रायगढ़। समय-काल के अनुरूप जब-जब धरती पर अज्ञानता, कुरीतियों और शोषण का अंधकार गहराया है, तब-तब किसी महान आत्मा का अवतरण हुआ है। ऐसी ही एक दिव्य आत्मा थे पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी, जिनका पूरा जीवन राष्ट्र प्रेम की अलख जगाने और आध्यात्मिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए समर्पित रहा। आज उनकी जयंती पर उनके आदर्श और पदचिन्ह दशकों बाद भी समाज को उसी तरह प्रेरित कर रहे हैं, जैसे एक दीपक अंधेरे में राह दिखाता है।
संकट काल में हुआ दिव्य अवतरण
द्वितीय विश्व युद्ध का दौर था। देश पर गुलामी और संकट के बादल मंडरा रहे थे, हर तरफ अज्ञानता और शोषण हावी था। अन्न के अभाव में अन्नदाता ही भुखमरी से जूझ रहा था। ऐसे ही संक्रमण काल में वि.सं. 1994 भाद्रपद शुक्ल सप्तमी, 12 सितंबर 1937 को बिहार प्रांत के आरा स्टेशन से 6 मील दूर गुंडी ग्राम में एक प्रतिष्ठित भारद्वाज गोत्रीय परिवार में श्री बैजनाथ सिंह एवं श्रीमती लखराजी देवी के पुत्र के रूप में एक बालक का जन्म हुआ, जिसका नाम भगवान सिंह रखा गया। यही बालक आगे चलकर अघोरेश्वर भगवान राम के नाम से विश्वविख्यात हुआ।बचपन से ही उनकी रुचि परंपरागत स्कूली पढ़ाई में नहीं थी। वे बाल सखाओं के साथ भजन-कीर्तन में लीन रहते। अपने गृह ग्राम में ही शिव मंदिर बनाकर साधना करने लगे। परिवार का बार-बार घर लौटने का आग्रह जब उनकी साधना में बाधक बनने लगा, तो मात्र 9 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने घर छोडऩे का कठोर निर्णय ले लिया और तीर्थाटन पर निकल पड़े। जगन्नाथपुरी, गया होते हुए वे काशी पहुंचे, जहां स्वयं माता अन्नपूर्णा ने वृद्धा के रूप में उन्हें दर्शन देकर गंगा स्नान और बाबा विश्वनाथ का पूजन कराया और क्रीं कुंड जाने का मार्ग दिखाया। जुलाई 1951 में किनाराम स्थल में अघोर पंथ से दीक्षित होकर वे कठोर साधना में लीन हो गए।
कुष्ठ रोगियों को गले लगाकर रचा इतिहास
पूज्य अघोरेश्वर ने पीडि़त मानव की सेवा को ही सबसे बड़ी साधना माना। 24 वर्ष की अल्पायु में 29 सितंबर 1961 को उन्होंने श्री सर्वेश्वरी समूह की स्थापना की। उस दौर में कुष्ठ रोग को असाध्य और अछूत माना जाता था। समाज ऐसे रोगियों का बहिष्कार कर देता था, उनके पास तिल-तिल कर मरने के सिवा कोई चारा नहीं था।अघोरेश्वर ने समाज द्वारा ठुकराए गए उन कुष्ठ रोगियों को गले से लगाया, अपने हाथों से उनकी सेवा और इलाज किया। मानवता की यह अद्भुत सेवा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुई। आज सर्वेश्वरी समूह की 130 से अधिक शाखाएं देश-विदेश में इसी सेवा की अलख जगा रही हैं। बनोरा, डभरा, शिवरीनारायण, अंबिकापुर, वाराणसी, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित सभी आश्रमों की बुनियाद उनके बताए 19 सूत्रीय सिद्धांतों पर टिकी है।समूह को गतिशील बनाए रखने और सेवा का संस्कार अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अघोरेश्वर ने 19 सूत्रीय सिद्धांत तय किए। आज बाबा प्रियदर्शी राम जी सहित उनके चार प्रमुख शिष्यों द्वारा अभिषेक प्राप्त उत्तराधिकारियों के माध्यम से सभी आश्रमों की बुनियाद इन्हीं 19 सिद्धांतों पर टिकी है।
उनका सबसे बड़ा संदेश – चमत्कार मत देखो, चमत्कृत बनो
