रायगढ़। 41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह की छठवीं सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ दुर्ग लोकसभा सांसद श्री विजय बघेल ने दीप प्रज्वलन कर किया। समारोह में पहुंचने से पहले उन्होंने रामलीला मैदान परिसर में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने महाराजा चक्रधर की छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने समारोह में शामिल कलाकारों एवं प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।
समारोह को संबोधित करते हुए सांसद श्री विजय बघेल ने कहा कि चक्रधर समारोह में शामिल होना उनके लिए पहला अवसर है। उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह ने संगीत, संस्कृति, परंपरा और कलाकारों को एक सूत्र में पिरोने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके प्रयासों से कला और संस्कृति को नई पहचान मिली तथा कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का सशक्त मंच मिला। उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह आज चार दशक से अधिक समय से निरंतर कला और संस्कृति की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले कलाकार अपनी-अपनी लोक एवं शास्त्रीय कलाओं के माध्यम से भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत करते हैं। अलग-अलग भाषा, बोली, खान-पान और परंपराओं के बावजूद कला और संस्कृति देशवासियों को एक सूत्र में जोडऩे का कार्य करती है।
सांसद श्री बघेल ने महाराजा चक्रधर सिंह के वंशज एवं समारोह से जुड़े परिवार तथा आयोजन समिति को इस सांस्कृतिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे कलाकारों, कवियों, पत्रकारों एवं समारोह में उपस्थित कला प्रेमियों का छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर स्वागत किया। इस दौरान सांसद विजय बघेल ने छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय गीत ‘मोर संग चलो रे’ के मधुर स्वर के माध्यम से उपस्थित जनसमुदाय को विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए मिलजुलकर आगे बढऩे का संदेश दिया।
श्रीनिका ने कथक प्रस्तुति से मोहा दर्शकों का मन

चक्रधर समारोह-2026 की सांस्कृतिक संध्या में मात्र 10 वर्ष की नन्ही कथक नृत्यांगना कु. श्रीनिका ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। कम उम्र से ही कथक की साधना कर रहीं श्रीनिका निरंतर अभ्यास और समर्पण के साथ इस शास्त्रीय कला को सीख रही हैं।श्रीनिका की प्रस्तुति में कथक की भाव-भंगिमा, लय और ताल का सुंदर समन्वय देखने को मिला। उनकी प्रतिभा और आत्मविश्वास ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। श्रीनिका ने मधुगुंजन, केरल समाजम् प्रतियोगिता, गीतांश उत्सव, कौशिकी, कथक दिवस, प्रणव्यम और अमृत ध्वनि सहित विभिन्न आयोजनों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किए हैं। कलावंत, रायपुर में प्रथम पुरस्कार के साथ मिला ‘कलावंत सम्मान’ उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है।
आद्या अग्रवाल ने दी कथक की मनमोहक प्रस्तुति

रायगढ़। चक्रधर समारोह-2026 की छठवीं सांस्कृतिक संध्या में युवा कथक नृत्यांगना आद्या अग्रवाल ने कथक की मनमोहक प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति में भाव, लय और ताल का सुंदर संगम देखने को मिला।
आज की प्रस्तुति में सुश्री निहारिका यादव ने पढ़ंत, लालाराम लोनिया ने गायन तथा दीपक साहू ने तबले पर संगत की। नृत्य निर्देशन गुरु शरद वैष्णव का रहा। कक्षा 9वीं की छात्रा आद्या रायगढ़ कथक घराने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपने गुरु शरद वैष्णव के मार्गदर्शन में कथक की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। आद्या ने रायगढ़ सहित कटक, उज्जैन, दार्जिलिंग और बिलासपुर के विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों में प्रस्तुति दी है।
वेदों के आध्यात्मिक दर्शन को ओडिसी नृत्य में साकार किया गुरु रीला होता एवं समूह ने

