि उसकी सौतेली पुत्री जैनी आखिर उससे घृणा क्यों करती है? जबकि उसकी मां ‘सारा’ से विवाह के पूर्व छह माह तक बातचीत करते बच्चों से सहमति ली गई थी । जैनी ने भी सहमति दी थी । वह जेल से लिखे अपने पहले पत्र में कहता है -” मुझे जैसे अपनी बेटी की स्वीकृति के बिना दूसरा विवाह करना मंज़ूर नहीं था , तुम्हारी माँ को भी नहीं था।” डेविड को अपनी मातृहीन पुत्री “नैंसी” की बहुत चिंता है ।जिसकी उम्र कम होने के कारण सरकारी फ़ास्ट होम में रखा गया है ।डेविड सोचता है जब वह बड़ी होगी तो अपने पिता के कलंकित होने का उसे गहरा दु:ख होगा।उसका जीवन असुरक्षा हो जायेगा ।डेविड को इसकी गहरी चिंता है।
डेविड की पत्नी ‘ सारा’ पूरे घटना चक्र में अपनी पुत्री जैनी की बातों पर ही भरोसा करती है इसलिए उसे अपने पति की कोई चिंता नहीं है और न ही उसकी सौतेली पुत्री 10 वर्षीया नैंसी की ,जो ‘फ़ास्टर’ माता -पिता के संरक्षण में है। डेविड सोचता है – ” वह पिता के दुराचारी होने के कलंक को ले कर अपना शेष जीवन कैसे बिताएगाी ? हाय मेरी नैंसी!!! उस बच्ची का मेरे बिना कोई नहीं और मैं भी इस आरोप में जेल में पड़ा हूँ । 18 के बाद तो उसे ‘फास्टर होम’ भी नहीं मिलेगा, वह सडक़ों पर होगी । ओह! वह कैसे जियेगी।” यह कारुणिक स्थिति पाठक को द्रवीभूत कर देती है ।
25 अक्टूवर 2020 से 19 सितंबर 2023 के मध्य तिथि अंकन सहित 8 बार जैनी के जन्मदिन, क्रिसमस , नये वर्ष के अवसर पर डेविड द्वारा लिखे गये इन पत्रों के विवरण के बाद पता चलता है कि कहानी का कथा तत्व एक अलमारी की दराज़ में प्राप्त पत्रों पर आधारित है ।लेखिका शैलजा सक्सेना की लेखकीय उपस्थिति इस कहानी के अतिंम हिस्से में अल्पकालिक है किन्तु इसी से कहानी के उद्देश्य और उसकी कालजयिता सिद्ध होती है ।
पत्र जिस घर में मिलते हैं उसे डेविड की पत्नी ‘सारा’ ने लेखिका के पास बेच दिया है । वे यह शहर छोडक़र एटलांटा रहने जा रहे हैं ( हमेशा के लिए) । इस घर की चाभी मिलने के बाद अपने दोनों बच्चों के साथ लेखिका नये शहर के अपने पहले घरौंदे में जाती हैं । जहाँ बच्चों की खुशी और खेल से घर खिलखिला रहा था।लेकिन वहीं इसी घर में वे पत्र मिले जहां एक परिवार की सिसकियाँ दूर तक सुनाई पड़ रही थीं ।
अपने पहले घर में सामान जमाने के बीच एक अलमारी की दराज में वे पत्र जब मिलते हैं तो पढक़र लेखिका हकबका (हक्का बक्का) जाती है। वे लिखती हैं –” मैं इन पत्रों को हाथ में लिए बैठी थी। मन अजीब सा होने लगा.. हर चि_ी फाँस सी गड़ी… ऐसी भी कोई लडक़ी होती है? डेविड नाम के अदेखे व्यक्ति की सुबकियाँ मुझे इस घर के हर कोने में सुनाई देने लगी।” वह सोचती हैं -पत्र खुले थे जिन्हें उनके द्वारा( सारा ) पढ़ा गया होगा। जैनी को उसने पढऩे के लिए दिया होगा या नहीं, नहीं कहा जा सकता और यदि वह पढ़ी भी होगी तो उस पर इसका क्या प्रभाव पड़ा होगा , यह अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता। हो सकता है उसने इन पत्रों को कोई तवज्जो न दिया हो या डेविड के विश्वास के अनुकूल उसमें ‘ सद्बुद्धि’ न आयी हो । इतना अवश्य कि जैनी को कोई पछतावा नहीं हुआ। डेविड के जेल जाने के दो वर्ष बाद अब वह सत्रह साल की होने जा रही है। उसे पता है कि डेविड बेगुनाह है फिर भी स्वतंत्र रूप से मौज मस्ती करने , अपने से बड़े लडक़ों के साथ पार्टी करने, आदि में वह डेविड को रोड़ा मानती रही है ।