आहाना की कथक में मनोहारी प्रस्तुति
रायगढ़। 41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की सातवीं सांस्कृतिक संध्या में युवा कथक नृत्यांगना कुमारी आहाना अग्रवाल ने अपनी मनोहारी प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। रायगढ़ घराने की कथक परंपरा पर आधारित उनकी प्रस्तुति में लय, ताल, भाव और घुंघरुओं की झंकार का सुंदर समन्वय देखने को मिला। आहाना की सधी हुई नृत्य मुद्राओं और भावपूर्ण अभिव्यक्ति पर दर्शकों ने तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया।
ओ.पी. जिंदल स्कूल की छात्रा आहाना अग्रवाल मां वैष्णवी संगीत महाविद्यालय, शाखा रायगढ़-सारंगढ़ में गुरु प्रीति रुद्र वैष्णव के मार्गदर्शन में कथक का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। कम उम्र में ही उन्होंने कथक के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा से पहचान बनाई है। उनकी प्रस्तुति में रायगढ़ घराने की कथक शैली की बारीकियों के साथ लय-ताल पर मजबूत पकड़ और भावों की सुंदर अभिव्यक्ति देखने को मिली।आहाना इससे पूर्व प्रणवम-2025 बिलासपुर, कौशल महोत्सव-2024 रायपुर तथा मधुगुंजन शृंगार-2024 रायगढ़ में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। मधुगुंजन शृंगार में उन्होंने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया था।
प्रस्तुति के दौरान गुरु प्रीति रुद्र वैष्णव ने पढ़ंत, लाला राम लोनिया ने गायन, दीपक साहू ने तबला तथा आचार्य लीलाधर वैष्णव ने सितार पर संगत प्रदान की। घुंघरुओं की झंकार, तबले की थाप, सितार के सुर और गायन के साथ आहाना के कथक ने सातवीं सांस्कृतिक संध्या में मनमोहक रंग भर दिया। प्रस्तुति के समापन पर दर्शकों ने तालियों की गडग़ड़ाहट से युवा नृत्यांगना का उत्साहवर्धन किया।
आनंदिता तिवारी ने कथक से प्रस्तुत की शिव पंचाक्षरी स्तोत्र की प्रस्तुति

41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की सातवीं सांस्कृतिक संध्या में रायपुर की 8 वर्षीय कथक नृत्यांगना आनंदिता तिवारी ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कक्षा तीसरी की छात्रा आनंदिता ने कथक के माध्यम से आदिशंकराचार्य रचित ‘शिव पंचाक्षरी स्तोत्र’ की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। लखनऊ घराना आधारित कथक की शिक्षा आनंदिता पिछले चार वर्षों से गुरु तरुण कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने इसके बाद तीन ताल एवं देश राग पर आधारित तराना प्रस्तुत किया, जिसमें भाव, लय और ताल का सुंदर समन्वय देखने को मिला। आनंदिता अब तक करीब 14 प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंचों पर अपनी कला प्रस्तुत कर चुकी हैं। उन्हें बाल नृत्यकला उदय सम्मान, कौशल कला सम्मान, स्वर्ण नृत्य मंगलम पुरस्कार, मंगलम महोत्सव सम्मान, नटवर गोपीकृष्ण नेशनल अवॉर्ड, दीप्तिमान सम्मान और कला गौरव रत्न सम्मान सहित विभिन्न सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
रायगढ़ घराने की गुरु सोमा दास के कलाकारों ने बांधा समां

41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की सातवीं सांस्कृतिक संध्या में रायगढ़ घराने की कथक नृत्यांगना एवं गुरु सोमा दास के मार्गदर्शन में श्री नटराज नृत्य कला केंद्र के कलाकारों ने मनमोहक कथक प्रस्तुति दी। भाव, लय और ताल के सुंदर समन्वय से सजी प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। घुंघरुओं की झंकार, सधी हुई पदचाप और भावपूर्ण नृत्य मुद्राओं पर दर्शकों ने तालियों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
गुरु सोमा दास ने भातखंडे संगीत महाविद्यालय, बिलासपुर से कथक में विशारद तथा कमला देवी संगीत महाविद्यालय से एम.ए. कथक की शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने डॉ. विजया सिंह के मार्गदर्शन में गुरु-शिष्य परंपरा के तहत कथक की साधना की। वर्ष 2019 में पुणे, नेपाल और मलेशिया में आयोजित विभिन्न नृत्य प्रतियोगिताओं में उन्हें पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हुए। पिछले 15 वर्षों से कथक प्रशिक्षण एवं प्रचार-प्रसार से जुड़ी गुरु सोमा दास ने श्री चक्रधर बालिका सदन की बालिकाओं को करीब पांच वर्षों तक प्रशिक्षण दिया। वर्ष 2023 में इन्हीं बालिकाओं के साथ चक्रधर समारोह में प्रस्तुति भी दी थी। वर्तमान में वे श्री नटराज नृत्य कला केंद्र की संचालिका एवं ओ.पी. जिंदल स्कूल, तमनार में नृत्य शिक्षिका हैं। उनके मार्गदर्शन में कलाकारों की प्रस्तुति ने समारोह की सांस्कृतिक गरिमा में एक और सुंदर अध्याय जोड़ा।
शिव वंदना में अश्विका ने बिखेरी कथक की मनोहारी छटा

