भारतीय जीवन दर्शन का मूल भारत की अध्यात्म परंपरा में हैं : प्रो. सौरभ सराफ

दिल्ली विश्वविद्यालय से सौरभ सराफ विषय विशेषज्ञ के रूप में हुए शामिल
शासकीय महाविद्यालय घरघोड़ा में एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न
भारतीय ज्ञान परंपरा व राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर विषय पर कार्यशाला सम्पन्न
घरघोड़ा। जिले के शासकीय महाविद्यालय घरघोड़ा में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न हुई। इस कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप में देश के प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय, मोतीलाल नेहरू महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक हिंदी के रूप में पदस्थ सौरभ सराफ शामिल हुए। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पवन कुमार अग्रवाल के कुशल मार्गदर्शन एवं विभागाध्यक्ष हिंदी डॉ. चन्द्रशेखर सिंह, आई क्यू ए सी प्रभारी डॉ. श्रुति श्रीवास्तव एवं डॉ. युगल किशोर चंद्रा के निर्देशन में यह कार्यशाला सम्पन्न हुई। कार्यशाला का विधिवत आरम्भ माता सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ तत्पश्चात विषय विशेषज्ञ सौरभ सराफ का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने इस अवसर पर बीज वक्तव्य देते हुए कार्यशाला की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्वयन पिछले वर्ष से शुरू हुआ है ऐसे में इसकी विभिन्न अवधारणाओं को अच्छे से जानना समझना हमारे लिए अनिवार्य है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति और उसके मूल में स्थित भारतीय ज्ञान परंपरा को विस्तृत रूप से समझने के लिये इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है। महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. युगल किशोर चंद्रा का स्वागत भाषण हुआ उन्होंने कहा कि यह हमारे महाविद्यालय के लिए गर्व का विषय है कि दिल्ली विश्वविद्यालय से विषय विशेषज्ञ के रूप में सौरभ जी का आगमन हुआ है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति विषय को प्रासंगिक सिद्ध करते हुए इस पर समय समय पर अनेक कार्यक्रम करवाने की बात कही। डॉ. चंद्रा के भाषण उपरांत विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित सौरभ सराफ ने अपने विचार रखे। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के केंद्र में भारतीय ज्ञान परंपरा ही है। भारतीयों में राष्ट्रबोध जगाने व प्रत्येक नागरिक के हृदय में राष्ट्रीयता के भाव को जागृत करना आज अत्यावश्यक है। राष्ट्रबोध की कमी के कारण भारत को जैसे लगभग 900 वर्षों की गुलामी झेलनी पड़ी ऐसी परिस्थिति दुबारा उत्पन्न न हो इसके लिए भारत के मूल से जुडऩा जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा की जड़ें बहुत गहरी है भारत किसी एक निश्चित दिन में उत्पन्न राष्ट्र नहीं है अपितु वह आध्यात्मिक परंपरा का विकास है जिसे बनाने में संतों, ऋषियों व ज्ञानियों ने अपना योगदान किया है। भारत की वास्तविक पहचान पतंजलि, आर्यभट्ट, वराह मिहिर, सुश्रुत, चरक जैसे अनेकानेक विभूतियों से एवं तक्षशिला व नालंदा जैसे शिक्षा केंद्रों से है। लेकिन राष्ट्रभाव की कमी के कारण मु_ी भर अंग्रेजों ने भारतीय सभ्यता संस्कृति पर कुठाराघात करते हुए इसे पश्चिम के अंधानुकरण की ओर मोडक़र रख दिया था मैकाले की शिक्षा पद्धति ने वैभवशाली भारतीय शिक्षा पद्धति को बहुत अधिक नुकसान पहुँचाया परिणामत: भारत अंग्रेजों का गुलाम बना और आजादी के साथ भारत का विभाजन हो गया। श्री सौरभ सराफ ने कहा कि देश विभाजन का यथार्थ, सिक्ख गुरूओं का बलिदान जैसा विषय जो अबतक पाठ्यक्रमों में सतही स्तर पर मौजूद था राष्ट्रीय शिक्षा नीति और ज्ञान परंपरा के कारण ऐसे विषयों को पाठ्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। उन्होंने कहा कि गुलामी और विभाजन जैसी परिस्थिति फिर न उत्पन्न हो इसलिए हमें भारतीय ज्ञान परंपरा और भारत के वास्तविक ज्ञान को जानने की आवश्यकता है। आगे उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में जहाँ विश्व की आर्थिक महाशक्तियां विभिन्न प्रकार से दबाव की राजनीति कर रही हैं ऐसे में भारत को राष्ट्रीय एकता का उदाहरण पूरे विश्व के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य है। देश में आज अनेक प्रकार की आंतरिक बाह्य चुनौतियां मौजूद है जो भारत को कमजोर करने के लिए निरन्तर प्रयासरत है लेकिन हम चूंकि शिक्षा जगत से जुड़े हुए लोग हैं इसलिए हमारा यह नैतिक दायित्व है कि हम इन षड्यंत्रों में आम जनमानस को न उलझने दें और उन्हें वास्तविक परिस्थितियों से अवगत कराते रहें। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत की बढ़ती सैन्यशक्ति का भी उल्लेख किया। श्री सौरभ ने इस अवसर पर कहा कि आज का दौर सजग रहने का दौर है, अपनी विशिष्टाओं को जानने और कमियों को निरन्तर दूर कर आगे बढऩे का दौर है और इस समय में विश्व के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढऩे में हमारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति का बहुत बड़ा योगदान होने वाला है क्योंकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति व भारतीय ज्ञान परम्परा की शाखाएँ बहुत व्यापक परिधि में फैली हुई है जो दर्शन, विज्ञान, गणित, साहित्य, चिकित्सा इत्यादि अनेक विषयों को अपने से जोड़ती है इसलिए ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर कार्यशाला का होना इस क्षेत्र के विद्यार्थियों में ज्ञान की एक नवीन ज्योति जलाने में सहायक होगी। उन्होंने इस महत्वपूर्ण कार्यशाला के लिए पूरे महाविद्यालय परिवार को बधाई दी। अंत में आई क्यू ए सी प्रभारी डॉ.श्रुति श्रीवास्तव ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सौरभ सराफ जी ने बड़ी सरलता से इस जटिल विषय को हमारे विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत किया है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान परंपरा का सूक्ष्म विवेचन करते हुए विस्तृत रूप से पूरे विषयवस्तु को अलग अलग रोचक उदाहरणों के माध्यम से व्यक्त किया है इसलिए पूरे महाविद्यालय परिवार को ओर से उनका आभार व्यक्त करते हैं। इस कार्यशाला में महाविद्यालय में पदस्थ सहायक प्राध्यापक अदिति गौतम, डॉ. रेणु कुजूर, संतोष कुमार देवांगन, नीलकमल निराला, अजय कुमार, विभीषण सिदार, चन्द्रमणि पैंकरा, भोजकुमारी पटेल के साथ ही बी ए, बी कॉम एवं बी एस सी के विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही।