रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धान खरीदी की तारीख बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों छोटे किसानों को अब तक टोकन नहीं मिल पाया है और तय कैटेगरी के कारण करीब 20 प्रतिशत किसान धान नहीं बेच सके हैं। भूपेश बघेल ने कहा कि 29 जनवरी को धान खरीदी समाप्त हो जाएगी, जबकि बड़ी संख्या में किसान अभी भी खरीदी केंद्रों तक नहीं पहुंच पाए हैं। टोकन वितरण में सीमाएं तय कर दी गई हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में किसान हितैषी है, तो उसे धान खरीदी की तारीख बढ़ानी चाहिए। बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा धान खरीदने की नहीं है। पहले किसानों को यूरिया नहीं दिया गया, फिर रकबा गायब कर दिया गया और अब खरीदी की तारीख सीमित की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से आग्रह किया कि किसानों की स्थिति को देखते हुए धान खरीदी की समय-सीमा बढ़ाई जाए, ताकि कोई भी किसान अपनी उपज बेचने से वंचित न रह जाए।
सरकार का दावा- अब तक रिकॉर्ड धान खरीदी, 1.77 करोड़ किसानों को भुगतान, वहीं राज्य सरकार ने धान खरीदी को लेकर रिकॉर्ड आंकड़े पेश किए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार, 13 जनवरी 2026 तक खरीफ मार्केटिंग वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 105.14 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। इस दौरान 1,777,419 किसानों से धान खरीदा गया है और 23,448 करोड़ रुपए सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। सरकार का दावा है कि यह 13 जनवरी तक किसी भी वर्ष में अब तक की सबसे अधिक खरीदी और सबसे ज्यादा भुगतान है।
सीएमओ के मुताबिक, पिछले वर्षों की तुलना में इस साल धान खरीदी और भुगतान दोनों में बड़ा इजाफा हुआ है। खरीफ मार्केटिंग वर्ष 2020-21 में 13 जनवरी तक 72.15 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था और 13,550 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ था। 2021-22 में इसी अवधि तक 68.77 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी, जिसका भुगतान 13,410 करोड़ रुपए था। 2022-23 में 97.67 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया और 20,022 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया था। इन सभी के मुकाबले 2025-26 में आंकड़े सबसे अधिक बताए जा रहे हैं।
सरकार का कहना है कि धान खरीदी में यह बढ़ोतरी पारदर्शी प्रणाली, समय पर भुगतान और किसान-केंद्रित नीतियों का परिणाम है। सीएमओ ने स्पष्ट किया है कि हर योग्य किसान द्वारा उत्पादित हर दाने की खरीदी की जाएगी और भुगतान समय पर किया जाएगा, ताकि किसानों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत हो और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिले। सरकार ने यह भी बताया कि खरीफ मार्केटिंग वर्ष 2024-25 में धान भंडारण में कमी और अनियमितताओं के मामलों में सख्त कार्रवाई की गई। जहां 0.5 से 1 प्रतिशत तक कमी पाई गई, वहां भंडारण केंद्र प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। 1 से 2 प्रतिशत तक कमी वाले मामलों में विभागीय जांच शुरू की गई, जबकि 2 प्रतिशत से ज्यादा कमी पाए जाने पर निलंबन, विभागीय कार्रवाई और आपराधिक स्नढ्ढक्र दर्ज की गई।
सीएमओ के अनुसार, पिछले दो वर्षों में धान खरीदी और भंडारण में लापरवाही को लेकर 33 खाद्य निरीक्षकों और अधिकारियों को नोटिस दिए गए हैं, दो मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है और एक भंडारण केंद्र प्रभारी को निलंबित किया गया है। इसे सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का उदाहरण बताया गया है। सीएमओ ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सरकार के सेंट्रल पूल सिस्टम के तहत चावल उठाव की सीमित क्षमता के कारण पहले खरीदे गए धान के निपटान में समय लगा। फिलहाल खरीफ मार्केटिंग वर्ष 2024-25 के तहत संग्रहित और नीलाम किए गए धान का उठाव जारी है। धान खरीदी की तारीख बढ़ेगी या नहीं, इस पर सरकार की ओर से अभी कोई अंतिम फैसला नहीं आया है।
धान खरीदी की तारीख बढ़ाने की मांग
भूपेश बघेल ने कहा- लाखों किसान टोकन से वंचित, सरकार नहीं खरीदना चाहती धान



