रायगढ़। जिले में नगर निगम की कार्रवाई उस समय विवाद में आ गई, जब निगम अमले ने पट्टा वाली निजी जमीन पर बनी बाउंड्रीवाल को बिना नोटिस तोड़ दिया। इस कार्रवाई से क्षेत्र के लोग आक्रोशित हो गए और मौके पर विरोध शुरू हो गया। जिसके चलते निगम अमले को वापस लौटना पड़ा।
घटना गुरुवार को वार्ड नंबर 38 के देवारपारा इलाके की है। यहां महेंद्र यादव के नाम से आवंटित पट्टा जमीन पर मकान बना हुआ है। परिवार के अनुसार, घर के चारों ओर बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जा रहा था। इसी दौरान जब महेंद्र यादव घर पर मौजूद नहीं थे, तब नगर निगम का अमला मौके पर पहुंचा और बिना कोई पूर्व सूचना या नोटिस दिए बाउंड्रीवाल तोड़ दी। दीवार तोड़े जाने की जानकारी मिलते ही परिवार के सदस्य और आसपास के लोग मौके पर एकत्र हो गए। पूर्व पार्षद समेत मोहल्लेवासियों ने निगम की कार्रवाई को मनमाना बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। हंगामा बढऩे पर पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस जवान मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाइश दी। हालात को देखते हुए निगम अमला कार्रवाई अधूरी छोडक़र लौट गया। पीडि़त परिवार का कहना है कि यदि निगम को किसी प्रकार की आपत्ति थी, तो पहले लिखित नोटिस दिया जाना चाहिए था। बिना सूचना इस तरह की कार्रवाई अनुचित है।
6 फीट जमीन पहले ही दे चुके
महेंद्र यादव की भाभी मीना यादव ने बताया कि यह पूरी तरह निजी पट्टा जमीन है। सडक़ के लिए 4 फीट और नाली के लिए 2 फीट जमीन पहले ही निगम को दी जा चुकी है। इसके बावजूद बिना नोटिस दीवार तोडऩा निगम की मनमानी है। उन्होंने मांग की है कि तोड़ी गई बाउंड्रीवाल का मुआवजा दिया जाए।
बिना नोटिस बाउंड्रीवाल तोडऩा गलत- पूर्व पार्षद
पूर्व पार्षद मुरारी भट्ट ने कहा कि पट्टा वाली निजी जमीन पर बिना नोटिस बाउंड्रीवाल तोडऩा गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि चर्च के पास नजूल जमीन पर बनी दुकानों पर कार्रवाई नहीं हो रही, जबकि निजी जमीन पर निगम कार्रवाई कर रहा है।
निगम का पक्ष नहीं आया सामने
इस मामले में नगर निगम महापौर जीवर्धन चौहान से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हो सका। इस कारण निगम का पक्ष सामने नहीं आ पाया है।
बिना नोटिस दिए पट्टा जमीन की बाउंड्रीवाल तोडऩे का मामला गर्माया
भारी हंगामा के बाद वापस लौटी निगम की तोड़ू टीम



