खरसिया। नगर में कॉलोनी विकास और प्लॉटिंग को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। आरोप है कि कुछ कॉलोनियों में रेरा एवं टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की आवश्यक अनुमति/प्रक्रिया पूरी किए बिना प्लॉटिंग और विकास कार्य किए गए। वहीं, जिन परियोजनाओं में ईडब्ल्यूएस के लिए भूमि उपलब्ध कराई जानी थी, वहां तक पहुंचने के लिए उचित सडक़ तक नहीं होने की बात सामने आ रही है। जिले में बिल्डरों के विरुद्ध ईडब्ल्यूएस भूमि जांच के आदेश की खबर से कॉलोनी कारोबार से जुड़े लोगों में हडक़ंप मचा हुआ है। खासकर पुरानी कॉलोनियों में नियमों के पालन और विकास कार्यों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। कॉलोनी विकास के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ईडब्ल्यूएस के लिए निर्धारित भूमि के संबंध में भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ स्थानों पर ईडब्ल्यूएस भूमि तो दर्शाई गई, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए आवश्यक सडक़ और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। सवाल यह है कि यदि ईडब्ल्यूएस भूमि तक पहुंचने का रास्ता ही नहीं है, तो उस भूमि का वास्तविक उपयोग कैसे होगा?
निजी कॉलोनी में करोड़ों की सरकारी सडक़?
मामले का सबसे गंभीर पहलू नगर पालिका द्वारा कुछ निजी कॉलोनी क्षेत्रों में कराए गए सडक़ निर्माण को लेकर बताया जा रहा है। आरोप है कि बिना विधिवत भू-अर्जन अथवा भूमि का आधिपत्य नगर पालिका को प्राप्त हुए, निजी कॉलोनी क्षेत्र में करोड़ों रुपये की सडक़ें बना दी गईं। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि सरकारी राशि से निजी भूमि पर सडक़ निर्माण किस आधार पर कराया गया?
सीएमओ और इंजीनियर की भूमिका पर भी सवाल
सडक़ निर्माण की स्वीकृति, तकनीकी परीक्षण, कार्यादेश, भुगतान और स्थल निरीक्षण की प्रक्रिया में तत्कालीन संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की बात कही जा रही है।
क्या नगर पालिका ने भूमि का स्वामित्व/आधिपत्य जांचे बिना सडक़ निर्माण कराया?
क्या तकनीकी अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया था?
सरकारी राशि से निजी कॉलोनी में सडक़ बनाने की अनुमति किस आधार पर दी गई?
और यदि भूमि निजी थी, तो सडक़ निर्माण का लाभ किसे मिला?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
जांच से खुलेगा पुरानी कॉलोनियों का राज
बिल्डरों द्वारा कॉलोनी विकास में अपनाई गई प्रक्रिया, रेरा पंजीयन, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अनुमति, ईडब्ल्यूएस भूमि, सडक़ एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं के दस्तावेजों की जांच होने पर खरसिया की पुरानी कॉलोनियों से जुड़े कई तथ्य सामने आने की संभावना है। अब देखना होगा कि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या जिम्मेदार बिल्डरों के साथ-साथ संबंधित विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी निष्पक्ष जांच के दायरे में आती है। नियमों को ताक पर रखकर कॉलोनी काटी गई तो कार्रवाई किस पर होगी? और निजी जमीन पर सडक़ निर्माण, नाली निर्माण, पानी पाइप, स्ट्रीट लाइट में किए गए सरकारी करोड़ों खर्च हुए तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? खरसिया में कॉलोनी प्लॉटिंग से लेकर सरकारी सडक़ निर्माण तक—जांच की आंच अब कई लोगों तक पहुंच सकती है।



