रायपुर। शहर के जर्जर भवन अब सिर्फ पुरानी इमारतें नहीं, बल्कि हादसे का खतरा बन चुके हैं। 3 दिन पहले सदर बाजार में करीब 100 साल पुराने जर्जर भवन का एक हिस्सा अचानक सडक़ पर गिर गया। गनीमत रही कि उस वक्त कोई इसकी चपेट में नहीं आया। सूचना मिलने के बाद नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और भवन के खतरनाक हिस्से को हटाने की कार्रवाई की। इस घटना के बाद शहर में चिन्हित 100 से ज्यादा जर्जर भवनों को लेकर फिर सवाल उठ रहे हैं। निगम की सूची में शामिल कई भवन मुख्य सडक़ों और भीड़भाड़ वाले बाजारों के बीच हैं। सदर बाजार के अलावा फूल चौक, हलवाई लाइन, शदाणी चौक समेत कई इलाकों में पुराने भवन आज भी लोगों की आवाजाही के बीच खड़े हैं।
नगर निगम जर्जर भवनों को चिन्हित कर उनके मालिकों को नोटिस देता है। बारिश से पहले इन भवनों पर नोटिस चस्पा किए जाते हैं। गणेश उत्सव के दौरान झांकी और विसर्जन के रास्तों पर भी जर्जर भवनों को लेकर निगम की ओर से कार्रवाई की जाती है। कई मामलों में निगम भवन मालिक को इमारत खाली कराने या खुद गिराने के लिए कहता है। यदि मालिक कार्रवाई नहीं करता तो आगे की प्रक्रिया में समय लग जाता है। इस दौरान भवन वहीं खड़ा रहता है और उसके आसपास लोगों की आवाजाही जारी रहती है। सदर बाजार में जो हुआ, वह इसी खतरे की एक झलक है। भवन का हिस्सा रात या कम भीड़ के समय गिरने से बड़ा हादसा टल गया। अगर यही हिस्सा बाजार खुलने के समय गिरता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। जर्जर भवनों से खतरा केवल पूरी इमारत गिरने का नहीं है। कमजोर दीवार, छज्जे, छत या अन्य हिस्सा भी अचानक गिर सकता है। कई पुराने भवनों के नीचे दुकानें चल रही हैं और इनके सामने से दिनभर लोग गुजरते हैं। खासकर बारिश के दौरान दीवारों और छतों में नमी आने से पुराने निर्माण की स्थिति और खराब हो सकती है। ऐसे में राहगीर, दुकानदार और ग्राहक सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। नगर निगम के जोनवार आंकड़ों में जोन-6 भाठागांव क्षेत्र में सबसे ज्यादा 36 जर्जर भवन चिन्हित हैं। जोन-4 मोतिबाग और जोन-8 महोबा बाजार में 24-24 भवन हैं। इसके अलावा जोन-7 समता कॉलोनी में 14, जोन-5 ईदगाहभाठा में 12, जोन-1 खमतराई में 10, जोन-3 शंकरनगर में 9 और जोन-2 फाफाडीह में 8 जर्जर भवन चिन्हित किए गए हैं। यानी खतरा केवल पुराने शहर के कुछ बाजारों तक सीमित नहीं है। नगर निगम के अलग-अलग जोन में ऐसे भवन मौजूद हैं।
सदर बाजार में जर्जर भवन का हिस्सा गिरने के बाद निगम ने मौके पर कार्रवाई कर दी, लेकिन अब सवाल शहर के बाकी भवनों को लेकर है। खासकर उन इमारतों को लेकर, जिन्हें पहले ही जर्जर या खतरनाक चिन्हित किया जा चुका है। निगम के सामने अब यह तय करने की चुनौती है कि कौन से भवन तत्काल खाली कराने हैं, किनकी मरम्मत हो सकती है और किन्हें गिराना जरूरी है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि मालिक कार्रवाई नहीं करता तो निगम कितने समय में खुद हस्तक्षेप करेगा। क्योंकि जर्जर भवन गिरने के बाद मलबा हटाना कार्रवाई है, लेकिन गिरने से पहले खतरा खत्म करना ही असली समाधान है।
100 से ज्यादा जर्जर भवनों पर खतरा, भाठागांव में सबसे अधिक 36 चिन्हित



