रायगढ़। चिटफंड कंपनी का डायरेक्टर ग्रामीणों को धोखा से कम समय में अधिक लाभ दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपए जमा कराया था, इसके बाद कंपनी को बंद कर फरार हो गया था। जिससे पुलिस ने उक्त डायरेक्टर को जशपुर से हिरासत में लेकर घरघोडा लाई है।
उल्लेखनीय है कि चिटफंड कंपनी के डायरेक्टर सुनील तिवारी कंपनी को बंद कर फरार हो गया था। इस दौरान थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू को मुखबिर से सूचना मिली थी कि चिटफंड मामले का फरार आरोपी सुनील तिवारी जशपुर आया हुआ है। इससे पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को जशपुर से अभिरक्षा में लिया और घरघोड़ा थाना लेकर आई। पूछताछ में आरोपी द्वारा अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर अपराध कारित करना स्वीकार किया गया। आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराकर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया है।
जानकारी अनुसार 27 मार्च 2017 को प्रार्थी लालबाबू गुप्ता, निवासी नवापारा घरघोड़ा ने थाना घरघोड़ा में लिखित आवेदन प्रस्तुत कर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि नवापारा घरघोड़ा में राजकुमार कोसे द्वारा ‘शुष्क इंडिया लिमिटेड‘ नामक कंपनी संचालित की जा रही थी। कंपनी के माध्यम से लोगों को कम समय में अधिक रकम देने का लालच देकर पैसा जमा कराया जाता था।
इससे प्रार्थी ने भी कंपनी की बातों में आकर वर्ष 2012 से अपने तथा अपने पति/पिता बसंती गुप्ता के नाम पर प्रतिमाह 601 रुपये की दर से रकम जमा करना शुरू किया था। इसी प्रकार वार्ड के कई अन्य लोगों ने भी मासिक एवं फिक्स डिपॉजिट के रूप में कंपनी में रकम जमा की थी। वर्ष 2016 में राजकुमार कोसे बिना निवेशकों की रकम वापस किए नवापारा घरघोड़ा से फरार हो गया। बाद में उसके वापस आने पर निवेशकों द्वारा रकम वापस मांगी गई तो कंपनी बंद होने तथा कंपनी के ऊपर केस चलने की बात कहकर रकम वापस करने से इंकार कर दिया गया।
इस प्रकार कंपनी संचालक द्वारा कई लोगों को कम समय में अधिक रकम देने का झांसा देकर पैसा जमा कराया गया तथा निवेशकों को बांड पेपर भी दिए गए। कंपनी बंद होने के बाद रकम वापस नहीं करने की शिकायत पर थाना घरघोड़ा में धारा 420, 467, 468 भादवि एवं धारा 6, 10 छत्तीसगढ़ निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
विवेचना के दौरान प्रार्थी एवं निवेशकों के कथन दर्ज किए गए तथा निवेशकों को दिए गए बांड पेपर एवं आरोपी राजकुमार कोसे द्वारा संचालित कार्यालय का सामान जप्त किया गया। आरोपी राजकुमार कोसे को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था। प्रकरण में पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर धारा 467, 468 भादवि जोड़ी गई तथा विवेचना पूर्ण कर 11 जून 2017 को अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया। प्रकरण में कंपनी के मुख्य डायरेक्टरों के संबंध में विवेचना स्रद्भ धारा 173(8) जाफौ के तहत जारी रखते हुए आरओसी ग्वालियर से कंपनी के डायरेक्टरों की जानकारी प्राप्त की गई।
जांच में सामने आया कंपनी का डायरेक्टर
पुलिस द्वारा जब मामले की जांच की गई तो अलग-अलग प्रांत से कई डायरेक्टर के नाम सामने आए, जिसमें दिनेश सैनी पिता नंदकिशोर लोधी, निवासी मक्सी, जिला शाजापुर (म.प्र.), नरेंद्र लोधी पिता हरिसिंह लोधी, निवासी मक्सी, जिला शाजापुर (म.प्र.), सुनील तिवारी पिता दशरथ प्रसाद तिवारी, निवासी इंदौर, मध्यप्रदेश का नाम सामने आया। साथ ही पतासाजी के दौरान आरोपी दिनेश सैनी के केंद्रीय जेल उज्जैन में निरुद्ध होने की जानकारी मिलने पर न्यायालय के आदेशानुसार उसे प्रोडक्शन वारंट पर केंद्रीय जेल उज्जैन से हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में अपराध स्वीकार करने पर उसे 28. जून 2022 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेशानुसार न्यायिक रिमांड पर केंद्रीय जेल उज्जैन में निरुद्ध कराया गया था।
लंबे समय से फरार था सुनील तिवारी
एसएसपी शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन पर प्रकरण के शेष आरोपियों की पतासाजी लगातार की जा रही थी। इसी दौरान थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू को फरार डायरेक्टर सुनील तिवारी पिता दशरथ प्रसाद तिवारी 41 वर्ष सा. वार्ड क्र. 85 राम मंदिर के पास प्रजापथ नगर द्वारिकापुरी थाना द्वारिकापुरी जिला इंदौर हा.मु. गली नं. 02 विदिषा रोड भानपुर संतोष सिंह का किराये का मकान थाना छोला जिला भोपाल (म.प्र.) की पतासाजी एवं गिरफ्तार कर रिमांड पर भेजा गया है।



