घरघोड़ा। तहसील घरघोडा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले छेडोरिया गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में पेयजल संकट गंभीर रूप लेता जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार केंद्र परिसर में लगे हैंडपंप से निकलने वाला जल अत्यधिक आयरनयुक्त, दुर्गंधयुक्त एवं संदिग्ध गुणवत्ता का है, जिसे मजबूरी में छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पीना पड़ रहा है। आंगनबाड़ी जैसे संवेदनशील केंद्रों का उद्देश्य बच्चों एवं महिलाओं को पोषण और स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराना होता है, लेकिन यहां की स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की दुर्गंध इतनी तेज है कि उसका सामान्य उपयोग भी कठिन हो गया है। लगातार ऐसे दूषित जल के सेवन से बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव और बीमारियों का खतरा बढऩे की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार जल में केवल आयरन ही नहीं, बल्कि अन्य हानिकारक तत्वों की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जिसकी पुष्टि केवल वैज्ञानिक जांच के बाद ही संभव है। हालांकि अब तक न तो जल की गुणवत्ता की जांच कराई गई है और न ही किसी वैकल्पिक सुरक्षित पेयजल व्यवस्था की पहल की गई है। पेयजल गुणवत्ता की निगरानी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) एवं जल जीवन मिशन की जिम्मेदारी है, जबकि आंगनबाड़ी संचालन महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन है। ऐसे में दोनों विभागों की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बच्चों के स्वास्थ्य जैसे गंभीर मुद्दे पर प्रशासनिक उदासीनता चिंता का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से आंगनबाड़ी केंद्र में तत्काल शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने, जल की गुणवत्ता की जांच कराने तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि क्षेत्र में कई स्थानों पर हैंडपंप और बोरवेल के पानी में आयरन की समस्या देखी जा रही है, जबकि पारंपरिक कुओं का जल अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है।



