41वें चक्रधर समारोह की 9वीं सांस्कृतिक संध्या पर सारंगढ़ की शार्वी केशरवानी ने कथक की प्रस्तुति दी। उन्होंने महादुर्गा, महासरस्वती और महाकाली के स्वरूपों को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। इसके साथ तोड़े, टुकड़े, परन, लड़ी और तिहाइयों की प्रस्तुति दी। शार्वी पिछले 12 वर्षों से कथक का प्रशिक्षण ले रही हैं। गुरु डॉ. तोषी गुप्ता और डॉ. राजश्री नामदेव के मार्गदर्शन में वे कथक सीख रही हैं। वे चक्रधर समारोह के 2023 और 2024 में भी प्रस्तुति दे चुकी हैं।
नन्हीं नृत्यांगना आशिका सिंघल ने बिखेरा कथक का रंग

41वें चक्रधर समारोह में 8 वर्षीय बाल नृत्यांगना आशिका सिंघल की कथक प्रस्तुति कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही। आशिका ने ‘जय-जय जगतजननी देवी…’ स्तुति से प्रस्तुति की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कथक के तोड़ा 50 चक्कर, टुकड़ा, आमद और तत्कार की मनमोहक प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रस्तुति के अगले चरण में आशिका ने श्रीकृष्ण और राधा-रानी के होली-रास पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। भाव-भंगिमाओं, लय और ताल के सुंदर समन्वय ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
राजकुमार कॉलेज, रायपुर की कक्षा तीसरी की छात्रा आशिका ने 4 वर्ष की आयु से कथक प्रशिक्षण प्रारंभ किया है। वे अपनी गुरु सुश्री नेहा सिंह के मार्गदर्शन में कथक की साधना कर रही हैं। आशिका पावस प्रसंग, राज्योत्सव और 40वें चक्रधर समारोह जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर भी प्रस्तुति दे चुकी हैं।
छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति में ‘लहर गंगा’ ने बांधा समां

41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह की 9वीं सांस्कृतिक संध्या में छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोक सांस्कृतिक संस्था ‘लहर गंगा’ ने अपनी मनोहारी प्रस्तुति से दर्शकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और लोक परंपराओं से रूबरू कराया। संस्था के संचालक एवं निर्देशक श्री पुरानिक साहू के नेतृत्व में कलाकारों ने नृत्य, गीत और संगीत के माध्यम से प्रदेश की लोक विधाओं का आकर्षक मंचन किया। ‘लहर गंगा’ की प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ के लोक जीवन के विविध रंग देखने को मिले। कलाकारों ने गौरी-गौरा, जस जंवारा, पंथी, पंडवानी, राऊत नाचा, सुवा, कर्मा और ददरिया जैसी पारंपरिक लोक विधाओं की मनोहारी झलक प्रस्तुत की। अलग-अलग लोक नृत्यों और गीतों के माध्यम से कलाकारों ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, ग्रामीण जीवन और लोक परंपराओं को मंच पर जीवंत कर दिया। ‘लहर गंगा’ की प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू, लोक जीवन की सहजता और पारंपरिक कला की विविधता एक साथ नजर आई। संस्था के कलाकारों ने अपनी ऊर्जा और सधे हुए मंचीय प्रदर्शन से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। प्रस्तुति के दौरान छत्तीस दलों वाला पुष्प कमल भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। बालोद जिले के धनेली स्थित लोक कला ग्राम से जुड़ी ‘लहर गंगा’ लंबे समय से छत्तीसगढ़ की लोक सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और मंचीय स्वरूप में प्रस्तुत करने का कार्य कर रही है। संस्था की प्रस्तुतियां छत्तीसगढ़ के साथ ही महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, मध्यप्रदेश, असम, बिहार और हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में हो चुकी हैं।
जिज्ञासा दुबे ने दी कथक की प्रस्तुति

