रायगढ़। भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने बीते कुछ वर्षों में रोजमर्रा की जिंदगी का तरीका तेजी से बदल दिया है। कभी राशन की दुकान, रेलवे टिकट काउंटर, बिजली बिल जमा करने या बाजार में खरीदारी के लिए लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था, लेकिन अब स्मार्टफोन और क्यूआर कोड के जरिए कुछ ही सेकंड में भुगतान संभव हो रहा है। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो साझा करते हुए यूपीआई को देश में जीवन को आसान बनाने वाली बड़ी डिजिटल व्यवस्था बताया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान ने खरीदारी से लेकर रोजमर्रा के छोटे-बड़े भुगतानों तक लोगों की आदतों में बड़ा बदलाव किया है।
ओपी चौधरी ने यूपीआई से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह व्यवस्था अब केवल तकनीक का नया विकल्प नहीं रह गई है, बल्कि करोड़ों भारतीयों की रोजमर्रा की भुगतान प्रणाली का हिस्सा बन चुकी है। उनके अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई के माध्यम से 24,162 करोड़ लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि 314.23 लाख करोड़ रुपये रही। उन्होंने इसे भारत में डिजिटल भुगतान की तेजी से बढ़ती स्वीकार्यता का उदाहरण बताया।
लंबी कतारों से डिजिटल भुगतान तक
भारत में डिजिटल भुगतान के विस्तार से पहले दैनिक जरूरतों के कई कामों के लिए लोगों को नकद भुगतान और लंबी कतारों पर निर्भर रहना पड़ता था। रेलवे टिकट खिडक़ी, बिजली बिल भुगतान केंद्र, सरकारी सेवाएं, बैंक और कई बाजारों में लोगों की लंबी लाइनें आम दृश्य थीं। अब स्थिति में तेजी से बदलाव आया है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक क्तक्र कोड के जरिए भुगतान की सुविधा उपलब्ध है। ग्राहक मोबाइल फोन से क्तक्र कोड स्कैन करता है और कुछ सेकंड में भुगतान पूरा हो जाता है। नकद राशि रखने, छुट्टे पैसे की समस्या या कई मामलों में बैंक तक जाने की आवश्यकता भी कम हुई है। ओपी चौधरी ने कहा कि डिजिटल पेमेंट ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को तेज, आसान और सुविधाजनक बनाया है। उनके अनुसार यूपीआई का विस्तार इस बात का उदाहरण है कि किस तरह तकनीक आम नागरिकों के दैनिक जीवन में सीधे बदलाव ला सकती है।
उन्होंने कहा कि आज भुगतान की प्रक्रिया केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल भुगतान तेजी से सामान्य हो चुका है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई के माध्यम से 24,162 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए। इन लेनदेन की कुल वैल्यू 314.23 लाख करोड़ रुपये बताई गई है। उन्होंने पुराने आंकड़ों से तुलना करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 में यूपीआई लेनदेन की संख्या करीब 2,233 करोड़ थी। कुछ वर्षों के भीतर इसमें कई गुना वृद्धि हुई है। इससे यह संकेत मिलता है कि यूपीआई ने भारत में भुगतान की आदतों में तेजी से जगह बनाई है। डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब यूपीआई केवल बड़े मूल्य के लेनदेन तक सीमित नहीं है। चाय, सब्जी, किराना और अन्य छोटी खरीदारी से लेकर दवा, पेट्रोल, रेस्तरां और बड़े भुगतान तक लोग इसका उपयोग कर रहे हैं। पहले डिजिटल भुगतान को कई लोग अतिरिक्त सुविधा के रूप में देखते थे, लेकिन अब बड़ी संख्या में लोगों के लिए यह भुगतान का नियमित माध्यम बन चुका है।
जुलाई में भी बना लेनदेन का नया रिकॉर्ड
ओपी चौधरी ने कहा कि यूपीआई भुगतान हर महीने नए रिकॉर्ड बना रहा है। उनके द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 में 23.66 अरब यूपीआई लेनदेन हुए, जिनकी कुल कीमत करीब 29.88 लाख करोड़ रुपये रही। इससे पहले जून 2026 में 22.7 अरब लेनदेन के जरिए करीब 28.9 लाख करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। लगातार बढ़ते मासिक आंकड़े डिजिटल भुगतान के प्रति लोगों के भरोसे और इसके व्यापक उपयोग को दर्शाते हैं। यूपीआई की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसका छोटे और बड़े दोनों प्रकार के लेनदेन के लिए उपयोग होना शामिल है। एक ओर लोग दैनिक खरीदारी के लिए कुछ रुपये का भुगतान कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बड़े व्यावसायिक लेनदेन भी डिजिटल माध्यम से किए जा रहे हैं। इस व्यवस्था ने भुगतान की गति को भी बदल दिया है। पहले नकद लेनदेन, बैंकिंग प्रक्रिया या अन्य भुगतान माध्यमों में अधिक समय लग सकता था, जबकि यूपीआई ने कई सामान्य भुगतानों को कुछ सेकंड की प्रक्रिया में बदल दिया है।
55 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच
वित्त मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार देश में यूपीआई उपयोगकर्ताओं की संख्या 55.49 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। यह संख्या बताती है कि डिजिटल भुगतान अब समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंच चुका है। देश में डिजिटल भुगतान के विस्तार के साथ क्यूआर कोड और पॉइंट ऑफ सेल यानी पीओएस मशीनों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। ओपी चौधरी के अनुसार देश में पीओएस मशीनों की संख्या 115.3 लाख और क्यूआर कोड की संख्या 7,854 लाख तक पहुंच चुकी है। इसका असर छोटे कारोबारियों पर भी दिखाई दे रहा है। पहले डिजिटल भुगतान की सुविधा मुख्य रूप से बड़े स्टोर, मॉल और संगठित व्यवसायों में अधिक दिखाई देती थी। अब ठेले, छोटे होटल, चाय दुकानों, सब्जी विक्रेताओं और स्थानीय व्यापारियों के पास भी क्तक्र कोड के माध्यम से भुगतान स्वीकार करने की सुविधा सामान्य हो गई है। यही बदलाव डिजिटल अर्थव्यवस्था की पहुंच को व्यापक बनाता है। ग्राहक के लिए भुगतान आसान होता है और छोटे व्यापारी को भी डिजिटल लेनदेन की व्यवस्था से जुडऩे का अवसर मिलता है।
किराना से पेट्रोल पंप तक यूपीआई का विस्तार
ओपी चौधरी ने विशेष रूप से रोजमर्रा के बाजारों में यूपीआई के बढ़ते उपयोग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले किराना दुकानों में सबसे अधिक नकद भुगतान का चलन था, लेकिन अब वहां भी डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ा है। उनके अनुसार केवल किराना क्षेत्र में जून महीने के दौरान 3.74 अरब यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए। यह दिखाता है कि डिजिटल भुगतान अब केवल ऑनलाइन खरीदारी या विशेष परिस्थितियों तक सीमित नहीं है। फास्ट फूड, दवा दुकान, पेट्रोल पंप, बिजली बिल भुगतान और अन्य दैनिक जरूरतों के स्थानों पर क्तक्र कोड स्कैन कर भुगतान करना आम होता जा रहा है। इससे ग्राहक को नकद राशि लेकर चलने की जरूरत कम होती है और व्यापारी के लिए भुगतान स्वीकार करना भी आसान होता है। डिजिटल भुगतान की यह व्यवस्था खासकर उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बन रही है, जहां बैंकिंग और आधुनिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच पहले सीमित मानी जाती थी। स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ अब बड़ी संख्या में लोग डिजिटल लेनदेन से जुड़ रहे हैं।
छोटे शहरों और गांवों में बढ़ा उपयोग
ओपी चौधरी ने कहा कि यूपीआई अब टियर-2 और टियर-3 शहरों के साथ-साथ गांवों में भी तेजी से रोजमर्रा की आदत बन रहा है। पहले डिजिटल भुगतान को शहरी और तकनीक से परिचित लोगों की सुविधा के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब इसकी पहुंच कहीं अधिक व्यापक हो चुकी है। छोटे व्यापारियों और ग्राहकों के लिए क्यूआर कोड आधारित भुगतान अपेक्षाकृत सरल माध्यम बनकर सामने आया है। इसके लिए बड़े स्तर के उपकरणों या जटिल भुगतान व्यवस्था की जरूरत नहीं होती। स्मार्टफोन के माध्यम से भुगतान करने की सुविधा ने इसे आम उपयोग के लिए सहज बनाया है। वित्त मंत्री ने इसे आर्थिक सशक्तिकरण से भी जोड़ते हुए कहा कि तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार जब छोटा दुकानदार, ग्रामीण क्षेत्र का व्यापारी और आम नागरिक एक ही डिजिटल भुगतान व्यवस्था का उपयोग कर सकता है, तो वित्तीय सेवाओं तक पहुंच का दायरा बढ़ता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान केवल तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि आम नागरिक के समय और सुविधा से भी जुड़ा बदलाव है।
कैशलेस व्यवस्था ने बदली खरीदारी की शैली
यूपीआई के बढ़ते उपयोग ने लोगों की खरीदारी और भुगतान करने की शैली को भी प्रभावित किया है। पहले बाजार जाते समय नकद राशि साथ रखना जरूरी माना जाता था। अब कई लोग स्मार्टफोन के जरिए अधिकांश दैनिक भुगतान कर लेते हैं। क्यआर कोड आधारित भुगतान ने दुकानदार और ग्राहक दोनों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाया है। कई जगहों पर भुगतान की पुष्टि तत्काल हो जाती है, जिससे लेनदेन में सुविधा बढ़ती है। हालांकि डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा और सतर्कता भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। उपयोगकर्ताओं को केवल भरोसेमंद माध्यमों से भुगतान करने और किसी अनजान व्यक्ति के साथ बैंकिंग या निजी जानकारी साझा नहीं करने की जरूरत है। डिजिटल सुविधा के साथ सुरक्षित उपयोग की जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है, ताकि तेजी से बढ़ती इस भुगतान व्यवस्था का लाभ सुरक्षित तरीके से लिया जा सके।
जीवन में आसानी का बड़ा उदाहरण
ओपी चौधरी ने यूपीआई को जीवन में आसानी का महत्वपूर्ण उदाहरण बताते हुए कहा कि इस व्यवस्था ने रोजमर्रा के कामों को आसान और तेज बनाया है। उनके मुताबिक भुगतान के लिए लंबी प्रक्रियाओं और नकद पर निर्भरता में कमी आई है। भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार केवल लेनदेन की संख्या बढऩे की कहानी नहीं है, बल्कि यह बदलती जीवनशैली की भी तस्वीर पेश करता है। स्मार्टफोन अब केवल संवाद या मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि बैंकिंग, भुगतान और अन्य वित्तीय गतिविधियों का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है।