41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की छठवीं सांस्कृतिक संध्या में सुप्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना एवं गुरु रीला होता एवं समूह ने ‘एकोऽहम् बहुस्याम्’ की भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति से सराबोर कर दिया। नृत्य, संगीत और भाव-अभिव्यक्ति के सुंदर समन्वय से सजी इस प्रस्तुति में वैदिक ज्ञान, भारतीय जीवन-दर्शन और आध्यात्मिक चेतना को प्रभावी ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया गया।
प्रस्तुति का आरंभ मंगलाचरण से हुआ, जिसमें अग्नि, जल और परमात्मा को समर्पित पावन स्तुति के माध्यम से सृष्टि के मूल तत्वों और दिव्य चेतना का भाव प्रस्तुत किया गया। इसके बाद गृहस्थ आश्रम के माध्यम से पारिवारिक जीवन, नारी सम्मान और सामाजिक सामंजस्य की अवधारणा को नृत्य के जरिए अभिव्यक्त किया गया। प्रस्तुति के अंतिम चरण में संन्यास एवं मोक्ष के माध्यम से जीवात्मा और परमात्मा के एकाकार होने की आध्यात्मिक यात्रा को साकार किया गया। ‘एकोऽहम् बहुस्याम्’ अर्थात् ‘मैं एक हूं और अनेक रूपों में व्यक्त हूं’ के वैदिक भाव ने पूरी प्रस्तुति को विशेष आध्यात्मिक गहराई प्रदान की।
गुरु रीला होता ने आठ वर्ष की आयु से योग और ओडिसी का प्रशिक्षण प्रारंभ किया। वे ‘रेज ऑफ विजडम सोसाइटी’ की संस्थापक निदेशक हैं और ओडिसी नृत्य के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। उन्हें संस्कृति मंत्रालय की वरिष्ठ फेलोशिप सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। प्रस्तुति की अवधारणा, आलेख एवं नृत्य-रचना गुरु विजयलक्ष्मी होता की रही, जबकि संगीत में पद्म विभूषण पंडित राजन-साजन मिश्र एवं स्वरांश मिश्र का योगदान रहा।
माही केसरवानी की भरतनाट्यम प्रस्तुति में दिखा भाव और लय का सुंदर संगम

रायगढ़। 41 वें चक्रधर समारोह-2026 की सांस्कृतिक संध्या में रायगढ़ की युवा नृत्य प्रतिभा कुमारी माही केसरवानी ने भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी। माही पिछले पांच वर्षों से छंदम डांस एकेडमी, रायगढ़ से भरतनाट्यम का प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने स्थानीय, राज्य एवं अखिल भारतीय स्तर पर विभिन्न मंचों पर प्रस्तुतियां दी हैं और अनेक पुरस्कार प्राप्त किए हैं। कार्यक्रम में उन्होंने भाव, लय और ताल के सुंदर समन्वय से भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने सराहा।
चक्रधर समारोह की छठवीं संध्या में भाव, लय और ताल से सजी आशना की कथक प्रस्तुति

रायगढ़। 41वें चक्रधर समारोह की छठवीं सांस्कृतिक संध्या में कथक नृत्यांगना कु. आशना दिल्लीवार ने भाव, लय और ताल से सजी मनमोहक प्रस्तुति दी। उन्होंने कथक की विभिन्न मुद्राओं, पद-संचालन और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से दर्शकों को शास्त्रीय नृत्य की विविधता और सुंदरता से परिचित कराया। उनकी प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों से उत्साहवर्धन किया। संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन से ‘बी प्लस ग्रेडेड’ कथक कलाकार के रूप में मान्यता प्राप्त आशना देश-विदेश के करीब 95 मंचों पर कथक प्रस्तुत कर चुकी हैं। उन्होंने दुबई, काठमांडू, कोलंबो और हनोई सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी है।
चक्रधर समारोह में अन्विता विश्वकर्मा ने कथक में दिखाई भाव, लय और ताल की सुंदर प्रस्तुति