41वें चक्रधर समारोह की 9वीं सांस्कृतिक संध्या में 9 वर्षीय बाल कलाकार जिज्ञासा दुबे ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। जिज्ञासा ने अपनी आकर्षक प्रस्तुति से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। कम उम्र में ही राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में कई पुरस्कार हासिल कर चुकी जिज्ञासा के लिए चक्रधर समारोह के प्रतिष्ठित मंच पर प्रस्तुति देना खास अवसर रहा।
कवर्धा के मनीष चंद्रवंशी ने दी तबला वादन की प्रस्तुति

रायगढ़। 41वें चक्रधर समारोह की सांस्कृतिक संध्या में कवर्धा जिले के ग्राम खरहट्टा निवासी मनीष कुमार चंद्रवंशी ने तबला वादन की प्रस्तुति दी। उनके वादन में लय और ताल का सुंदर मेल देखने को मिला। मनीष ने 8 वर्ष की उम्र से तबला सीखना शुरू किया। उन्होंने गुरु डॉ. हरिओम हरि से तबले की शिक्षा ली और इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से प्रथम श्रेणी में मास्टर ऑफ तबला की उपाधि प्राप्त की। वे कई प्रतिष्ठित मंचों पर तबला वादन कर चुके हैं। वर्तमान में चक्रधर कला एवं संगीत महाविद्यालय, रायगढ़ में तबला गुरु के रूप में 50 से अधिक शिष्यों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
वेदिका सोनी ने भरतनाट्यम से बिखेरी प्रतिभा

रायगढ़। 41वें अंतरराष्ट्रीय चक्रधर महोत्सव के मंच पर नन्हीं बाल कलाकार कुमारी वेदिका सोनी ने अपने मनोहारी भरतनाट्यम से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। महज 8 वर्ष की उम्र में वेदीका ने अपनी नृत्य प्रतिभा, भावाभिव्यक्ति और लयबद्ध प्रस्तुति से शास्त्रीय नृत्य के प्रति अपने समर्पण का परिचय दिया।
कक्षा 4 की छात्रा वेदिका ने 6 वर्ष की आयु में भरतनाट्यम का प्रशिक्षण प्रारंभ किया। पिछले दो वर्षों से वे निरंतर अभ्यास और गुरुजनों के मार्गदर्शन में इस शास्त्रीय नृत्य शैली की बारीकियां सीख रही हैं। उन्हें गुरु श्रीमती कृपा वंजारी के मार्गदर्शन तथा डॉ. रतीश बाबू के सान्निध्य में प्रशिक्षण प्राप्त हो रहा है। कम उम्र में ही वेदीका ने देशभर के विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उन्होंने ऑल इंडिया डांसर्स एसोसिएशन प्रतियोगिता, कलावंत, प्रणवम् महोत्सव, देश राग, नटरंग सहित अनेक राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों में सहभागिता कर अपनी कला का प्रदर्शन किया है।
अरण्या गोयल ने पेश किया कथक

रायगढ़। 41वें चक्रधर समारोह में रायगढ़ की सुश्री अरण्या गोयल ने पारंपरिक कथक की प्रस्तुति दी। उन्होंने भगवान गणेश की आराधना से नृत्य की शुरुआत की। गुरु शरद वैष्णव के निर्देशन में हुई प्रस्तुति में कथक की पारंपरिक शैली और लय-ताल देखने को मिली। अरण्या श्री वैष्णव संगीत महाविद्यालय, राजापारा में कथक का प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने अमृत ध्वनि बिलासपुर, खनक उत्सव जबलपुर, राज्योत्सव और विरासत बिलासपुर सहित विभिन्न मंचों पर कथक की प्रस्तुति दी है।
आंचल पाण्डेय की भावपूर्ण प्रस्तुति में दिखा भक्त और भगवान का अटूट विश्वास