इसी कारण उसे जज के सामने अपने दोस्तों की मदद से दुराचारी साबित करने में कोई हिचक नहीं हुई थी। जैनी के किशोर मन में रंगीन सपने आने लगे किन्तु डेविड की उम्मीद के मुताबिक़ उसकी सोच में कोई बदलाव नहीं आया । कथानक के अंतिम हिस्से से यह ज्ञात होता है। अन्यथा घर बेचकर दूसरी जगह जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।यह भी कि इस घर और शहर में उनका रहना दुश्वार हो गया होगा। इससे यह भी संकेत मिलता है कि डेविड की 12 वर्षों की सज़ा में अभी केवल दो वर्ष ही हुए हैं और जेल में वह बीमार रहने लगा है। सज़ा की अवधि के पहले या बाद में जिसकी घर वापसी की कोई निश्चितता नहीं। उसने अपने छठे पत्र दिनांक 24 दिसंबर 2022 को लिख चुका है -“जैनी, जऱा अपने झूठ के परिणाम पर गहराई से सोचो और जल्दी सोचो। मैं बहुत भावुक इंसान हूँ, कहीं ऐसा न हो जब तक तुम्हें अपनी गलती स्वीकार करने की बुद्धि आये, तब तक इस दुख में मैं मर ही चुका हूँ।ईश्वर तुम्हें शीघ्र ही सदबुद्धि दें। डेविड।” यह भी कि घर अब डेविड के स्वामित्व में है न हो। तभी तो सारा उसे बेच डालती है अथवा यह भी हो सकता है , चूँकि डेविड उससे बहुत प्रेम करता है, ऐसी स्थिति में विवाह के साथ सारा ने शर्तिया तौर पर इस अचल सम्पत्ति को वैधानिक रूप से अपने नाम करवा ली होगी, ऐसा हो सकता है , यद्यपि कहानी में यह वर्णित नहीं है । यह लेखिका की शैली का कमाल है कि कहानी अपने अकथ में बहुत कुछ कह जाती है । डेविड, सारा से बहुत प्रेम करता है किन्तु सारा डेविड से उतना ही प्रेम करती है, यह कहानी में कहीं भी नहीं झलकता। कहीं ऐसा तो नहीं , यह षड्यंत्र विवाह के पूर्व सारा और उसकी बेटी की पूर्व योजना हो। हालाँकि सारा के चरित्र में ऐसा कहीं भी स्पष्ट नहीं होता । सारा की बेटी जैनी के साथ ही उसका एक छोटा बेटा नील भी है । संभव है उसकी सुरक्षा और भविष्य की चिंता रही हो सारा में । वे तीनों , डेविड और उसकी 10 वर्षीया बेटी नैंसी के साथ मिलजुलकर रहते थे । अपने प्रथम पत्र( 25अक्टूवर 2020) में एक जगह वह लिखता भी है-
“ओह जैनी, तुमने यह क्या किया!!! नैंसी के बारे में सोचते ही मेरा कलेजा फटने लगता है। कम से कम तुम्हारी माँ तो तुम्हारे साथ हैं पर मेरी नैंसी तो अब सरकारी फॉस्टर होम में भटक रही होगी। क्या तुम्हें नैंसी से बिलकुल लगाव नहीं हो पाया था? दो वर्ष से तुम और तुम्हारा भाई, मेरे और नैंसी के साथ रह रहे थे.. क्या तुममें उस छोटी, बिन माँ की बच्ची के लिए कोई ममता नहीं जागी?” ऐसे बहुत सारे संभावित सवालों को यह कहानी अपनी खामोशी में दबाये रखती है, मुखर है तो डेविड का त्रास और करूणा से कौंधता हृदय ।
उक्त एकाकी संवाद में सारा के के मनोभावों को लेखिका ने बड़ी बारीकी से उकेरा है जो बरबस पाठक का ध्यान खींचता है- “वह इन पत्रों के शब्दों से उठती ग्लानि की मार को भूल जाना चाहती थी?” लेखिका के इस वाक्य में प्रश्नवाचक चिह्न लगा है । अर्थात् यह आवश्यक नहीं कि सारा को उक्त घटना के लिए कोई ग्लानि हुई हो। डेविड के कथित दुराचार को बेटी के कहने पर वह सही मानती है तभी तो जैनी द्वारा कोर्ट में झूठा बयान देने के लिए मना नहीं करती या कोई प्रतिवाद नहीं करती। डेविड इसका जि़क्र अपने पत्र में करता है-” सारा ने जब तुम्हारी बात पर विश्वास किया तो वह अपनी बेटी की चिंता करने वाली माँ थी, मैं उसे दोष नहीं देता। मेरी नॅसी अगर किसी पर इसी तरह रो-रो कर आरोप लगाती तो मुझे भी बहुत चिंता होती, मैं भी उस पर विश्वास करने के लिए बाध्य होता। फिर तुमने तो अपने दोस्तों की मदद से मेरे दुराचार की गवाही भी बना ली थी..! इस फऱेब से उन्हें क्या मिला? शायद पॉवर ! शायद कुछ भी कर सकने की आजादी! या बस एक थ्रिल भरी मस्ती….! या यह सब तुम सब के लिए एक खेल था?” इस कथन के आखिरी वाक्य में कहानी का अव्यक्त भाव और ग्लोबलाइज़ेशन के वर्तमान युग में मनुष्य की आत्मकेन्द्रित स्वार्थपरतकता निहित है ।
पत्र शैली की इस कहानी के अंतिम हिस्से में कहानीकार के दिलोदिमाग़ में एक साथ कई सवाल खड़े हो जाते हैं- पिता के रूप में तिल तिल टूटता हुआ एक आदमी का क्या हुआ होगा? नैंसी को उसका पिता मिलेगा या नहीं? सारा को उसकी सच्चाई का ज्ञान हुआ या नहीं? आदि। लेखिका को नहीं मालूम इस संबंध में आगे क्या हुआ होगा? इतना ज़रूर कि -” जानती हूँ तो बस यह कि एक पिता इन चि_ियों के हर शब्द में तड़प रहा था। मैं हकबकाई सी बैठी उसके दर्द को देख रही थी…।” कहानी का यह अंतिम वाक्य लेखिका द्वारा कहानी लिखने की उत्प्रेरणा है , और पाठक मन को बेतरह झकझोर देने वाला झंझावात ।
आलोच्य कहानी ” डियर जैनी” में जो सवाल लेखिका के दिलोदिमाग़ में अनुत्तरित रह जाते हैं वे पाठक तक पहुंचने -पहुँचते उस सामाजिक , अनमेल विचारों का दोबारा बसा परिवार , युवा मन की उच्छृंखलता से उपजी विकृतियां , यौन कुंठा, अनुशासन पसंद पिता का भाव, कोरोनाकालीन प्रतिबंधों का मनोविकार , मानवीय मूल्यों का क्षरण, नैतिक चरित्र का पतन , न्याय व्यवस्था की अदूरदर्शिता, अपने- पराये की स्वार्थपरकता, भ्रातिपूर्ण धारणाएं , चारित्रिक विघटन , जेल की पीड़ा , मानसिक संघात , भौतिकतावादी दृष्टिकोण इत्यादि के टूटते – चरमराते परिदृश्य तक ले जाते हैं जहाँ मनुष्य का अस्तित्व नकारा हो गया है ।
