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NavinKadam > रायपुर > कंज्यूमर कोर्ट ने मारुति सुजुकी को नई कार देने या 20 लाख लौटाने के दिए निर्देश
रायपुर

कंज्यूमर कोर्ट ने मारुति सुजुकी को नई कार देने या 20 लाख लौटाने के दिए निर्देश

ई-20 पेट्रोल डालने से इंजन खराब

lochan Gupta
Last updated: July 17, 2026 12:11 am
By lochan Gupta July 17, 2026
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5 Min Read

रायपुर। देशभर में पेट्रोल में ई-20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित ईंधन) के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी बीच रायपुर में ई-20 पेट्रोल से कार के इंजन के खराब होने का मामला सामने आया है। इससे जुड़े मामले में कंज्यूमर कोर्ट ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर को जिम्मेदार ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि नई कार दी जाए या 20 लाख लौटाए जाएं। कोर्ट ने माना कि गाड़ी का इंजन ई-20 फ्यूल के हिसाब से नहीं था, फिर भी कार कस्टमर को बेची गई। कोर्ट ने कहा कि 45 दिनों के अंदर ग्राहक को उसी मॉडल की नई कार दी जाए, जो ई-20 फ्यूल के अनुकूल हो। अगर ऐसा नहीं किया तो कंपनी को वाहन की पूरी कीमत करीब 20.5 लाख रुपए और अन्य खर्च भी लौटाने होंगे।
डॉ. प्रेमराज देबता ने बताया कि उन्होंने जून 2024 में मारुति सुजुकी की नेक्सा डीलरशिप से ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस खरीदी थी। खरीदारी के समय डीलर ने बताया था कि कार दिसंबर 2023 में मैन्युफैक्चर हुई है, लेकिन बाद में आयोग के रिकॉर्ड से पता चला कि कार जनवरी 2023 में मैन्युफैक्चर हुई थी। डॉ. प्रेमराज रोजाना 150 से 200 किलोमीटर तक सफर करते हैं, इसलिए उन्होंने हाइब्रिड गाड़ी ली थी। शुरुआत में वाहन ठीक चला, लेकिन 5 महीने बाद 11 नवंबर 2024 को अचानक डैशबोर्ड पर इंजन मालफंक्शन का अलर्ट आया और कार बंद हो गई। डीलरशिप ने जांच के बाद इसे मिलावटी पेट्रोल की समस्या बताते हुए फ्यूल टैंक खाली कराया। निकाले गए पेट्रोल में नीचे अलग तरह का सफेद पदार्थ जमा मिला, जिसके बाद डॉ. देबता ने तुरंत पेट्रोल पंप और कंपनी से शिकायत की, लेकिन जांच में पेट्रोल पंप ने ईंधन को सही बताया। इसके बावजूद कार बार-बार खराब होती रही। कंपनी ने माना कि पहली बार टंकी पूरी तरह साफ नहीं हुई थी और केमिकलयुक्त ईंधन अंदर रह गया था। इसके बाद फिर सफाई की गई, लेकिन फिर फ्यूल टैंक, पाइपलाइन और फिल्टर में फिर सफेद परत और तरल पदार्थ मिला। अगली बार डैशबोर्ड पर इंजन में गड़बड़ी की चेतावनी आई और ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) मोड ने काम करना बंद कर दिया। इंजन पूरी तरह ठप हो गया और कार चलने लायक नहीं बची। बाद में कंपनी ने ई-मेल के जरिए बताया कि इंजन पूरी तरह खराब हो गया है और उसे बदलने में करीब 5.30 लाख रुपए खर्च होंगे, जो वारंटी में शामिल नहीं होगा। कंपनी ने फिर कार ठीक कर सौंपी, लेकिन डीलरशिप के सामने पेट्रोल भरवाने के बाद भी वाहन करीब 10 किलोमीटर चलकर फिर बंद हो गया। इस बार टैंक से दही जैसी सफेद परत और तरल पदार्थ मिला। डॉ. प्रेमराज ने नई कार या पूरी राशि वापस करने की मांग की, लेकिन कंपनी ने साफ इनकार कर दिया। फिर मामला कंज्यूमर कोर्ट पहुंचा। डॉक्टर ने मार्च 2025 में याचिका दायर की। पेट्रोल के नमूनों की जांच एसजीएस लैब में कराई गई। रिपोर्ट में ईंधन में एथेनॉल की मौजूदगी की पुष्टि हुई। जांच में पाया गया कि पेट्रोल के निचले हिस्से में सफेद परत के रूप में ईथेनॉल अलग होकर जमा था। रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन ई-20 श्रेणी का था, लेकिन एथेनॉल के अलग होने से उसकी प्रभावी मात्रा केवल 6 से 7 प्रतिशत रह गई थी। आयोग ने माना कि गाड़ी का इंजन ई-20 ईंधन के अनुरूप नहीं था, फिर भी उपभोक्ता को ऐसी कार बेची गई। 14 जुलाई 2026 को उपभोक्ता फोरम ने पीडि़त के पक्ष में फैसला सुनाया और आदेश दिया कि यदि कंपनी 45 दिनों के अंदर नई ई-20 अनुकूल कार उपलब्ध नहीं कराती है, तो उसे वाहन की कीमत 20.5 लाख रुपए, आरटीओ पंजीकरण, बीमा और बाकी खर्चों सहित पूरी राशि लौटानी होगी। मानसिक प्रताडऩा के लिए 1 लाख रुपए और केस लडऩे के 10 हजार रुपए भी अदा करने होंगे।
ऑटो विशेषज्ञ के. महेश कुमार के अनुसार, एथेनॉल में नमी हो तो वह पेट्रोल में सामान रूप से नहीं घुल पाता, क्योंकि दोनों की डेंसिटी अलग होती है। इससे फ्यूल पंप और फ्यूल सिस्टम के बाकी हिस्सों पर असर पड़ सकता है। मारुति सुजुकी इंडिया के कॉर्पोरेट अफेयर्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने एथेनॉल ईंधन को लेकर कहा, ‘पिछले कुछ दिनों से हमने सुना है कि कारों में एथेनॉल के इस्तेमाल को लेकर कुछ शंकाएं जताई जा रही हैं।’

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