छाल। एसईसीएल की छाल खदान के प्रस्तावित विस्तार को लेकर क्षेत्र में ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच मतभेद सामने आए हैं। गुरुवार को ग्राम बांधापाली में आयोजित बैठक में भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रभावित ग्रामीणों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगें प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन के सामने रखीं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित सहमति नहीं बनती, तब तक खदान विस्तार को स्वीकार करना संभव नहीं होगा।
बैठक में प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की ओर से वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। एसडीओपी खरसिया सतीश भार्गव, तहसीलदार छाल लोमेश मीरी, एसईसीएल रायगढ़ के जीएम मनोज सिंह, छाल सब एरिया मैनेजर केसी सुरेंद्रनाथ और थाना प्रभारी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि बैठक में शामिल हुए। जनप्रतिनिधियों और अधिवक्ताओं ने भी ग्रामीणों की ओर से विभिन्न मुद्दे अधिकारियों के सामने रखे और लंबित मामलों के समाधान की मांग की।
बैठक के दौरान भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों के साथ मुआवजा वितरण, पुनर्वास और रोजगार के मुद्दे प्रमुखता से उठे। ग्रामीणों ने इन समस्याओं को लंबे समय से लंबित बताते हुए कहा कि खदान विस्तार की प्रक्रिया आगे बढऩे से पहले प्रभावित परिवारों के अधिकारों और हितों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होना जरूरी है। ग्रामीणों की ओर से प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन के सामने 10 सूत्रीय मांग-पत्र रखा गया। ग्रामीणों का कहना था कि पहले भी कई मामलों में आश्वासन दिए गए, लेकिन सभी समस्याओं का समाधान जमीन पर नहीं हो पाया। इसी वजह से अब वे केवल मौखिक आश्वासन के बजाय मांगों पर ठोस कार्रवाई और लिखित सहमति चाहते हैं। बैठक में प्रशासन और प्रबंधन की ओर से ग्रामीणों की समस्याओं को सुनते हुए नियमानुसार समाधान का भरोसा दिए जाने की बात सामने आई। हालांकि, चर्चा के बावजूद पहले दिन किसी भी बिंदु पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। इसके चलते खदान विस्तार को लेकर स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित खदान विस्तार का असर उनके जीवन, आजीविका और पर्यावरण पर पड़ेगा। ऐसे में भूमि अधिग्रहण और विस्थापन से जुड़े मामलों का समाधान, उचित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में किए गए कुछ वादों का अपेक्षित रूप से पालन नहीं हुआ, जिसके कारण उनके बीच असंतोष बना हुआ है।
बैठक के दौरान ग्रामीणों का रुख सख्त रहा। उनका कहना था कि जब तक लंबित मांगों पर संतोषजनक समाधान नहीं निकलता, तब तक खदान विस्तार की प्रक्रिया को लेकर उनकी आपत्तियां बनी रहेंगी। दूसरी ओर प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की ओर से बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। मामले में 29 सितंबर की तारीख को ग्रामीणों ने महत्वपूर्ण बताया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ तो 29 सितंबर को प्रस्तावित खदान विस्तार के दौरान व्यापक विरोध किया जाएगा। इस चेतावनी के बाद प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन के सामने ग्रामीणों की मांगों पर समाधान निकालने की चुनौती बढ़ गई है।
छाल खदान विस्तार पर टकराव, 10 सूत्रीय मांगों पर अड़े ग्रामीण, 29 सितंबर को विरोध की चेतावनी