कहानी तत्वों की दृष्टि से आज की कहानियों के मानदंडों में यह कहानी बेशक खरी उतरती है । काल्पनिकता के तत्व यथार्थ परक भावबोध से आच्छादित हैं । कथा विन्यास और शिल्प में नवीनता है। विदेश की पृष्ठभूमि पर सृजित पात्र और चरित्र सार्वदेशिक बन पड़े हैं( पात्रों के नाम, एटलांटा, शहर विदेश के हैं) । कहानी पढ़ते हुए लगता है कि हम अपने आसपास सारे घटना चक्र को घूमते हुए देख रहे हैं, जैसा कि कहानीकार डॉ. शैलजा सक्सेना एक अजाने और अभागे पिता डेविड के दर्द को देख रही थीं । किसी के दर्द को देखने की व्यंजना बहुत मारक होती है । सामान्यतया दर्द को महसूस किया जाता है, ‘देखने’ शब्द का प्रयोग कर लेखिका ने अपनी गहरी संवेदनशीलता का परिचय दिया है । कहानी के प्रत्येक शब्द को जैसे उसने छू छू कर उनकी धडक़नों को महसूस किया है । जैसे डेविड के पत्रों में एक शब्द ” ओह” हर बार आता है । यह डेविड के कारुणिक त्रास की कथा संवेदना है । इस शब्द से कहानी का अव्यक्त कथ्य सीधे पाठक के दिमाग़ में गूँजने लगता है । डेविड के पत्र में अक्सर यह शब्द आता है । क्या यह शब्द केवल डेविड का है? नहीं , केवल डेविड का नहीं, यह तो कहानीकार की उस चेतना की कसक है जो ” डेविड” नामक अजाने पात्र की अन्तर्वेदना में ध्वनित होती है ।आधुनिक युगीन मूल्य हीनता और अमानवीकरण को यह कहानी बखूबी कहती है ।कथा विन्यास में प्रवाह है । भाषा – शिल्प से पाठक बंधा रहता है।
हिन्दी कहानी हो या प्रवासी कथा साहित्य, यह कहानी ‘डियर जैनीज्’ देशान्तर की मानवीय संवेदना से साक्षात्कार कराती है।कहानी शीर्षक ’जैनी’ शब्द के बाद डैश – डैश – डैश से यह संकेत मिलता है कि कहानी में ऐसे बहुत सारे तथ्य मौजूद हैं जो कथा – शिल्प से बाहर भी देश काल और परिवेश में असर दिखाते हैं । इस कहानी को पढ़ते हुए हिन्दी के प्रमुख कहानीकार कमलेश्वर की यह बात ठीक लगती है कि – अच्छी कहानी वह होती है जिसमें जीवन को प्रामाणिकता के साथ जिया जाता है । खैर ज्.
‘ डियर जैनीज्’ कहानी की अन्तर्वस्तु से ऐसे कई कोण उभरते हैं जो समकालीन हिन्दी कहानी के आगे का द्वार खोलते हैं। लिहाजा प्रवासी कहानी और भारत में लिखी जा रही हिन्दी कहानी की संवेदना के धरातल को यह कहनी ‘ डियर जैनीज्.एकाकार करती है । यह शैलजा सक्सेना की बड़ी कामयाबी है ।उनके चर्चित कहानी संग्रह ‘लेबनान की एक रात’( भारत के विश्वविद्यालयीन पाठ्यक्रमों में समादृत ) तथा कविता के क्षेत्र में जहाँ स्त्री विमर्श के तत्व अधिक सशक्त हैं वहीं विवेच्य कहानी ‘ डियर जैनी’ में एक अजाने पुरुष की गहरी संवेदना छलक रही है । यह लेखिका के बहुआयामी व्यक्तित्व का परिचायक है। मन्नू भंडारी के पुरुष पात्र गजाधर बाबू ( वापसी कहानी) हो या प्रवासी साहित्यकार तेजेंद्र शर्मा के कहानी संग्रह ‘संदिग्ध’ की शीर्षक कहानी का कथा नायक शाहिद हो( यद्यपि कथानक में भिन्नता है ) को संदर्भित इसलिए किया जा सकता है कि इनमें पुरुष पात्रों की त्रासदी मुखर है। हिन्दी और प्रवासी कथा साहित्य में अन्य कई कहानियां इस बोध से रचित हैं जिनमें अपने शिल्प और कथ्य दोनों दृष्टि से शैलजा सक्सेना की कहानी ‘डियर जैनी’ का विशिष्ट स्थान है।
—————००००—————-

