रायगढ़। जिले के कोड़ातराई क्षेत्र (औरदा गांव) में प्रस्तावित एयरपोर्ट हवाई पट्टी परियोजना को लेकर सुलग रही विरोध की आग अब भडक़ उठी है। बीते दिनों औरदा गांव में आयोजित जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों और भू-स्वामियों का गुस्सा प्रशासन पर जमकर फूटा। सैकड़ों की तादाद में पहुंचे ग्रामीणों ने साफ शब्दों में हुंकार भरते हुए कहा कि गांव की जमीन, खेती और बुनियादी सुविधाओं की बलि चढ़ाकर उन्हें ऐसा कोई ‘विकास’ नहीं चाहिए। किसानों के इस उग्र तेवर को देखकर मौके पर मौजूद प्रशासनिक अमले के भी हाथ-पांव फूल गए।
जनसुनवाई में ग्रामीणों ने अपना दर्द और आक्रोश बयां करते हुए बताया कि जिस जगह पर एयरपोर्ट का निर्माण प्रस्तावित है, वहां हाल ही में स्कूल, पक्की सडक़ें और अन्य जरूरी सुविधाएं तैयार की गई हैं। अगर यहां एयरपोर्ट बनता है, तो पूरा क्षेत्र तबाह हो जाएगा और गांव की पूरी व्यवस्था बिखर जाएगी। प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में साफ कहा गया है कि इस प्रोजेक्ट के कारण 150 से अधिक परिवारों के सिर पर विस्थापन की तलवार लटक जाएगी। चूंकि यहां के ज्यादातर परिवार पूरी तरह से खेती-किसानी पर निर्भर हैं, ऐसे में जमीन छिन जाने के बाद उनके सामने रोजी-रोटी का गहरा संकट खड़ा हो जाएगा।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने कहा कि सामाजिक प्रभाव आकलन की पूरी प्रक्रिया में कोई पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। प्रभावित परिवारों को अंधेरे में रखकर उनकी राय को दरकिनार किया जा रहा है। इस दौरान ग्रामीणों ने साल 2012 में आए उस पुराने एयरपोर्ट प्रस्ताव की भी याद दिलाई, जो ठंडे बस्ते में चला गया था। ग्रामीणों ने प्रशासन से तीखा सवाल किया कि जब उस समय यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी, तो अब अचानक फिर से इस बेमानी परियोजना की जरूरत क्यों आन पड़ी है?
जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक से परेशानी
ग्रामीणों की एक बड़ी पीड़ा यह भी सामने आई कि पिछले कई सालों से इस इलाके में जमीन की खरीदी-बिक्री और बंटवारे पर रोक लगा दी गई है। इस प्रतिबंध की वजह से ग्रामीणों को अपनी ही जमीन होते हुए भी दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं और उन्हें भारी आर्थिक व सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नक्शा सार्वजनिक हो, वरना होगा उग्र आंदोलन
किसानों ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि उनकी जमीन ही उनका एकमात्र सहारा है। प्रशासन बिना किसी देरी के परियोजना का पूरा नक्शा, प्रभावित क्षेत्र की स्पष्ट जानकारी और अपनी पुनर्वास नीति को सार्वजनिक करे। ग्रामीणों ने दो टूक अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और बिना सहमति के कोई भी निर्माण कार्य शुरू करने की कोशिश की गई, तो वे एक बड़े और उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
वहीं, ग्रामीणों के इस भारी विरोध के बीच प्रशासन का वही रटा-रटाया जवाब सामने आया है। अधिकारियों का कहना है कि जनसुनवाई में प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों पर नियमानुसार विचार किया जाएगा और आगे की पूरी कार्यवाही कानून के दायरे में ही होगी। फिलहाल, कोड़ातराई में एयरपोर्ट का मुद्दा प्रशासन के गले की फांस बनता जा रहा है।



