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सारंगढ़

नारी हेतु शौचालय से ऑपरेशन सिंदुर तक मोदी की देन : नजमा

नारी शक्ति वंदन अधिनियम सुधार जो विपक्ष के राजनीतिक स्वार्थ के कारण पूरा न हुआ : नजमा

lochan Gupta
Last updated: April 23, 2026 12:09 am
By lochan Gupta April 23, 2026
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11 Min Read

सारंगढ़। भाजपा कार्यालय में नारी शक्ति वंदन को लेकर भाजपा द्वारा प्रेस वार्ता ली गई। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अल्प संख्यक आयोग के राष्ट्रीय सदस्य श्रीमती नजमा अजीम खान ने पत्रकारों के प्रश्नों का सधे हुए शब्दों में उत्तर दी इस दौरान जिला महिला मोर्चा अध्यक्ष श्रीमती वैजयंती नंदू लहरें, पूर्व विधायक केराबाई मनहर, श्रीमती शिवकुमारी अनिल साहू, जिला अध्यक्ष ज्योति पटेल, वरिष्ठ भाजपा नेता भुवन मिश्रा,भरत जाटवर प्रकाश अग्रवाल के साथ साथ अन्य नारी शक्ति की उपस्थिति रही।नजमा ने बताया कि – भारतीय सभ्यता के हजारों सालों के इतिहास के साथ ही भारत लोकतंत्र की जननी है। भारत के पास इस सफर में एक नया पहलू जोडऩे का मौका था। हम देश की आधी आबादी को नीति निर्धारण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने के लिए यह नारी शक्ति वंदन अधि नियम लाए थे। हमने सभी सांसदों से आग्रह किया था कि वे इस मौके को हाथ से न जाने दें। हम सब मिलकर देश को एक नई दिशा देने के लिए तैयार थे। यह भारत की नारी शक्ति के लिए एक महायज्ञ था। हमें विश्वास था कि इस महायज्ञ का नतीजा न केवल राजनीति का भविष्य बल्कि देश की दिशा व दशा नियति भी तय करेगा लेकिन, स्वार्थी विपक्ष,जिस ने 30 साल तक राजनीतिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में हमारी महिलाओं की भागीदारी देने में देरी की, ने एक बार फिर इस देश की महिलाओं को निराश किया है। उन्होंने देश को निराश किया। अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की बेचैनी में, ढ्ढहृष्ठढ्ढ ्रद्यद्यद्बड्डठ्ठष्द्ग का स्वार्थ एक बार फिर सामने आया और महिलाओं के हितों को एक बार फिर दरकिनार कर दिया गया।
हमारी दादी ने इस का इंतजार किया था। हमारी माताओं ने इसकी उम्मीद की थी। हमारी बहन बेटियों ने इस क्षण का इंतजार किया था। कांग्रेस और उसके साथियों ने आपकी बेटियों को और 30 साल इंतज़ार करवाया! यह सीटों के बारे में नहीं है। भारतीय घर की इज्ज़त के बारे में है जो आखिर कार लोक तंत्र के मंदिर तक पहुँच रही है। हमें इस विषय को लेकर स्पष्ट होना चाहिए कि विपक्ष ने क्या होने सेरोका है। उन्होंने सबसे ऊँचे स्तर पर भारतीय महिलाओं के पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेशन को कमज़ोर किया है। उन्होंने हमारे देश की महिलाओं को टेबल पर सीट मिलने से रोककर अपने राजनैतिक स्वार्थ की रक्षा की।