पूज्य अघोरेश्वर ने अघोर पंथ की गूढ़ विचारधारा को श्मशान से निकालकर समाज से जोड़ा। वे चमत्कार दिखाने में विश्वास नहीं रखते थे, वे हर व्यक्ति को चमत्कृत – यानी जागृत और कर्मशील बनाना चाहते थे।उन्होंने यह अलख जगाया कि ईश्वर को पूजने के लिए मंदिर-मंदिर भटकने की जरूरत नहीं है। हर व्यक्ति के अंदर परमात्मा का अंश मौजूद है। हर व्यक्ति का समान रूप से सम्मान करना ही सच्ची ईश्वर पूजा है। वे मूर्तियों में भगवान देखने की बजाय मनुष्यों में ईश्वर को देखते थे। यही कारण है कि उनके लौकिक गुरु महाराज श्री राजेश्वर राम जी ने उन्हें क्रीं कुंड के महंत पद पर आसीन करना चाहा, तो उन्होंने राष्ट्र सेवा के व्रत के कारण विनम्रतापूर्वक उस पद को अस्वीकार कर दिया।्र समाधि लेने से पूर्व उन्होंने अपनी सभी संस्थाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए अपने चार प्रमुख शिष्यों को अलग-अलग क्षेत्रों का उत्तराधिकारी घोषित कर उनका अभिषेक किया, ताकि सेवा का यह संस्कार पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होता रहे।आज जब समाज फिर से भेदभाव और दिखावे की कुरीतियों में उलझ रहा है, पूज्य अघोरेश्वर का जीवन हमें सिखाता है नफरत नहीं, प्रेम करो। बहिष्कार नहीं, स्वीकार करो। और सेवा ही सबसे बड़ी साधना है।सच्चा अध्यात्म और सच्चा धर्म पीडि़त मानव की सेवा में है।
जन्मोत्सव पर जनकल्याण हेतु वृहद स्कूल का होगा लोकार्पण
पूज्य अघोरेश्वर अज्ञानता के गहन अंधकार को दूर शिक्षा के जरिए दूर करने के पक्षधर रहे। उनके शिष्यों में बाबा प्रियदर्शी राम जी ने इस मर्म को समझा। अघोरेश्वर भगवान राम विद्या मंदिर अंग्रेजी मीडियम स्कूल का निर्माण भी अज्ञानता के तिमिर को दूर करने की दिशा में बड़ा महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आज सूबे के मुखिया विष्णु देव साय एवं स्थानीय विधायक वित्त मंत्री ओपी चौधरी की गरिमामई उपस्थिति में आज यह भव्य सर्वसुविधा स्कूल जनकल्याण के लिए लोकार्पित होगा।
जन्मोत्सव एवं लोकार्पण हेतु आज के कार्यक्रम
अघोर गुरुपीठ ट्रस्ट, बनोरा के व्यवस्थापक मंडल द्वारा समस्त धर्म बन्धुओं एवं माताओं को सूचित किया गया है कि 18 सितम्बर 2026 शुक्रवार को परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी का अवतरण दिवस एवं ‘नवीन स्कूल भवन का लोकार्पण’ कार्यक्रम आयोजित किया गया है।प्रात: 08:00 बजे से 08:30 बजे तक पूज्य बाबा जी द्वारा श्री गुरु चरण पादुका पूजन,प्रात: 08:40 से 09:30 बजे तक सामूहिक आरती,प्रात: 09:30 से 11:30 बजे तक सामूहिक गुरु गीता का पाठ सामूहिक हवन, प्रात: 10:00 से 03:00 बजे तक भजन – कीर्तन,मध्यान्ह 12:00 से 04:00 बजे तक सामूहिक प्रसाद वितरण होगा लोकार्पण समारोह के तहत विद्यालय प्रांगण में अपराह्न 03:00 बजे माननीय अतिथियों का आगमन एवं स्वागत अपराह्न 03:10 बजे दीप प्रज्वलन,अपराह्न 03:20 बजे नवीन भवन का लोकार्पण समारोह सायं 04:00 बजे से विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम सायं 04:45 बजे से मुख्य अतिथि विष्णु देव साय मुख्यमंत्री, छ.ग. शासन का उद्बोधन एवं विशिष्ट अतिथि माननीय ओ.पी. चौधरी जी वित्तमंत्री, छ.ग. शासन द्वारा संबोधन सायं 05:30 बजे से परम पूज्य बाबा जी का आशीर्वचन होगा उसके बाद सायं 06:00 बजे आभार प्रदर्शन किया जाएगा।



