रायगढ़। रायगढ़ और धर्मजयगढ़ वन मंडल में 8 मई से 1 जून के बीच, यानी महज 25 दिनों के भीतर 4 हाथी शावकों की मौत के मामले में जांच रिपोर्ट से अहम खुलासे हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार एक शावक की मौत हेपेटाइटिस (लिवर संक्रमण) और दूसरे की सेप्टिसीमिया (रक्त संक्रमण) के कारण हुई है। जबकि इससे पहले एक अन्य शावक की मौत निमोनिया से होने की पुष्टि भी हो चुकी है। एक ही हाथी दल के शावकों की लगातार हो रही मौतों को देखते हुए वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया था और पोस्टमॉर्टम के बाद सैंपल जांच के लिए देहरादून और बरेली के लैब भेजे गए थे, जहां से आई रिपोर्ट के बाद अब मौतों का असली कारण साफ हो गया है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार हेपेटाइटिस लिवर को प्रभावित करने वाला संक्रमण है, जबकि सेप्टिसीमिया में रक्त संक्रमित हो जाता है, वहीं लगातार सामने आ रहे इन गंभीर मामलों को देखते हुए वन विभाग ने अब हाथी शावकों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को पहले से काफी ज्यादा बढ़ा दिया है।
लगातार मौतों से वन विभाग की बढ़ी चिंता
दरअसल, जिले में पिछले कुछ समय से हाथी शावकों की लगातार मौत के मामले सामने आ रहे थे। तालाबों और अन्य जल स्रोतों के पास शावकों के शव मिलने से वन विभाग की चिंता बढ़ गई थी। जांच में सामने आया कि मृत शावक एक ही हाथी दल के थे और वे संक्रमण से प्रभावित थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को हाथियों की मौत के कारणों और बचाव के उपायों पर चर्चा के लिए एक कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें एक्सपर्ट्स ने जांच प्रक्रिया, संक्रमण की पहचान और हाथियों की सुरक्षा को लेकर अहम जानकारी शेयर की।
हाथियों की बीमारियों और बचाव की जानकारी दी
कार्यशाला में कई राज्यों से आए वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। उन्होंने हाथियों में होने वाली बीमारियों, उनके कारणों, बचाव के उपायों और निगरानी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। दो दिन तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में रायगढ़ समेत अन्य वन मंडलों के अधिकारियों और कर्मचारियों को हाथियों की देखभाल, स्वास्थ्य जांच और संरक्षण के बारे में विस्तार से बताया गया।
अब हाथी शावकों पर बढ़ाई गई निगरानी
जिले के दोनों वन मंडलों के जंगलों में इस समय 137 हाथी मौजूद हैं। इनमें 37 नर, 62 मादा और 35 शावक शामिल हैं। हाल के दिनों में शावकों की लगातार मौत के बाद वन विभाग ने उनकी निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों के अनुसार ट्रैकर्स, हाथी मित्र दल और वनकर्मियों की टीम हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है। साथ ही ड्रोन और ट्रैप कैमरों की मदद से भी निगरानी की जा रही है। रात के समय थर्मल ड्रोन के जरिए हाथियों की लोकेशन और मूवमेंट पर विशेष नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।
शावकों की मौत पर रिपोर्ट आई, संक्रमण की हुई पुष्टि
डीएफओ जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडलों में एक ही हाथी दल के शावकों की मौत हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की मौजूदगी में शावकों का पोस्टमॉर्टम कराया गया। आवश्यक सैंपल एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट में एक शावक की मौत का कारण हेपेटाइटिस (यकृत संक्रमण) और दूसरे की मौत का कारण सेप्टीसीमिया (गंभीर रक्त संक्रमण) पाया गया है। डीएफओ ने कहा कि हाथी शावकों को सुरक्षित रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विभाग कार्ययोजना तैयार कर रहा है। हाल ही में आयोजित कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने हाथियों में होने वाले संक्रमण और उसके बचाव को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां शेयर की हैं।