यह कोई राजनीति विषय नहीं था। ऐसा कभी नहीं होना था। विपक्ष ने जो किया है, वह देश के सबसे ऊँचे पदों पर बैठी महिलाओं के लिए अपनी नफऱत और तिरस्कार को सबके सामने ला दिया है और शीर्ष नेतृत्व में नीति निर्धारण कर ने वाली भूमिकाओं में महिलाओं की काबिलियत पर शक करने की और अपनी महिलाओं से घृणा करने वाली सोच को खुलेआम दिखाया है। हमें आभास तो था कि विपक्ष ऐसा ही कुछ करेगा, कांग्रेस पार्टी ने पारंपरिक रूप से एक साफ़ महिला-विरोधी रुख बनाए रखा है, जो उसके पुराने साथियों और मौलवियों से प्रेरित है। प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मुस्लिम महिलाओं की पीठ में छुरा घोंपा जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें मुस्लिम पुरुषों को अपनी पत्नियों को गुजारा भत्ता देना जरूरी था। मौलानाओं ने हंगामा किया और राजीव गांधी जल्दी से पीछे हट गए। इस बड़े अन्याय को भी नरेंद्र मोदी को ठीक करना पड़ा, जब शाह बानी मामले को पलटने का भूत आखिर कार दफना दिया गया, क्योंकि एनडीए सरकार ने ट्रिपल तलाक पर बैन लगा दिया। आज, वही कांग्रेस पार्टी उसके पिछड़े नेताओं ने महिलाओं के प्रति निधित्व व बराबरी के मुद्दे को एक बड़ा झटका दिया है।
विपक्ष पंचायतों में महिलाओं के लिए रिज़र्वेशन का झूठा क्रेडिट लेकर अपनी राजनीतिक सोच को छिपाने की कोशिश करता है। वे यह भूल जाते हैं कि वे पंचायतों में रिज़र्वेशन के लिए आसानी से मान गए क्योंकि इससे उनकी अपनी स्थिति को कोई खतरा नहीं था। लेकिन उन्होंने लोकतंत्र के शीर्ष स्तर पर ऐसा नहीं होने दिया। विपक्ष हमेशा इस बिल के समर्थन में होने का दिखावा करता रहा है। हर बार वे कहते थे इसके समर्थन में हैं, लेकिन,इसलिए हमेशा एक लेकिन/लेकिन/ परंतु होता है। इस बिल का विरोध करने के लिए वे हमेशा कोई न कोई टेक्निकल बात उठाते हैं उन्होंने फिर वही किया। इस बार उन्होंने एकजुट भारतीय परिवार में फूट, मन मुटाव और शक पैदा करने के अपने एजेंडे के पीछे छिपने की कोशिश की। उन्होंने भारत को उत्तर व दक्षिण के आधार पर बांटने की कोशिश की,जबकिआसानी से अपने महिला- विरोधी चरित्र को छिपाया। विपक्ष के लिए, महिलाओं के अधिकार, आरक्षण एक मजाक और राजनीतिक सुविधा की बात है। हमने आज इसे सामने आते देखा। महिला से नफऱत की ऐतिहासिक मिसाल कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने कई मोर्चों पर बहुत बड़ी गड़बड़ी छोड़ी है। 2014 में जब प्रधानमंत्री मोदी केंद्र में आए, तो भारतीय महिलाएं बहुत बुरी हालत में थीं। वे खुले में शौच करने के लिए मजबूर थी। उनके पास गैस सिलेंडर नहीं थे पानी की सप्लाई नहीं थी। घरों की कमी के कारण करोड़ों भारतीय परिवार खुले में सोने को मजबूर थे। महिलाएं बैंकिंग सिस्टम से जुड़ी नहीं थीं और न ही उनके पास फॉर्मल क्रेडिट तक पहुंच थी। यह सब मोदी ने किया।
पत्रकार के प्रश्नों का उत्तर देते हुए नजमा ने कहा कि – यह सब और भी बहुत कुछ पिछले दस से बारह सालों में प्रधानमंत्री मोदी ने हल किया है। विपक्ष ने बस इन कोशिशों का मज़ाक उड़ाया, उनकी बुराई की और उन्हें नाकाम किया। आज, महिलाओं की भलाई से ज्यादा अपने मतलब के राजनीतिक फ़ायदों को अहमियत देते हुए, हैरान करने वाली बेशर्मी से दिखाया गया, जब सरकार ने यह पक्का करने की कोशिश की कि इस देश की ज़मीनी स्तर से उठती महिलाओं को देश की संसद और विधानसभाओं में उनकी सही जगह मिले, तो विपक्ष ने एक बार फिर इसे पटरी से उतार दिया। वे इसे टेक्निकल बातों से समझाने की कोशिश कर सकते हैं लेकिन सच तो यह है कि भारतीय महिलाओं की तरक्की के मकसद को बहुत बड़ा झटका लगा है। इस देश की महिलाएं उन लोगों को कभी माफ़ नहीं करेगी जिन्होंने ऐसा किया।