रायगढ़। मेडिकल इंटर्स ने स्टाइपेड में समानता की मांग को लेकर गुरुवार शाम को प्रदेश व्यापी काली पट्टी बांध कर विरोध शुरू कर दिया है। अपनी मांगों को लेकर मेडिकल कालेज परिसर में एक मौन रैली निकाली गई, जिसमें भावी डाक्टरों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया है।
मेडिकल कालेज में कार्यरत एमबीबीएस इंटर्न ने अपनी स्टाइपेंड वृद्धि की मांग को लेकर गुरुवार से आंदोलन शुरू कर दिया है। इस दौरान कालेज परिसर में मौन रैली निकाल कर अपना विरोध जताया है। साथ ही इसके बाद सभी ने अपने हाथों में काली पट्टी बांध कर इमजरेंसी सेवा देने की घोषणा की। इस संबंध में इंटर्न डाक्टर राधेश्याम ने बताया कि राष्ट्रीय मानकों और बढ़ती महंगाई के अनुरूप स्टाइपेंड में वृद्धि तथा नियमित संशोधन नीति लागू करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि वे केवल प्रशिक्षणरत विद्यार्थी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का अभिन्न अंग हैं। वे आपातकालीन सेवाओं, आईसीयू, क्रिटिकल केयर और प्रसूति सेवाओं में वरिष्ठ चिकित्सकों के मार्गदर्शन में मरीजों को सेवाएँ प्रदान करते हैं। कई बार उन्हें 24 से 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है। इसके बाद भी उन्हें वर्तमान में केवल 15,900 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलता है। लगभग 72 घंटे के मानक साप्ताहिक कार्य के आधार पर यह राशि लगभग 55 रुपये प्रति घंटा पड़ रही है, जो राज्य में एक उच्च कुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी से भी कम है। साथ ही इंटर्न डाक्टरेां का कहना है कि साढ़े चार साल की कठिन चिकित्सा शिक्षा के बाद भी उनका पारिश्रमिक कुशल श्रमिक से कम है।
मांग पूरी नहीं होने पर काम बंद करेंगे प्रदर्शन
इसी मांग को लेकर छत्तीसगढ़ के सभी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों ने ड्यूटी के दौरान काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध शुरू कर दिया है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के इंटर्न डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं। उनका कहना है कि इससे मरीजों को होने वाली परेशानी की जिम्मेदारी शासन की होगी।
सात दिन बाद सेवा करेंगे बंद
इस संबंध में भावी डाक्टरेां ने कहा कि अभी अगले सात दिनों तक काली पट्टी लगाकर इमरजेंसी सेवा देंगे, इस दौरान अगर उनकी मांगों पर विचार नहीं होता है तो अनिश्चत कालिन पूर्ण रूप सेवा बंद कर देंगे। इस विरोध प्रदर्शन में मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों से करीब 100 भावी डाक्टर शामिल हुए थे। साथ उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की अपेक्षा छत्तीसगढ़ का इंटर्न स्टाइपेड सबसे कम है है। जिसमें ओडिशा में यह 40,953 से 53,739 रुपये, पश्चिम बंगाल में 30,999 रुपये और झारखंड में 25,000 से 30,000 रुपये प्रतिमाह है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के इंटर्न को भी करीब 30 हजार रुपए प्रति माह स्टाइपेड मिलना चाहिए।



