रायपुर। सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन के मौके पर दूर-दराज इलाकों से आई बहनें अपने भाइयों को राखी बांधने पहुंची। चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच जेल के भीतर करीब 1500 बहनों ने अपनी भाइयों की कलाइयों पर राखी बांधी। इस दौरान चेहरों पर मुस्कुराहट के साथ आंखों में आंसू भी दिखे। जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने बताया कि रक्षाबंधन के लिए दो दिन पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। 500 से ज्यादा बहनों ने राखी से एक दिन पहले ही मुलाकात के लिए रजिस्ट्रेशन करा लिया था। वहीं, किसी भी बहन की उसकी भाई से मुलाकात छूट न जाए, इसका ध्यान रखते हुए रक्षाबंधन के दिन भी सुबह से ही पंजीयन की प्रक्रिया जारी रखी गई। जेल में शाम 5 बजे तक बहनों की अपने भाइयों से मुलाकात का दौर चलता रहा। इस दौरान सुरक्षा में कोई कोताही न हो इसका भी विशेष ध्यान रखा गया था। जेल परिसर में फोर लेयर की सुरक्षा व्यवस्था थी। पहला सिक्योरिटी चेक एंट्रेंस गेट पर किया गया। सेकेंड लेयर में मुलाकात के लिए आए लोगों के रजिस्ट्रेशन का क्रॉस वेरिफिकेशन किया गया। थर्ड में साथ लाए गए मिठाई के डिब्बों की जांच हुई। आखिरी लेयर में फ्रिस्किंग यानी बॉडी स्कैनिंग की गई। इसके बाद ही बहनों को जेल के भीतर दाखिल किया गया। जेल के भीतर माहौल काफी इमोशनल था। बहनें, भाइयों के साथ ज्यादा से ज्यादा बिताना चाहती थीं। साल भरकर की मुलाकात को कुछ मिनटों में समेटना मुश्किल था। जेल से बाहर निकलते वक्त बहनों के चेहरों पर भाइयों से मिलने का सुकून और खुशी आसानी से परखी जा सकती थी। लेकिन आंखों की नमी भाइयों से विरह का दुख भी बयां कर रही थीं। पढि़ए भाइयों से मिलने के बाद बहनों ने क्या कहा- सोनी(राइट साइड) अपनी छोटी बहन के साथ भाई से मिलने पहुंची। सोनी ने बताया- महीने भर पहले ही भाई जेल गया है। इस बार उससे मुलाकात ही मेरी राखी का उपहार था। सोनी(राइट साइड) अपनी छोटी बहन के साथ भाई से मिलने पहुंची। सोनी ने बताया- महीने भर पहले ही भाई जेल गया है। इस बार उससे मुलाकात ही मेरी राखी का उपहार था। आरती (लेफ्ट साइड) अपनी दोनों बहनों के साथ भाई से मिलने पहुंची। आरती ने बताया- भाई पांच महीने से जेल में है। अपने भतीजी-भतीजों से भी मिलना चाहता था। कह रहा था कि जेल से बाहर आना चाहता हूं। वो बहुत दुखी था, लेकिन जब हम मिले तो उसके चेहरे पर थोड़ी खुशी लौट आई। आरती (लेफ्ट साइड) अपनी दोनों बहनों के साथ भाई से मिलने पहुंची। आरती ने बताया- भाई पांच महीने से जेल में है। अपने भतीजी-भतीजों से भी मिलना चाहता था। कह रहा था कि जेल से बाहर आना चाहता हूं। वो बहुत दुखी था, लेकिन जब हम मिले तो उसके चेहरे पर थोड़ी खुशी लौट आई। खुशी और भावना धीवर दोनों बहनें भाई से मुलाकात करने पहुंची। भाई पिछले कुछ सालों से जेल में है। भावना ने बताया- पहली बार भाई से मिलने जेल आई। वो हर बार जेल आने से मना कर देता था। लेकिन इस बार हम दोनों बहनों से रहा नहीं गया। हमसे मिलकर वो बहुत खुश हुआ। खुशी और भावना धीवर दोनों बहनें भाई से मुलाकात करने पहुंची। भाई पिछले कुछ सालों से जेल में है। भावना ने बताया- पहली बार भाई से मिलने जेल आई। वो हर बार जेल आने से मना कर देता था। लेकिन इस बार हम दोनों बहनों से रहा नहीं गया। हमसे मिलकर वो बहुत खुश हुआ। जेल अधीक्षक क्षत्री ने बताया कि जिन भाइयों की बहनें नहीं आ पाईं या जिनकी बहनें नहीं हैं। उनके लिए भी राखी से पहले विशेष कार्यक्रम रखा गया। इस दौरान ब्रम्हाकुमारी और गायत्री परिवार की बहनें और सेंट्रल जेल रायपुर पहुंची और कैदियों को राखी बांधी।
राखी बांधने सेंट्रल जेल में पहुंचीं 15 सौ से अधिक बहनें
फोर लेयर सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई मुलाकात

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lochan Gupta

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