 

समीक्षक- डॉ. मीनकेतन प्रधान
पूर्व प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष- हिन्दी
किरोड़ीमल शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय, रायगढ़ (छ.ग.)

 

You Might Also Like

सिर में चोट लगने से वृद्धा ने दम तोड़ा

चाकू की नोक पर मां से रूपए की मांग

बिना एटीएम व ऑन लाईन ट्रांजेक्शन के बुजुर्ग के खाते से 17 लाख पार

ओपी के बजट में विकसित भारत की अवधारणा को पूरा करने का संकल्प : आलोक पटेल

जनरल ऑब्जर्वर डॉ.रूपांजलि कार्तिक ने शहर के मतदान केन्द्र का किया निरीक्षण, व्यवस्थाओं की ली जानकारी

Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Telegram Email
Previous Article कुनकुरी को मिलेगी पहली आधुनिक आवासीय कॉलोनी, अटल विहार योजना के तहत 97 आवासों का होगा निर्माण

खबरें और भी है....

कैनेडा की कहानी ‘डियर जैनी…’ की समीक्षा
कुनकुरी को मिलेगी पहली आधुनिक आवासीय कॉलोनी, अटल विहार योजना के तहत 97 आवासों का होगा निर्माण
आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा रायगढ़ प्रेस क्लब भवन
अज्ञात वाहन की ठोकर से युवक की मौत, आक्रोशित ग्रामीणों ने किया चक्काजाम
पति की मारपीट से पत्नी की मौत

Popular Posts

डेंगू से निपटने निगम और स्वास्थ्य की टीम फील्ड पर,पिछले 5 साल के मुकाबले इस साल केसेस कम, फिर भी सतर्कता जरूरी
जहां रकबे में हुई है वृद्धि पटवारियों से करवायें सत्यापन-कलेक्टर श्रीमती रानू साहू,मांग अनुसार बारदाना उपलब्ध कराने के निर्देश
कैनेडा की कहानी ‘डियर जैनी…’ की समीक्षा
मेगा हेल्थ कैंप का मिला फायदा, गंभीर एनीमिया से पीड़ित निर्मला को तुरंत मिला इलाज
स्कूल व आंगनबाड़ी के बच्चों का शत-प्रतिशत जारी करें जाति प्रमाण पत्र,कलेक्टर श्रीमती रानू साहू ने बैठक लेकर राजस्व विभाग की कामकाज की समीक्षा

OWNER/PUBLISHER-NAVIN SHARMA

OFFICE ADDRESS
Navin Kadam Office Mini Stadium Complex Shop No.42 Chakradhar Nagar Raigarh Chhattisgarh
CALL INFORMATION
+91 8770613603
+919399276827
Navin_kadam@yahoo.com
©NavinKadam@2022 All Rights Reserved. WEBSITE DESIGN BY ASHWANI SAHU 9770597735
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?