रायपुर। आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के बावजूद मरीज से अतिरिक्त राशि लेने के मामले में राज्य नोडल एजेंसी ने राजधानी के मित्तल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, रायपुर को 3 महीने के लिए योजना से निलंबित कर दिया है। अस्पताल को मरीज के रिश्तेदार से सर्जरी के नाम पर लिए गए 90 हजार रुपए लौटाने के निर्देश भी दिए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, मरीज अल्बर्ट एक्का के परिजनों ने अस्पताल के खिलाफ आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अतिरिक्त पैसे लेने की शिकायत की थी। मामले की जांच संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, रायपुर संभाग ने की। जांच में सामने आया कि अस्पताल ने दवाइयों के लिए 15,226 रुपए और सर्जरी के लिए 90 हजार रुपए वसूले थे। जांच के बाद अस्पताल ने दवाइयों के लिए ली गई 15,226 रुपए की राशि चेक के माध्यम से मरीज के रिश्तेदारों को वापस कर दी। हालांकि, सर्जरी के लिए लिए गए 90 हजार रुपए अब तक वापस नहीं किए गए हैं। इसी आधार पर राज्य नोडल एजेंसी ने अस्पताल को आयुष्मान योजना से 3 महीने के लिए निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में अस्पताल योजना के तहत नए मरीज भर्ती नहीं कर सकेगा।
अल्बर्ट एक्का के परिवार की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग ने जांच की। इसके बाद 21 जुलाई 2026 को जारी आदेश में अस्पताल को आयुष्मान योजना से तीन महीने के लिए निलंबित किया गया और मरीज को ?90 हजार वापस करने का निर्देश दिया गया। 21 साल के शिकायतकर्ता रोहन नागेश्री का कहना है कि यदि विभागीय जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई है तो अब पुलिस को उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह भी जांच करनी चाहिए कि क्या इस मामले में कोई संज्ञेय अपराध बनता है। शिकायतकर्ता परिवार का आरोप है कि शिकायतें सार्वजनिक होने के बाद उन्हें धमकियां मिलीं। परिवार का यह भी दावा है कि बाद में रोहन के अपहरण का प्रयास हुआ, जिसकी शिकायत पुलिस को दी गई है। परिवार ने इन मामलों में भी निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग की है।
इस पूरे मामले को आगे बढ़ाने वाले नागेश्री पत्रकारिता के छात्र हैं। उसन कहना है कि उन्होंने केवल आरोप लगाने के बजाय क्रञ्जढ्ढ, विभागीय रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपने दावों को आगे बढ़ाया। लगातार शिकायतों और दस्तावेजों के आधार पर ही विभागीय जांच हुई और अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई हुई। युवा छात्र का कहना है कि उसकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए है। उनका मानना है कि यदि किसी संस्था के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं तो कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा की भी मांग की है। उनका कहना है कि पहले दी गई धमकियों और अपहरण प्रयास की शिकायतों को देखते हुए भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में उनकी शिकायतों और उपलब्ध रिकॉर्ड को ध्यान में रखकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
मित्तल हॉस्पिटल 3 महीने के लिए आयुष्मान योजना से सस्पेंड
कार्ड से पैसे निकालने के बाद भी कैश लिए, 90 हजार लौटाने के निर्देश



