रायगढ़। ट्रांसपोर्टनगर बस स्टैंड को संवारने के लिए सालों से लोगों की मांग उठ रही है, लेकिन हर साल इसका प्रस्ताव तो तैयार होता है, लेकिन फाइलों में ही कैद होकर रह जाता है। ऐसे में यहां से सफर करने वाले यात्री हर मौसम में परेशानियों के बीच सफर कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी न तो जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे हैं और न ही अधिकारी, जिसके चलते काफी समस्या हो रही है।
उल्लेखनीय है कि विगत 12 साल पहले शहर के बीच से स्थित सारंगढ़ बस स्टैंड को यह बोलकर ट्रांसपोर्टनगर में शिफ्ट किया गया था कि यहां पूरी सुविधाओं के साथ बसों का संचालन होगा, लेकिन सालों बित जाने के बाद भी अभी तक न तो यहां व्यवस्थित तरीके से यात्रियों को बैठने के लिए शेड बन पाया और न ही अन्य सुविधा, जिसके चलते यहां से सफर करने वाले यात्री हर मौसम में परेशान होते रहते हैं। वहीं स्थानीय लोगों द्वारा लगातार मांग की जा रही है, लेकिन हर हमेशा सरकार तो बदलती है, लेकिन यहां की सुविधाएं जस की तस बनी हुई है। ऐसे में पूर्व की कांगे्रस सरकार के समय भी इस बस स्टैँड को सुधारने के लिए निगम द्वारा कई बार प्रस्ताव तैयार किया गया, लेकिन यह प्रस्ताव सिर्फ कागजों में सीमट कर रह गया। वहंीं पिछली महापौर जानकी काटजू द्वारा बस स्टैंड के कायाकल्प के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था, जिससें आश्वासन भी मिला था, लेकिन यह आश्वासन भी कोरा कागज साबित हो गया, उसके बाद सरकार बदलने के बाद यह मामला ही ठडे बस्ते में चला गया। इसके चलते इन दिनों जिले में पड़ रही कडकड़़ाती ठंड में जहां लोग शाम होते ही घर पहुंच जा रहे है, वहीं ट्रांसपोर्टनगर बस स्टैंड से सफर करने वाले यात्री देर शाम तक खुले में बैठने को मजबूर हो रहे हैं और ठिठुरते हुए बसों के इंतजार करते नजर आ रहे हैं। ऐसे में यात्रियों का कहना है कि ट्रांसपोर्टनगर बस स्टैंड में एक छोटा शेड तो है, लेकिन चारों तरफ से खुला होने के कारण इन दिनों चल रही ठंडी हवा के चलते यहां बैठना काफी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में अब यहां संचालित हो रहे होटलों में बैठकर बसों का इंतजार करना पड़ता है।
30 से 40 बसों का हर दिन होता है संचालन
ट्रांसपोर्टनगर बस स्टैंड से हर दिन 30 से 40 बसों का संचालन होता है। इसके चलते सुबह से ही पूरे दिन यात्रियों की भीड़ लगी रहती है। वहीं रात के समय दूर-दराज के बसें तो पहुंचती है, लेकिन सुविधा के अभाव में रात के समय यात्री बसों का इंतजार नहीं करते हैं। जिससे शाम को यहां आने वाले यात्रियों को दूसरे दिन ही जाना पड़ता है, ऐसे में रात के समय होटल व लॉज का सहारा लेना पड़ता है।
जनप्रतिनिधि भी नहीं दे रहे ध्यान
इस सब स्टैंड को संवारने के लिए अब जनप्रतिनिधि भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिसके चलते सालों से लटका हुआ है। ऐसे में हर बार नए साल का बजट आने पर लोगों को उम्मीद रहती है कि इस बार इस बस स्टैंड का दिन बहुरेंगे, लेकिन देखते ही देखते साल निकल जाता है और स्थिति जस की तस रह जाती है, इससे सालों से यात्री परेशान हो रहे हैं। साथ ही यहां से चलने वाले बस संचालकों को भी नुकसान होता है। क्योंकि अगर यह बस स्टैंड व्यवस्थित रहता तो रात में भी यहां से सवारी मिलती, जिससे उनको भी फायदा होता।
अलाव जलाकर निगम ने झाड़ लिया पल्ला
उल्लेखनीय है कि जिले में पड़ रही भीषण ठंड को देखते हुए नगर निगम द्वारा यहां अलाव की व्यवस्था कर पल्ला झाड़ लिया है। लेकिन बात यह है कि अलाव से ही यात्रियों को राहत नहीं मिलने वाली है, जब तक यहां बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था के साथ सुरक्षा व्यवस्था न हो, लेकिन इसके लिए न तो निगम ध्यान दे रहा है और न ही जनप्रतिनिधि, ऐसे में सालों से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।



