धरमजयगढ़। जिले में उद्योगों सहित अन्य परियोजनाओं की स्थापना और विस्तार तेजी से हो रहा है। विकास की इस दौड़ में सामूहिक संसाधनों के अनुचित दोहन करने जैसे गंभीर मसले का भी शायद कोई मतलब नहीं रह गया है। अधिकारियों द्वारा गंभीर अनियमितता पर कार्रवाई तो दूर बल्कि त्वरित संज्ञान लेने से भी परहेज किया जा रहा है। एक ऐसा ही मामला धरमजयगढ़ क्षेत्र में सामने आया है। भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत सडक़ निर्माण कार्य के क्रियान्वयन एजेंसी दिलीप बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी प्रबंधन पर अमृत सरोवर तालाब से मिट्टी का अनुचित दोहन करने के गंभीर आरोप लगे हैं। डीबीएल कंपनी ने अमृत सरोवर तालाब से मिट्टी खनन किया है जिससे अमृत सरोवर तालाब का स्वरूप बिगड़ गया है।
मिली जानकारी के अनुसार सिसरिंगा ग्राम पंचायत में अमृत सरोवर तालाब का निर्माण किया गया है। इस क्षेत्र से होकर भारतमाला सडक़ गुजर रही है। स्थानीय लोगों ने बताया है कि डीबीएल कंपनी द्वारा एक स्थानीय किसान के निजी भूमि से मिट्टी खनन कर सडक़ निर्माण कार्य में डाला जा रहा था। उस जमीन के पास ही अमृत सरोवर तालाब बनाया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि मना करने के बाद भी डीबीएल कंपनी द्वारा निजी भूमि के साथ लगे हुए अमृत सरोवर तालाब में खनन किया गया और तालाब की मिट्टी को सडक़ निर्माण में लगाया गया है। पंचायत की ओर से धरमजयगढ़ एसडीएम और सीईओ को इस आशय की लिखित जानकारी दी गई है।
सिसरिंगा गांव में अमृत सरोवर योजना के तहत बनाए गए सरकारी तालाब के मूल स्वरूप को कथित तौर पर विकृत किए जाने के इस मामले में हफ्ते भर बीत जाने के बाद भी किसी तरह की कार्रवाई की बात सामने नहीं आई है। पंचायत प्रतिनिधि द्वारा की गई शिकायत के दस्तावेज अन्य फाइलों की ढेर में शायद कहीं दबे हुए हैं। ग्राम पंचायत के सरपंच ने बताया कि अब तक उनकी शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। केंद्र सरकार की अमृत सरोवर योजना का लक्ष्य तालाबों को उनका मूल स्वरूप लौटना है।
अमृत सरोवर का स्वरूप बिगाडऩे के मामले पर कार्रवाई नहीं, फाइलों में दबी शिकायत!