रायगढ़। 41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की सांस्कृतिक संध्या में 12 वर्षीय कथक नृत्यांगना अन्विता विश्वकर्मा ने अपनी शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति से दर्शकों को प्रभावित किया। लखनऊ घराने की कथक शैली में प्रशिक्षित अन्विता ने भाव, लय, ताल, तत्कार और पद-संचालन का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया।
रायपुर के दिल्ली पब्लिक स्कूल की कक्षा 8वीं की छात्रा अन्विता ने महज 3 वर्ष की उम्र से कथक का प्रशिक्षण प्रारंभ किया। गुरु श्रीमती अंजनी ठाकुर के मार्गदर्शन में उन्होंने निरंतर अभ्यास और समर्पण के साथ कथक की बारीकियां सीखीं। उनका पहला मंच प्रदर्शन प्लेस्कूल की नृत्य प्रतियोगिता में हुआ, जहां उन्होंने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। अन्विता ने राष्ट्रीय स्तर के साथ ही श्रीलंका, नेपाल और वियतनाम में भी अपनी कला का प्रदर्शन किया है। पुणे में आयोजित अखिल भारतीय सांस्कृतिक संघ की प्रतियोगिता में कम उम्र में हिस्सा लेकर उन्होंने कथक में चेयरमैन अवार्ड तथा लोकनृत्य में द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया। दूरदर्शन छत्तीसगढ़ पर उनके नृत्य और साक्षात्कार का प्रसारण भी हो चुका है।
चक्रधर समारोह: विदेशों में परफॉर्मेंस कर चुकी मंजुला मूर्ति ने मोहिनीअट्टम की भावपूर्ण प्रस्तुति से मोहा दर्शकों का मन

रायगढ़। 41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की छठवीं सांस्कृतिक संध्या में विदेश में परफॉर्मेंस कर चुकी सुप्रसिद्ध मोहिनीअट्टम नृत्यांगना मंजुला मूर्ति ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लय, ताल, भाव और नृत्य की सुंदर संगति से सजी उनकी प्रस्तुति में मोहिनीअट्टम की शास्त्रीय गरिमा और सौंदर्य प्रभावी रूप से देखने को मिला।
मंजुला मूर्ति पद्मश्री गुरु भारती शिवाजी की वरिष्ठ शिष्या हैं तथा गुरु स्वर्गीय कल्याणी कुट्टी अम्मा से भी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी हैं। नृत्यग्राम में उन्होंने नौ वर्षों तक गुरुकुल परंपरा में गहन प्रशिक्षण लिया। उन्हें मोहिनीअट्टम में उत्कृष्टता के लिए संगीत नाटक अकादमी बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने भारत सहित जर्मनी, जापान, रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और डेनमार्क जैसे देशों में भारतीय शास्त्रीय नृत्य का प्रतिनिधित्व किया है। उनकी प्रस्तुति ने चक्रधर समारोह की सांस्कृतिक संध्या को शास्त्रीय नृत्य की भाव और सौंदर्य से समृद्ध किया।
ओडिसी की शास्त्रीय छटा में सजी गौरीशंकर दाश की भावपूर्ण प्रस्तुति

रायगढ़। 41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की सांस्कृतिक संध्या में प्रख्यात ओडिसी कलाकार गौरीशंकर दाश ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लय, ताल, मुद्राओं और भावों के सुंदर समन्वय से सजी उनकी प्रस्तुति में ओडिसी नृत्य की शास्त्रीय गरिमा और मनोहारी सौंदर्य प्रभावी रूप से देखने को मिला।
गौरीशंकर दाश ने अपनी कलात्मक यात्रा ओडिसी संगीत से शुरू की और पद्मभूषण गुरु केलुचरण महापात्र के सान्निध्य में ओडिसी नृत्य की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने ओडिसी संगीत, ओडिसी नृत्य और ओडिय़ा साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि हासिल की है। उनकी कला साधना को राज्य संगीत नाटक अकादमी युवा पुरस्कार, उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ युवा प्रतिभा पुरस्कार के लिए चयन तथा संस्कृति मंत्रालय की राष्ट्रीय वरिष्ठ छात्रवृत्ति एवं कनिष्ठ फेलोशिप जैसे सम्मानों से पहचान मिली है। वे आईसीसीआर के सूचीबद्ध तथा दूरदर्शन के अनुमोदित कलाकार भी हैं।
गौरीशंकर दाश ‘देवांशी डांस अकादमी फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स’, ढेंकानाल के संस्थापक एवं निदेशक हैं। वे विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय नृत्य के संरक्षण और प्रसार में भी योगदान दे रहे हैं। चक्रधर समारोह में उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को ओडिसी की समृद्ध परंपरा और भाव-अभिव्यक्ति की खूबसूरती से रूबरू कराया।



