खरसिया। आगामी त्योहारी सीजन को भुनाने के लिए क्षेत्र में शक्कर के काले कारोबार का खेल जोर-शोर से शुरू हो गया है। बड़े व्यापारियों की सांठगांठ और प्रशासनिक सुस्ती के कारण बाजार में शक्कर का कृत्रिम संकट पैदा कर दिया गया है, जिससे आम जनता की जेब पर भारी डाका पड़ रहा है।
त्योहारों में बढ़ती मांग का नाजायज फायदा उठाते हुए शक्कर के दामों में बेतहाशा वृद्धि की गई है। महज पिछले 15 दिनों के भीतर ही शक्कर की कीमतों में 25 रुपये प्रति किलो तक का भारी इजाफा दर्ज किया गया है। खुदरा बाजार में शक्कर के दाम अचानक बढऩे से मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।
गोदामों में भरी है 200 से अधिक ट्रक शक्कर
स्थानीय सूत्रों और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, खरसिया शहर के ही 2 से 3 बड़े शक्कर व्यापारियों ने मिलकर इस पूरे सिंडिकेट को अंजाम दिया है। इन व्यापारियों के निजी गोदामों में वर्तमान में लगभग 200 से 300 ट्रक शक्कर दबाकर रखी गई है। गोदामों में पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद बाजार में माल की आपूर्ति रोक दी गई है, जिससे कृत्रिम किल्लत (सॉर्टेज) का भ्रम फैलाकर मनमाने दाम वसूले जा सकें।
फ्लाइंग स्क्वायड निष्क्रिय क्यों
क्या खाद्य विभाग को पिछले 15 दिनों में अचानक 25 रुपये किलो बढ़े दामों की भनक नहीं लगी। चिन्हित 2-3 बड़े कारोबारियों के गोदामों और उनकी जीएसटी ई-वे बिल प्रविष्टियों की अचानक भौतिक जांच क्यों नहीं की जा रही त्योहारों से पहले आम जनता महंगाई से राहत दिलाने और छापेमारी की प्रशासन से कार्यवाही की कर रही अपेक्षा।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
त्योहारी माहौल में खुलेआम चल रही इस जमाखोरी और कालाबाजारी से आम नागरिकों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों की मांग है कि खाद्य विभाग और उच्चाधिकारी तत्काल हरकत में आएं और इन चिन्हित व्यापारियों के गोदामों पर छापेमारी कर कड़ी कानूनी कार्रवाई करें, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
मूल्य नियंत्रण अधिनियम की खुली धज्जियां
शक्कर को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत विनियमित किया जाता है, जिसके अंतर्गत किसी भी व्यापारी के लिए एक निश्चित सीमा से अधिक स्टॉक रखना और उसकी जानकारी खाद्य विभाग को न देना दंडनीय अपराध है।
खरसिया में जारी यह जमाखोरी सीधे तौर पर आवश्यक वस्तु अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत अपराध की श्रेणी में आती है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासनिक अमले और खाद्य सुरक्षा विभाग का इस दिशा में मौन रहना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
आखिर क्यों सुस्त है जिम्मेदार महकमा
स्थानीय नागरिकों, उपभोक्ता संरक्षण मंचों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में इस बेलगाम मुनाफाखोरी को लेकर भारी गुस्सा है। जनता की मांग है कि जिला प्रशासन और राजस्व अमला तत्काल एक संयुक्त टीम गठित कर खरसिया के इन विशिष्ट गोदामों पर अचानक छापेमारी करे। यदि गोदामों में घोषित सीमा से अधिक स्टॉक पाया जाता है, तो उसे तत्काल जब्त कर सरकारी राशन दुकानों या नियंत्रित दरों पर खुले बाजार में नीलाम किया जाए, ताकि इस शक्कर माफिया की कमर टूट सके। विशेष टिप्पणी यदि आगामी 48 घंटों के भीतर प्रशासन ने इन गोदामों का भौतिक सत्यापन नहीं किया, तो यह माना जाएगा कि इस कृत्रिम संकट में तंत्र की भी मौन सहमति शामिल है।



