रायगढ़. 11 सूत्रीय मांग को लेकर सोमवार से शासकीय कर्मचारियों ने कलम बंद, काम बंद हड़ताल शुरू कर दिया है, इससे जहां शासकीय कार्यालयों में काम काज ठप हो गया है तो वहीं इसका असर स्वास्थ्य विभागों पर भी देखने को मिल रहा है, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग नर्स से लेकर बाबू व अन्य अधिकारी भी इस हड़ताल में शामिल हो गए हैं। जिसके चलते अस्पताल में चलने वाली कई सेवाओं को तीन दिन के लिए बंद कर दिया है। ऐसे में अब अस्पतालों में सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं ही चल रही है, जिससे मरीजों को भी परेशान होना पड़ रहा है।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के आव्हान पर सोमवार से तीन दिवसीय हड़ताल शुरू हो गया है, इससे 29, 30 व 31 दिसंबर तक चलने के कारण सोमवार से ही शासकीय कार्यालयों में काम-काज पूरी तरह से ठप रहा, इसके चलते शासकीय कार्यालय पूरी तरह से खाली रहा। वहीं आंदोलन लेकर सभी कर्मचारी व अधिकारी मिनी स्टेडियम में टेंट लगाकर आदोलन शुरू किया है, इस दौरान कर्मचारियों का कहना था कि शासन के समक्ष लगातार अपनी मांगों को रखा जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई निराकरण नहीं होने के कारण फिलहाल तीन दिवसीय आंदोलन किया जा रहा है, इसके बाद भी मांगों पर विचार नहीं हुआ तो यह आंदोलन आगे भी बढ़ सकता है। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना था कि मोदी की गारंटी के तहत 11 मांगे लंबे से समय लटका हुआ है, जिसमें 1 केंद्र के समान महंगाई भत्ता कर्मचारी एवं पेंशनरों को देय तिथि से, डीए एरियस की राशि कर्मचारियों के जीपीएफ खाते में समायोजित करना, सभी कर्मचारियों को चार स्तरीय समयमान वेतनमान दिया जाए, लिपिको, शिक्षकों, स्वास्थ्य विभाग, महिला बाल विकास सहित विभिन्न संवर्गो का वेतन विसंगति दूर करने, पिंगुआ कमेटी का रिपोर्ट सार्वजनिक किया जाए, प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना करते हुए संपूर्ण लाभ दिया जाए, पंचायत सचिवों का शासकीयकरण किया जाए, सहायक शिक्षकों एवं पशु चिकित्सा अधिकारियों को तृतीय समय मान वेतनमान दिया जाए। नगरीय निकाय के कर्मचारियों का नियमित मासिक वेतन एवं समय बद्ध पदोन्नति किया जाए, अनुकंपा नियुक्ति नियमों में 10त्न का सीलिंग शीथलीकरण किया जाए, प्रदेश में कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू हो, अर्जित अवकाश का नगदी करण 300 दिन किया जाए, दैनिक अनियमित संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए तथा सभी विभागों में समानता लाते हुए सेवानिवृत्ति 65 वर्ष किया जाए। हालांकि यह सभी मांग चुनाव के समय मोदी के गारंटी के तहत था, लेकिन इतने दिनों तक इस मांगों पर विचार नहीं होने के कारण आंदोलन शुरू किया गया है, ऐसे में अगर इस तीन दिनों में मांगों पर विचार नहीं होता है तो यह आंदोलन आगे भी बढ़ सकता है।
स्वास्थ्य विभाग पर दिखा असर
उल्लेखनीय है कि इस अंदोलन के चलते शासकीय अस्पताल के नर्स से लेकर फार्माशिस्ट, व बाबू तक सभी लोग हड़ताल पर चले गए हैं। इसके चलते जिला अस्पताल में ही नसबंदी से लेकर मोतियाबिंद व अन्य आपरेशन को तीन दिन के लिए बंद किया गया है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि अब अस्पताल में नर्स व अन्य स्टाफ नहीं होने के चलते सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं ही चल रही है। हालांकि इमरजेंसी सवाओं के लिए जिला अस्पताल में जेडीएस कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है, लेकिन इनकी संख्या बहुत कम होने के कारण इमरजेंसी सेवाए ही चल पा रही है।
सोमवार को वापस लौटे मरीज
ठंड के मौसम को देखते हुए जिला अस्पताल में मोतियाबिंद, नसबंदी व अन्य सर्जरी शुुरू की गई थी, जिसके चलते यहां हर दिन दर्जनों की संख्या में आपरेशन हो रहा था, ऐसे में कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के कारण आई वार्ड व सर्जरी वार्ड सोमवार को पूरी तरह से खाली रहा। इस दौरान कई मरीज नसबंदी व मोतियाबिंद आपरेशन के लिए पहुंचे थे, लेकिन यहां आने के बाद उनको तीन दिन के बाद बुलाया गया है, ऐसे में अधिकारियों का कहना है कि जब तक कर्मचारी हड़ताल से नहीं लौटेंगे तब तक सर्जरी होना संभव नहीं है, इसके चलते ग्रामीण क्षेत्र से आए मरीजों को काफी परेशान होना पड़ा।
शासकीय विभाग भी रहा सूना
सोमवार को कलेक्टोरेट के लगभग सभी विभाग सूना रहा, इस दौरान ग्रामीण व शहरी क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे, लेकिन आफिसों में कर्मचारियों के नहीं होने से उनको बैरंग लौटना पड़ा। ऐसे में पूरे दिन आफिसों में विरानी छाई रही। वहीं बताया जा रहा है कि फिलहाल 31 दिसंबर तक यही स्थिति बने रहने की संभावना है, लेकिन अगर यह आंदोलन आगे बढ़ा तो लोागें को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।