हमारे लिए यह कभी भी राजनीतिक क्रेडिट लेने की बात नहीं थी। बल्कि हमने पूरी संसद से सपोर्ट मांगा था। हमने विपक्ष से वादा किया था कि वे इस कदम का पूरा क्रेडिट ले सकते हैं क्योंकि हम असल सशक्तिकरण चाहते थे। हम अपनी माताओं, बहनों और बेटियों की भलाई, उनके उत्थान और उनके अधिकारों और सम्मान को पक्का करने के लिए समर्पित है। यह हमारे लिए पॉलिटिक्स नहीं है। यह भारत माता और नारी शक्ति की सेवा में एक सिद्धांतों वाला नज़रिया है।महिला विरोधी ताकतें आज भले ही जीत गई हों, लेकिन महिलाओं के लिए हमारा समर्पण विपक्ष की सत्ता की भूख से ज्यादा मज़बूत है। हमारे साथ करोड़ों महिलाओ का आशीर्वाद है, जो भारत की महिलाओं को उनका हक दिलाने के हमारे सफऱ में हमारा मार्गदर्शन और साथ देगा।
नजमा जी आप बताएंगे कि- विपक्ष ने नारियों के साथ ऐसा क्या किया ? विपक्ष ने महिलाओं के राजनैतिक प्रतिनिधित्व को नुकसान पहुँचाने के इतिहास महिला रिज़र्वेशन बिल पहली बार 1996 में एचडी देवेगौड़ा सरकार ने पेश किया था। इसे एक पार्लियामेंट्री कमेटी के पास भेजा गया। रिपोर्ट आई सरकार गिर गई। बिल वहीं रुक गया। यही टेम्पलेट था और कांग्रेस अगले अठारह सालों में इसे और बेहतर बनाती रही। 1998 और 2003 के बीच, अटल बिहारी वाजपेयी जी की एडीए सरकार ने बिल पास करने की चार अलग-अलग कोशिशें की। हर कोशिश को बीजेपी ने नहीं, बल्कि उन्हीं गठबंधन सह योगियों ने नाकाम किया जिनके साथ कांग्रेस अब खड़ी है। समाजवादी पार्टी ने सदन के वेल में घुसकर हंगामा किया। राबड़ी देवी की पार्टी आरजेडी ने चालाकी से बिल को रोक दिया। उनका बताया गया कारण पहले ओबीसी कोटा लाएं। महिलाएं इंतज़ार कर सकती हैं।
1998 में आरजेडी एमपी सुरेंद्र प्रकाश यादव ने संसद में महिला रिज़र्वेशन बिल का डॉक्यूमेंट छीनकर फाड़ दिया। यह विरोध नहीं था। यह अपमान था। फिर कांग्रेस की यूपीए आई। पूरे दस साल। 2004 से 2014 तक। सोनिया गांधी कमान संभाले हुए थीं। महिलाओं के अधिकारों की खुद को चैंपियन बताती थीं। 2010 में राज्य सभा ने बिल पास कर दिया। खड़े होकर तालियां बजाई गईं। सोनिया गांधी की फोटो खींची गई जिसमें वह भावुक दिख रही थी। राज्य सभा ने अपना पक्ष रख दिया था लेकिन लोकसभा में बिल कभी पेश नहीं हुआ। 2010 में नहीं। 2011 में नहीं। 2012 में नहीं। 2013 में नहीं। 2014 में नहीं। पूरे चार साल राज्य सभा की मंजूरी के साथ। बस जरूरत थी इसे पारित करने की। लेकिन कांग्रेस और उसके साथियों में ऐसा नहीं किया। 2010 में जब राज्य सभा में बिल पर बहस हो रही थी, तो कांग्रेस के सबसे ज़रूरी पॉलिटिकल पार्टनर में से एक मुलायम सिंह यादव ने पार्लियामेंट में खड़े होकर महिला एमपीएस के खिलाफ अपशब्द कहे।आज इन सभी दलों ने फिर अपना महिला विरोधी चेहरा सबके सामने रखा है।

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