रायगढ़। 41वें अंतरराष्ट्रीय चक्रधर महोत्सव के मंच पर ओडिसी एवं कथक नृत्य साधिका सुश्री आंचल पाण्डेय ने ‘मनौधारण’ प्रस्तुति के माध्यम से भक्त और भगवान के अटूट विश्वास को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने गज्ज उद्धार और द्रौपदी उद्धार के पौराणिक प्रसंगों को ओडिसी नृत्य की सुंदर भावाभिव्यक्ति से मंच पर साकार किया। प्रस्तुति में गज द्वारा संकट की घड़ी में भगवान को पुकारने और द्रौपदी द्वारा श्रीकृष्ण का स्मरण करने के प्रसंगों के माध्यम से यह भाव उभरा कि जब भक्त पूरी आस्था के साथ अपने आराध्य को पुकारता है, तो परमात्मा उसकी रक्षा के लिए आगे आते हैं। आंचल की भावाभिव्यक्ति, नृत्य मुद्राओं और लयबद्धता ने पौराणिक प्रसंगों को जीवंत कर दिया और दर्शक भाव-विभोर हो उठे।
आंचल पाण्डेय ने कथक की शिक्षा गुरु वसंती वैष्णव, पद्मश्री पंडित रामलाल बरेठ एवं पंडित भूपेंद्र बरेठ से तथा ओडिसी नृत्य की साधना गुरु डॉ. गजेन्द्र पण्डा के मार्गदर्शन में की है। उन्होंने देश के विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों के साथ जापान, मलेशिया, सिंगापुर, बहरीन, दक्षिण कोरिया, दुबई और उत्तर अफ्रीका सहित कई देशों में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियां दी हैं। उनकी कला-साधना के लिए उन्हें छत्तीसगढ़ रत्न अवॉर्ड, कला विद्या सम्मान और नृत्यश्री राष्ट्रीय अवॉर्ड सहित अनेक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
मासूम अरुषि ने कथक की प्रस्तुति से बांधा समां

रायगढ़। 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह की सांस्कृतिक संध्या में 9 वर्षीय कथक नृत्यांगना अरुषि अग्रवाल ने कथक की सुंदर प्रस्तुति दी। श्रीमती तब्बू प्रवीण के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं अरुषि ने भावपूर्ण अभिव्यक्ति, लय और ताल के साथ अपनी कला का प्रदर्शन किया। कम उम्र में ही अरुषि विभिन्न सांस्कृतिक मंचों पर प्रस्तुति दे चुकी हैं। उन्होंने रायगढ़, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और ग्वालियर में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है। चक्रधर समारोह के मंच पर उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
8 वर्षीय मानवी ने कथक से बिखेरी प्रतिभा

रायगढ़। 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह की सांस्कृतिक संध्या में 8 वर्षीय बाल कलाकार मानवी अग्रवाल ने कथक की सुंदर प्रस्तुति दी। महज 4 वर्ष की उम्र से श्रीमती तब्बू परवीन के मार्गदर्शन में कथक सीख रहीं मानवी ने अपनी ऊर्जा, ताल और भावपूर्ण नृत्य से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। मानवी कथक के साथ हूला हूप डांसिंग में भी निपुण हैं। वे चक्रधर समारोह, राज्योत्सव, प्रणवम् राष्ट्रीय नृत्य महोत्सव सहित विभिन्न मंचों पर अपनी कला प्रस्तुत कर चुकी हैं।
जुगलबंदी से नव्या-आद्या ने रचा कथक का रंग

