रायपुर। छत्तीसगढ़ में आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत एडमिशन मिलने वाले बच्चों की फीस में बढ़ोतरी की मांग को लेकर निजी स्कूलों का असहयोग आंदोलन तेज हो गया है। शनिवार (18 अप्रैल) को प्रदेश के सभी निजी स्कूल बंद रहेंगे। इससे पहले शुक्रवार को स्कूल संचालकों, शिक्षकों और स्टाफ ने काली पट्टी बांधकर काम करते हुए विरोध दर्ज कराया था। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि, यदि शासन जल्द ही आरटीई प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि नहीं करती है, तो लॉटरी के माध्यम से चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। एसोसिएशन का यह आंदोलन 1 मार्च से लगातार जारी है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं होने से नाराजगी बढ़ती जा रही है। एसोसिएशन के आह्वान पर प्रदेश के 5 हजार से ज्यादा निजी स्कूल बंद है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता और सचिव मोती जैन ने बताया कि, राज्य में पिछले 14 साल से आरटीई के तहत दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वर्तमान में कक्षा पहली से पांचवीं तक के लिए 7,000 रुपए और छठवीं से आठवीं तक 11,400 रुपए प्रति छात्र हर साल भुगतान किया जाता है। जबकि शिक्षा संचालन की लागत में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे निजी स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
स्कूल संचालकों का कहना है कि, उन्होंने कई बार शासन का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया। यही वजह है कि अब आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया गया है। एसोसिएशन ने संकेत दिए हैं कि, यदि मांगें जल्द पूरी नहीं होतीं, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। फिलहाल आज स्कूल बंद रखकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। गौरतलब है कि प्रदेश में बढ़ती गर्मी को देखते हुए सरकार ने 20 अप्रैल से ग्रीष्मकालीन अवकाश भी घोषित कर दिया है, ऐसे में यह बंदी छात्रों के लिए अतिरिक्त अवकाश जैसी स्थिति बन गई है।
सीएम साय ने दिया मान्यता निरस्त करने का निर्देश
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की तरफ से किए जा रहे असहयोग आंदोलन पर सरकार की नजर है। आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर सीएम साय ने स्कूलों की मान्यता निरस्त करने का निर्देश जारी किया है। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आरटीई के तहत पात्र छात्रों को प्रवेश संबंधित स्कूलों में दिलाने के लिए कहा गया है। वहीं एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि, आरटीई के तहत प्रति छात्र जितना खर्च होता है, स्कूल एसोसिएशन उससे कम मांग रहा है। मांग पूरी नहीं होने की वजह से स्कूलों के संचालन में दिक्कत आ रही है।



