रायगढ़। मृत्यु के बाद संसार में जीवित रहने का कोई विकल्प नहीं क्योंकि मौत पर किसी का जोर नहीं चलता, पर मौत के बाद भी किसी के काम आकर ही इस नश्वर संसार में अमरत्व को हासिल किया जा सकता है। रायगढ़ निवासी स्व. सुमित टांक ने जम्मू में मृत्यु परांत देहदान कर यह अमरत्व पाया है। एक साल पहले जम्मू में हुए असामयिक निधन के बाद परिवार ने उनका देहदान गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, जम्मू में कर दिया था। आज जम्मू-कश्मीर के माननीय उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने राजभवन में आयोजित ‘अंगदान-देहदान सम्मान समारोह’ में राज्यपाल ने देहदान करने वाले परिजनों को उनके हौसलों जज्बातों की कद्र करते हुए उन्हें प्रमाण पत्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया। विदित हो कि स्वर्गीय सुमित टांक के परिजनों छत्तीसगढ़ रायगढ़ निवासी मां शारदा टांक के निर्णय के बाद उनके ज्येष्ठ भ्राता पुनीत टांक अनुज अर्पित टांक ने जम्मू कश्मीर जाकर उनकी मृत देह की चिकित्सीय अध्ययन हेतु शासकीय मेडिकल कालेज में दान दिया था। रायगढ़ से कोसों दूर मृत बेटे की अंतिम झलक पाने की बजाय मां ने ममता से परे जाकर निर्णय लिया कि उनका बेटा भले ही डॉक्टर नहीं बन पाया लेकिन उसकी देह के अध्ययन से दर्जनों डॉक्टर बनेंगे। इससे बड़ा पुण्य क्या होगा ? परिवार ने आंसुओं के साथ सहमति दे दी। सम्मान समारोह में उप राज्यपाल श्री सिंहा ने कहा आमतौर पर माता-पिता बच्चों की अस्थियां गंगा में बहाते हैं। टांक परिवार ने बेटे की देह गंगा नहीं, ज्ञान की गंगा में बहा दी। ऑपरेशन थियेटर में जाने से पहले हर छात्र जिस ‘फर्स्ट पेशेंट’ पर चीर-फाड़ सीखता है, वो सुमित था। यानी सुमित मरकर भी 200 डॉक्टरों का मौन गुरु बन कर अमर हो गया। कश्मीर से कन्याकुमारी तक लोग शव के लिए लड़ते हैं लेकिन टांक परिवार शव देकर समाज को जोड़ रहा है। यह घटना ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की कल्पना को साकार करती है।
रायगढ़ से जम्मू तक सुमीत के देहदान की गूंज
सुमित के भाई ने रुंधे गले से बताया- जिस दिन भाई गया, लगा सब खत्म हो गया। आज उप राज्यपाल ने जब सम्मान दिया तो फिर से भाई से जुड़ी स्मृतियां जीवित हो उठी। रायगढ़ की मिट्टी का बेटा जम्मू में माटी का नाम रोशन कर रहा इससे बड़ा गर्व क्या होगा भाई भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, पर किसी मेडिकल छात्र की किताब में हैं। पुनीत ने समाज से अपील करते हुए कहा अंगदान-देहदान से भयभीत होने की बजाय आगे आए ओर मरने के बाद भी अपनों को जीवित रखे। भाई पुनीत टांक ने देहदान से जुड़ी आवश्यक जानकारी साझा करते हुए कहा डॉक्टर बनाने की पहली सीढ़ी देहदान से होकर गुजरती है क्योंकि बिना मानव देह की सर्जरी के बिना कोई भी सर्जन नहीं बन सकता। इस संबंध में फैले अंधविश्वास को तोड़े जाने की आवश्यकता बताते हुए कहा देह दान से मोक्ष नहीं मिलेगा यह सिर्फ भ्रम है। गीता भी कहती है ‘नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि’। मृत्यु सत्य है, देह नश्वर है। पर देह दान का निर्णय किसी को जीवन भर का ज्ञान दे सकता है।
नश्वर संसार से देह तो गई पर शिक्षा दे गई, सुमित टांक का देहदान, एक साल बाद जम्मू राजभवन में परिवार सम्मानित
जम्मू में असमय निधन, परिजनों ने लिया था देहदान का बड़ा फैसला



