रायपुर। शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत एडमिशन देने से इनकार करने वाले निजी स्कूलों को राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। शिक्षा विभाग की तरफ से कहा गया है कि ऐसे प्राइवेट स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी जाएगी, जो आरटीई के तहत प्रवेश देने से मना करेंगे या प्रक्रिया में बाधा डालेंगे। विभाग ने लोगों से भ्रामक जानकारी पर ध्यान न देने की अपील भी की है। विभाग का दावा है कि प्रति बच्चा व्यय के आधार पर स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि दी जाती है। यह राशि सरकारी स्कूल में प्रति बच्चे पर होने वाले खर्च या निजी स्कूल की वास्तविक फीस (दोनों में से जो भी कम हो) के आधार पर तय की जाती है।
आरटीई के तहत 3.5 लाख छात्र पढ़ रहे
वर्तमान में राज्य के 6,862 निजी विद्यालयों में आरटीई के तहत लगभग 3,63,515 स्टूडेंट पढ़ाई कर रहे हैं। इस साल भी पहली कक्षा की लगभग 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। बता दें कि छत्तीसगढ़ में अप्रैल 2010 से निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 प्रभावी है।
एसोसिएशन बोला- जारी रहेगा असहयोग आंदोलन
मान्यता रद्द पर भी पीछे नहीं हटेगा संघ- राजीव गुप्ता
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि असहयोग आंदोलन जारी रहेगा। संघ के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग अगर मान्यता रद्द करता है तो भी एसोसिएशन पीछे नहीं हटेगा। हम प्रतिपूर्ति राशि को बढ़ाने के लिए सभी संवैधानिक पहलुओं पर काम कर रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों को धमकाने की कोशिश की है।
आरटीई के तहत एडमिशन न देने पर मान्यता होगी रद्द
रिम्बर्समेंट राशि बढ़ाने की मांग कर रहे प्राइवेट स्कूल