41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की सातवीं सांस्कृतिक संध्या में युवा कथक नृत्यांगना कुमारी अश्विका साव ने लखनऊ घराने की कथक शैली में मनोहारी एकल प्रस्तुति दी। भगवान शिव को समर्पित शिव वंदना में उन्होंने भाव, लय, तत्कार और नृत्य मुद्राओं के माध्यम से शंभू, शंकर, भोलेनाथ, नीलकंठ एवं नटराज स्वरूप की सुंदर अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने तालियों से सराहा। डीपीएस एनटीपीसी कोरबा की छात्रा अश्विका साव गुरु श्री रंजीत नायक के मार्गदर्शन में कथक का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। लखनऊ घराने की नजाकत, नफासत, भावपूर्ण अभिनय, सटीक लयकारी और आकर्षक चक्करों ने उनकी प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया।
अश्विका थाईलैंड, दुबई और मलेशिया में भी कथक की प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। इसके अलावा पाली महोत्सव, रामगढ़ महोत्सव, मैनपाट महोत्सव, सिरपुर महोत्सव, छत्तीसगढ़ राज्योत्सव, ओडिशा फेस्टिवल और चक्रधर समारोह में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। उन्हें 2026 में ‘नृत्य उदिता सम्मान’ एवं ‘चेतना नृत्य शिरोमणि सम्मान’ तथा 2025 में ‘भारतीय नृत्य कलाश्री पुरस्कार’ और ‘छत्तीसगढ़ गौरव रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया है। उनकी प्रस्तुति ने चक्रधर समारोह के मंच पर युवा प्रतिभा और शास्त्रीय कथक की सुंदर छटा बिखेरी।
चक्रधर समारोह कला एवं संस्कृति का महाकुंभ-केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू

रायगढ़। 41वें अंतरराष्ट्रीय चक्रधर समारोह-2026 के सातवें दिन कला, संगीत और संस्कृति की भव्य प्रस्तुतियों से समारोह स्थल देर रात तक गुलजार रहा। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने महाराजा चक्रधर सिंह के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह ने केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। केंद्रीय राज्य मंत्री ने समारोह में प्रस्तुति देने वाले प्रसिद्ध गायक श्री अमित साना, रायगढ़ कथक घराने के हस्ताक्षर पद्मश्री श्री रामलाल बरेठ, श्री भूपेंद्र बरेठ एवं उनके सहयोगियों को सम्मानित किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह का कला एवं संगीत के क्षेत्र में योगदान अमूल्य है। उनका योगदान केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी कला-साधना और सांस्कृतिक विरासत की चमक पूरे विश्व में दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह केवल एक कुशल प्रशासक ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने कला, संगीत और संस्कृति को सहेजने तथा उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह ने कथक की समृद्ध परंपरा को रायगढ़ घराने के रूप में स्थापित कर भारतीय शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में रायगढ़ को विशिष्ट पहचान दिलाई। उनके योगदान के कारण रायगढ़ आज देश-दुनिया में कला और संस्कृति के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में जाना जाता है।
देशभर के कलाकारों को एक मंच देता है चक्रधर समारोह
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि चक्रधर समारोह कला एवं संस्कृति का महाकुंभ है। इस समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से ख्यातिप्राप्त कलाकार एक मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, शास्त्रीय कलाओं और लोक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी है। समारोह के सातवें दिन कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों के बीच दर्शकों ने कलाकारों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
इस अवसर पर महापौर श्री जीवर्धन सिंह चौहान, सभापति श्री डिग्रीलाल साहू, श्री अरूणधर दीवान, श्री महेश साहू, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह, सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, गणमान्य नागरिक, कला प्रेमी एवं बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
गोटीपुआ ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की सप्तम सांस्कृतिक संध्या में ओडिशा की पारंपरिक गोटीपुआ नृत्य शैली ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नक्षत्र गुरुकुल के कलाकारों ने लय, ताल, भाव-भंगिमाओं और सधे हुए नृत्य कौशल के माध्यम से ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत किया।
भुवनेश्वर स्थित नक्षत्र गुरुकुल की स्थापना वर्ष 2007 में गुरु विजय कुमार साहू ने की थी। गुरुकुल में युवा कलाकारों को गोटीपुआ नृत्य की बारीकियों के साथ योग, शारीरिक अभ्यास और पारंपरिक प्रशिक्षण दिया जाता है। गोटीपुआ ओडिशा की प्राचीन नृत्य परंपरा है, जिसे शास्त्रीय ओडिसी नृत्य की आधारभूमि के रूप में भी जाना जाता है। इसमें बाल कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य प्रस्तुत करते हैं।
प्रस्तुति के दौरान कलाकारों की लयबद्ध गतियों, आकर्षक मुद्राओं और शारीरिक संतुलन ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। नक्षत्र गुरुकुल के कलाकार देश-विदेश के विभिन्न सांस्कृतिक मंचों पर गोटीपुआ की प्रस्तुतियां दे चुके हैं। चक्रधर समारोह के मंच पर उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने तालियों के साथ सराहा।
खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने चक्रधर समारोह में बिखेरे शास्त्रीय नृत्य के रंग

