रायगढ़। छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल अब पूरे निगम के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। हड़ताल के चलते निगम का संपूर्ण कार्य प्रभावित हो गया है और इसका असर प्रदेशभर के बीज भंडारण केंद्रों, वितरण व्यवस्था तथा प्रशासनिक कार्यों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। स्थिति यह है कि कार्यों के ठप पडऩे से प्रबंधन स्तर पर बेचौनी बढ़ गई है, वहीं दूसरी ओर प्रदेशभर के बीज प्रबंधक भारी दबाव और भय के वातावरण में कार्य करने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर शुरू हुई हड़ताल अब व्यापक रूप ले चुकी है। कर्मचारियों के कार्य से दूर रहने के कारण बीज निगम के नियमित संचालन पर गहरा असर पड़ा है। बीज गोदामों में लोडिंग-अनलोडिंग, बीजों के रखरखाव, रिकॉर्ड संधारण, वितरण व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक कार्य लगभग प्रभावित हो चुके हैं। इसका सीधा असर किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।
सूत्रों का कहना है कि हड़ताल की वजह से प्रदेशभर के बीज प्रबंधकों पर अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा है। उच्च प्रबंधन की ओर से लगातार कार्यों को सुचारू रखने का दबाव डाला जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर कर्मचारियों की कमी के कारण कार्य कराना लगभग असंभव हो गया है। ऐसी स्थिति में कई बीज प्रबंधक मजबूरीवश आउटसोर्स कर्मचारियों की मांग करने को विवश हो रहे हैं, ताकि कार्य किसी प्रकार चलता रहे और उनके ऊपर किसी प्रकार की प्रतिकूल प्रशासनिक कार्रवाई न हो।
निगम के भीतर भय और असुरक्षा का माहौल इतना गहरा बताया जा रहा है कि कोई भी नियमित कर्मचारी खुलकर अपनी बात रखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। कर्मचारियों के बीच यह धारणा बन चुकी है कि यदि किसी ने भी वर्तमान हालात पर सवाल उठाया या प्रबंधन के समक्ष वास्तविक स्थिति रखने का प्रयास किया, तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है या उसकी वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने जैसी दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है। इसी भय के कारण अधिकांश कर्मचारी मौन रहने को मजबूर हैं।
बीज प्रबंधकों का कहना है कि वे एक तरफ कार्यों को संभालने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों की कमी और बढ़ते प्रशासनिक दबाव के कारण मानसिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उनका मानना है कि जब तक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाला जाएगा, तब तक निगम की कार्यप्रणाली सामान्य होना मुश्किल है।
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन प्रबंधन द्वारा गंभीरता से समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया गया होता, तो आज निगम को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
हड़ताल के चलते निगम के भीतर प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच संवादहीनता की स्थिति बनती जा रही है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि दबाव और भय का वातावरण बनाकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। इसके बजाय प्रबंधन को संवेदनशीलता दिखाते हुए वार्ता के माध्यम से कर्मचारियों की मांगों का समाधान करना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया तो इसका व्यापक असर खरीफ सीजन की तैयारियों और किसानों को बीज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। वर्तमान परिस्थितियों में निगम प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कर्मचारियों का विश्वास बहाल करना और हड़ताल समाप्त कराने के लिए सकारात्मक पहल करना है।
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। अब सबकी निगाहें प्रबंधन पर टिकी हैं कि वह इस संकट का समाधान संवाद और सहमति से निकालता है या फिर दबाव की नीति को जारी रखता है।
दैवेभो कर्मियों की हड़ताल से चरमराई बीज निगम की व्यवस्था
प्रबंधन पर बढ़ता दबाव, भय के साये में काम कर रहे अधिकारी-कर्मचारी



