रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 पारित होने के साथ ही भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और सख्ती की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया।
विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सदन में कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन पिछली कांग्रेस सरकार ने युवाओं के सपनों के साथ अन्याय किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन में कोयला, शराब और डीएमएफ जैसे घोटालों के साथ-साथ पीएससी में भ्रष्टाचार कर युवाओं के भविष्य का सौदा किया गया। उस समय परीक्षाएं तो होती थीं, लेकिन या तो उनके परिणाम नहीं आते थे या फिर परिणाम गड़बड़ी और भ्रष्टाचार से प्रभावित होते थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने सत्ता में आते ही परीक्षा व्यवस्था में व्याप्त गड़बडिय़ों पर करारा प्रहार किया है। सबसे पहले पीएससी घोटाले में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई की गई और आज वे सलाखों के पीछे हैं। उन्होंने बताया कि धांधली करने वालों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जांच सीबीआई को सौंपी गई है। साथ ही, सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में शत-प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अभ्यर्थियों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी कड़ी में यह नया विधेयक लाया गया है, जिसके माध्यम से भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और धांधली की हर संभावना को समाप्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट किया कि इस कानून के लागू होने के बाद अब कोई भी व्यक्ति युवाओं के सपनों से खिलवाड़ नहीं कर सकेगा और मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को उनका उचित अधिकार मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्पष्ट और कठोर प्रावधानों के कारण नकल गिरोह, पेपर लीक करने वाले तथा फर्जी अभ्यर्थियों पर प्रभावी कार्रवाई संभव होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रतियोगी परीक्षाएं पूरी तरह पारदर्शी रहें, किसी भी व्यक्ति या संगठित गिरोह द्वारा उनमें हस्तक्षेप न किया जा सके, प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगे और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से होने वाली नकल पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह कानून पीएससी और व्यापमं द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं के साथ-साथ विभिन्न निगमों और मंडलों की भर्ती परीक्षाओं पर भी लागू होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सरकार के समय ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर तथा कंप्यूटर सिस्टम में छेड़छाड़ कर युवाओं का हक छीना गया था, लेकिन अब इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होने दी जाएगी। इस विधेयक के तहत परीक्षा से जुड़ी एजेंसियों, आईटी एजेंसियों, परीक्षा केंद्रों के प्रबंधकों और सेवा प्रदाताओं को भी जवाबदेह बनाया गया है तथा लापरवाही या बदनीयती पाए जाने पर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अनुरूप युवाओं को पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है और यह विधेयक उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से परीक्षा माफिया को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि छत्तीसगढ़ में अब परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ का गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा। साथ ही, युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास बहाल करने के लिए यह एक ठोस प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत कराया कि इस कानून के तहत प्रश्नपत्र लीक करना या लीक कराने का प्रयास, फर्जी अभ्यर्थी बैठाना तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से नकल करना अपराध घोषित किया गया है। ऐसे मामलों में तीन से दस वर्ष तक की सजा और दस लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है, जबकि संगठित अपराध के मामलों में एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई अभ्यर्थी नकल या अनुचित साधनों का उपयोग करता है, तो उसका परिणाम निरस्त किया जाएगा और उसे एक से तीन वर्ष तक परीक्षा से प्रतिबंधित किया जा सकेगा। संगठित अपराध की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों की संपत्ति भी जब्त की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि परीक्षा से जुड़े किसी अपराध में कोई संस्था या गिरोह दोषी पाया जाता है, तो उसकी संपत्ति कुर्क की जा सकेगी। जांच व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए यह सुनिश्चित किया गया है कि ऐसे मामलों की जांच उप निरीक्षक से नीचे के अधिकारी द्वारा नहीं की जाएगी और आवश्यक होने पर राज्य सरकार विशेष जांच एजेंसी को भी जांच सौंप सकेगी। उन्होंने कहा कि यह कानून केवल दंड देने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के युवाओं के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कानून ईमानदार प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और व्यवस्था में विश्वास बहाल करने में मील का पत्थर साबित होगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक 2026 पारित होने के साथ ही राज्य की भर्ती प्रणाली में बड़ा संस्थागत बदलाव तय हो गया। इस कानून के माध्यम से राज्य में छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल की स्थापना की जाएगी, जो तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती प्रक्रिया को एकीकृत, पारदर्शी और समयबद्ध बनाएगा।
विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने भाषण में युवाओं को केंद्र में रखते हुए कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे अहम है और उनकी सरकार ने पिछले दो वर्षों में भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न विभागों में 32 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है और पारदर्शिता को लेकर ठोस कदम उठाए गए हैं। साथ ही, पूर्व सरकार के दौरान पीएससी भर्ती परीक्षा में हुए भ्रष्टाचार की जांच सीबीआई को सौंपकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के लचर रवैये का सीधा नुकसान युवाओं को उठाना पड़ा। युवाओं ने न केवल सिस्टम पर भरोसा खोया, बल्कि आयुसीमा का नुकसान भी झेला। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इस स्थिति को सुधारते हुए अभ्यर्थियों को आयुसीमा में पांच वर्ष की छूट प्रदान की, ताकि वे फिर से अवसर प्राप्त कर सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी सत्र में उनकी सरकार लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम विधेयक भी लेकर आई, जो अब पारित हो चुका है, जिससे भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और गड़बड़ी करने वाले तत्वों पर सख्ती से नकेल कसी जा सकेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से ही अब कर्मचारी चयन मंडल विधेयक 2026 लाया गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि अभी तक परीक्षाओं के बेहतर प्रबंधन के अभाव में कई विभागों में पांच-पांच साल में एक बार परीक्षा हो पाती थी, जिससे युवाओं को भारी परेशानी होती थी। इस समस्या का समाधान अब कर्मचारी चयन मंडल के गठन से होगा। उन्होंने कहा कि मंडल के गठन के बाद न केवल हर साल परीक्षाएं आयोजित होंगी, बल्कि उन्हें निर्धारित समय पर भी संपन्न कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब परीक्षार्थियों के पास उस वर्ष होने वाली सभी परीक्षाओं का कैलेंडर उपलब्ध होगा, जिससे उन्हें तैयारी में आसानी होगी। साथ ही, परीक्षा शेड्यूल तय होने से एजेंसियों को भी प्रबंधन में सुविधा मिलेगी। नियमित शेड्यूल मिलने से अभ्यर्थी निश्चिंत होकर तैयारी कर सकेंगे और अपनी तैयारी का आकलन भी बेहतर तरीके से कर पाएंगे।
मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया में वर्तमान में मौजूद व्यावहारिक समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग विभागों की वैकेंसी अलग-अलग समय पर निकलने से युवाओं के सामने दुविधा रहती है। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कई पदों की शैक्षणिक योग्यता समान होने के बावजूद अभ्यर्थियों को अलग-अलग आवेदन करना पड़ता है, जिससे समय की बर्बादी होती है और प्रक्रिया जटिल बनती है।
उन्होंने कहा कि हर विभाग की चयन प्रक्रिया अलग होने से अभ्यर्थियों को अलग-अलग तरीके से तैयारी करनी पड़ती है, जिससे उनकी समग्र तैयारी प्रभावित होती है। वहीं भर्ती एजेंसियों पर बार-बार अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित करने का दबाव पड़ता है, जिससे संसाधनों का अधिक खर्च होता है और सार्वजनिक धन का अपव्यय भी होता है। साथ ही नियुक्तियों में अनावश्यक विलंब भी होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कर्मचारी चयन मंडल गठित करने का निर्णय लिया गया है, जिससे प्रतिभागियों को पारदर्शी, निष्पक्ष और न्यायपूर्ण अवसर मिल सकेंगे। उन्होंने बताया कि मंडल के माध्यम से विभिन्न विभागों के साथ-साथ वैधानिक निकाय, मंडल, प्राधिकरण और अन्य संस्थानों की भर्तियां भी शामिल की जाएंगी, जिन्हें समय-समय पर अधिसूचित किया जाएगा। चयन प्रक्रिया का निर्धारण भी मंडल द्वारा किया जाएगा और सरकार तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के पदों के लिए संयुक्त चयन प्रक्रिया भी आयोजित कर सकेगी।
मुख्यमंत्री ने विधेयक के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि मंडल में एक अध्यक्ष और अधिकतम तीन सदस्य होंगे। इसके साथ ही सचिव, परीक्षा नियंत्रक और अन्य अधिकारी-कर्मचारी होंगे तथा व्यावसायिक परीक्षा मंडल के अधिकारी-कर्मचारी भी इसके अंतर्गत माने जाएंगे। मंडल को यह अधिकार होगा कि वह चयन प्रक्रिया के संचालन का दायित्व किसी एजेंसी को सौंप सके। इसके लिए पाठ्यक्रम समिति, परीक्षा समिति और वित्त समिति का गठन भी किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह मंडल राज्य सरकार के सभी विभागों के अधिसूचित तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर सीधी भर्ती की चयन प्रक्रिया आयोजित करेगा। साथ ही वैधानिक निकायों, मंडलों, प्राधिकरणों और अन्य संस्थानों की भर्तियां भी इसके दायरे में आएंगी। मंडल द्वारा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाएं भी आयोजित की जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सभी विभागों की परीक्षाएं एक साथ आयोजित होंगी, तो हर वर्ष बड़ी संख्या में भर्तियां होंगी, जिससे युवाओं का उत्साह बना रहेगा। परीक्षाओं में एकरूपता आएगी और अभ्यर्थी एक ही चयन प्रक्रिया के अनुसार एकाग्रता से तैयारी कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से परीक्षाएं आयोजित होने से पूरी व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य के युवा ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का आधार हैं और उनकी सरकार उन्हें पारदर्शी एवं न्यायपूर्ण वातावरण में अपने सपनों को साकार करने का अवसर देगी। उन्होंने कहा कि यह कानून केवल परीक्षा प्रक्रिया को सरल बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे को वापस लाने का प्रयास है, जिसे पिछली सरकार ने समाप्त कर दिया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार केवल युवाओं के सपनों को ही नहीं तोड़ता, बल्कि ऐसे लोगों को सिस्टम में प्रवेश दिलाता है, जिनका जनसरोकार नहीं होता और जो व्यवस्था को भीतर से कमजोर करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और हर परीक्षा पारदर्शिता के साथ कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में शुचिता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक उपाय सुनिश्चित किए जाएंगे और युवाओं को अधिकतम अवसर देने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत रहेगी।
युवाओं के सपनों का कत्ल करने वाले आज सलाखों के पीछे- सीएम साय
मुंख्यमंत्री ने कहा - कांग्रेस शासन में पीएससी में भ्रष्टाचार कर युवाओं के भविष्य का किया गया सौदा, अब कोई भी युवाओं के भविष्य से नहीं कर पाएगा खिलवाड़, अब कोई भी युवाओं के भविष्य से नहीं कर पाएगा खिलवाड़