रायगढ़। 41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की सप्तम सांस्कृतिक संध्या में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के नृत्य संकाय के विद्यार्थियों ने ओडिसी, भरतनाट्यम और कथक की मनोहारी प्रस्तुतियों से मंच को शास्त्रीय नृत्य के विविध रंगों से सजा दिया। भाव, लय और ताल के सुंदर समन्वय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
संध्या की शुरुआत विद्यार्थियों ने ‘गणेश वंदना’ से की। ‘एकदन्तो लम्बोदरो विघ्नविनाशको देव:’ की भावपूर्ण प्रस्तुति में जया निर्मलकर, सुधा योजन, प्रज्ञा प्रसाद, मीरा वर्मा, दुर्गा प्रसाद, लीना धनकर और रिकी टुडू ने भगवान गणेश की आराधना को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। नृत्य निर्देशन श्री सुशांत कुमार दास का रहा। इसके बाद भरतनाट्यम नृत्य विभाग के विद्यार्थियों ने ‘नृत्यांजलि’ प्रस्तुत की। लावण्या आनंद द्वारा रचित इस प्रस्तुति का नृत्य संयोजन डॉ. मेदिनी होम्बल एवं श्री होरिल गौर ने किया। होरिल गौर, प्रीति चौधरी, खुशबू भुमिज, अनुकृति सिंह, अवनि जैन, अदिति शर्मा, अंजलि चौहान और यामिनी निषाद ने प्रस्तुति दी।
समारोह की प्रस्तुतियों में ‘भारत के रंग’ ने विशेष आकर्षण पैदा किया। भरतनाट्यम, कथक और ओडिसी की शास्त्रीय शैलियों के माध्यम से ‘वंदे मातरम्’ की भावभूमि को मंच पर जीवंत किया गया। नृत्य निर्देशन श्री सुशांत कुमार दास तथा सह-निर्देशन श्री होरिल गौर का रहा। इसके पश्चात कथक विभाग के शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने स्व. पं. बिरजू महाराज द्वारा राग हंसध्वनि और तीनताल में रचित ‘निरतत शंकर पार्वती संग’ पर आधारित शिव वंदना प्रस्तुत की।
पद्मश्री पं. रामलाल बरेठ के निर्देशन में कथक की मनोहारी प्रस्तुति
भूपेंद्र बरेठ एवं समूह ने रायगढ़ कथक शैली में बिखेरी लय, ताल और भाव की अनुपम छटा

रायगढ़। 41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की सांस्कृतिक संध्या में पद्मश्री पं.रामलाल बरेठ के निर्देशन में गुरु भूपेंद्र बरेठ एवं सहयोगी कलाकारों ने शुद्ध कथक शैली की शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। करीब 10 कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति में रायगढ़ कथक घराने की विशिष्टता, लयकारी, ताल पक्ष और भावाभिनय का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
प्रस्तुति का शुभारंभ शिव वंदना से हुआ, जो राग शंकरा एवं तात चौतात में निबद्ध थी। कलाकारों ने अपनी सधी हुई नृत्य मुद्राओं, पद संचालन और भावपूर्ण अभिव्यक्ति से भगवान शिव की आराधना को मंच पर जीवंत कर दिया। इसके पश्चात ताल पक्ष में ताल धमार पर आधारित रायगढ़ कथक शैली की प्रस्तुति हुई। नृत्या खत्री, आयुषी दुबे एवं संचिता दास ने अपनी शानदार लयकारी, गतियों अृौर पद संचालन से कथक की तकनीकी सुंदरता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। भाव पक्ष में गुरु भूपेंद्र बरेठ ने महाराजा चक्रधर सिंह द्वारा रचित भावगीत ‘चंद्रबदने मृगलोचनी’ पर मनोहारी अभिनय प्रस्तुत किया। इसके साथ ही महाराजा चक्रधर सिंह की रचनाओं पर आधारित चित्रात्मक प्रस्तुति ने समारोह के सांस्कृतिक वैभव को और समृद्ध किया।
गुरु भूपेंद्र बरेठ रायगढ़ घराने की कथक परंपरा के प्रमुख कलाकारों में शामिल हैं। उन्होंने पद्मश्री पं. रामलाल बरेठ एवं पं. कार्तिक राम से कथक की शिक्षा प्राप्त की है। कथक के साथ तबला एवं संगीत में भी उन्होंने प्रशिक्षण लिया है। देश के विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों और समारोहों में अपनी प्रस्तुतियां दे चुके भूपेंद्र बरेठ रायगढ़ कथक शैली की परंपरा को आगे बढ़ाने में निरंतर योगदान दे रहे हैं। समारोह की इस प्रस्तुति में कलाकारों ने अपनी साधना, अनुशासन और उत्कृष्ट नृत्य कौशल से महाराजा चक्रधर सिंह की समृद्ध कथक परंपरा को जीवंत किया।