रायगढ़। 41वें अंतरराष्ट्रीय चक्रधर महोत्सव की 9वीं सांस्कृतिक संध्या में शास्त्रीय नृत्य की मनोहारी छटा देखने को मिली। मंच पर घुंघरुओं की झंकार, लय-ताल की सुंदर जुगलबंदी और भावों की सजीव अभिव्यक्ति ने वातावरण को कला और संस्कृति के रंग में रंग दिया। इसी क्रम में युवा कलाकार नव्या यादव और आद्या पाठक ने अपनी कथक प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया।
नृत्य गुरु जेनिफर जोसेफ से प्रशिक्षण प्राप्त नव्या यादव और आद्या पाठक ने अपनी प्रस्तुति में कथक की विविध शैलियों और भाव पक्ष को खूबसूरती से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की शुरुआत दुर्गा माता पर आधारित श्लोक से हुई। इसके बाद रायगढ़ घराने के पक्षी परन, आमद परन तथा मध्य और द्रुत लय पर आधारित तोड़ों की प्रस्तुति ने कथक की लयकारी और तकनीकी पक्ष को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा।
प्रस्तुति के अंतिम चरण में कहरवा ताल पर आधारित राधा-कृष्ण लीला के भाव पक्ष को तिहाई और कवित्त के साथ प्रस्तुत किया गया। इसके बाद ‘होली खेलत’ की मनमोहक प्रस्तुति ने मंच पर उल्लास और रंगों की छटा बिखेर दी। दोनों कलाकारों की भावाभिव्यक्ति, तालबद्धता और नृत्य कौशल ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया। प्रस्तुति में पढ़ंत पर गुरु जेनिफर जोसेफ, गायन में गुरु देव चौहान एवं आसरा चौहान, तबले पर गुरु देवेंद्र उपाध्याय तथा खंजरी पर आयुष सिंह ने संगत दी। शानदार तालमेल के साथ हुई इस प्रस्तुति पर दर्शकों ने जोरदार तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
बाल कृष्ण की चंचलता से दुर्गा ताण्डव तक

रायगढ़। 41वें अंतरराष्ट्रीय चक्रधर महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या में अंतर्राष्ट्रीय ओडिसी नृत्यांगना कुमारी दीक्षा रथ ने अपनी दो मनोहारी प्रस्तुतियों से मंच पर भक्ति, भाव और शक्ति के विविध रंग बिखेरे। पहली प्रस्तुति में उन्होंने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को साकार किया, वहीं दूसरी प्रस्तुति में मां दुर्गा के शक्ति स्वरूप और विजय गाथा को ओडिसी नृत्य के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
पहली प्रस्तुति में नटखट बाल कृष्ण, वात्सल्य भाव, उनकी मधुर बांसुरी और दिव्य स्वरूप को भाव-भंगिमाओं एवं नृत्य मुद्राओं के माध्यम से जीवंत किया गया। राग मिश्र मुखारी और रूपक ताल पर आधारित इस प्रस्तुति ने दर्शकों को श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मनोहारी दर्शन कराया। इसके बाद ‘दुर्गा ताण्डव’ की ओजस्वी प्रस्तुति में अंधकार से शक्ति के उदय, नवदुर्गा के विविध स्वरूप, सिंहवाहिनी मां दुर्गा, ताण्डव और अधर्म पर विजय के भावों को सशक्त अभिव्यक्ति दी गई। महिषासुरमर्दिनी स्वरूप के माध्यम से सत्य और धर्म की विजय का संदेश भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत हुआ। अंत में शांत और करुणामयी मां के स्वरूप ने प्रस्तुति को भावपूर्ण विराम दिया।
दीक्षा रथ पिछले 10 वर्षों से ओडिसी नृत्य की साधना कर रही हैं। उन्होंने प्रसिद्ध नृत्याचार्य गुरु डॉ. गजेन्द्र कुमार पण्डा के मार्गदर्शन में त्रिधारा, भुवनेश्वर से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वे छत्तीसगढ़ शासन की पंजीकृत कलाकार हैं तथा कोणार्क महोत्सव, धौली महोत्सव और चिरादो मोइडम फेस्टिवल जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंचों पर अपनी कला प्रस्तुत कर चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुबई में प्रथम और सिंगापुर में द्वितीय पुरस्कार भी प्राप्त कर चुकी हैं।



